संगाेष्ठी, प्रदर्शनी और स्कूलों में भाषण तक सिमटा सड़क सुरक्षा सप्ताह, हादसों में मौतें कम नहीं हो रहीं

News - राजधानी का 33वां सालाना सड़क सुरक्षा सप्ताह भी प्रदर्शनी, संगोष्ठी और स्कूलों में भाषण तक सीमित है। 11 जनवरी से शुरू...

Jan 16, 2020, 07:36 AM IST
राजधानी का 33वां सालाना सड़क सुरक्षा सप्ताह भी प्रदर्शनी, संगोष्ठी और स्कूलों में भाषण तक सीमित है। 11 जनवरी से शुरू हुआ सड़क सुरक्षा सप्ताह 17 जनवरी तक चलेगा, उसके पुलिस रुटीन के काम में लग जाएगी। हर साल यही हो रहा। इसी का नतीजा है लोग सिग्नल का पालन नहीं कर रहे। सड़कों पर जाम लग रहा। हादसे रोकने के भी कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे, इससे मौतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। 2018 में रायपुर में सड़क हादसों में 420 मौतें हुईं, पिछले साल आंकड़ा बढ़कर 460 पहुंच गया। ऐसे में सड़क सुरक्षा सप्ताह के औचित्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

राजधानी में चल रहे सड़क सुरक्षा सप्ताह में इस बार भी ट्रैफिक सिग्नल के पालन को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सिस्टम सुधारने के नाम पर ट्रैफिक पुलिस के जवान और अफसर राेज औसतन दो-तीन स्कूलों में जाकर बच्चों को यातायात नियमों का पालन करने की समझाइश दे रहे हैं। बच्चों को कहा जा रहा घर जाकर अपने माता-पिता को हेलमेट पहनने का कहें और यातायात नियमों की जानकारी दें। फील्ड में हालात बिलकुल अलग हैं। जय स्तंभ चौक हो या शास्त्री चौराहा या फिर नगर घड़ी चौक के पास का तिगड्‌डा। कहीं भी ट्रैफिक नियम का पालन नहीं किया जा रहा। रेड सिग्नल कई हाई स्पीड बाइकर्स फर्राटे से निकल जाते हैं जो खड़े रहते हैं, उनमें कई जेब्रा क्रासिंग लाइन के पार बाइक खड़ी करते हैं।

2018 में 420 और 2019 में 460 मौतें सड़क हादसे में

हर साल 12-15 लाख से ज्यादा खर्च

सड़क सुरक्षा सप्ताह में हर साल औसतन 12-15 लाख खर्च किया जा रहा है। पिछले साल 15 लाख का बजट आया था। इस साल 12 लाख का बजट है। पूरे पैसे प्रदर्शनी, संगोष्ठी और उसमें शामिल होने वालों के नाश्ते में खर्च किया गया। पिछले साल तीन लाख का पंडाल लगाने के अलावा दो लाख के सिर्फ बैनर-पोस्टर लगाए गए। कुछ हेलमेट भी बांटे गए। निबंध और पेंटिंग प्रतियोगिता भी रखी गई थी। इसमें नगद इनाम दिया गया। रैली का आयोजन भी किया गया। गौरतलब है कि इसके लिए बजट केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता है।

आम लोग तक पहुंच ही नहीं रही पुलिस

सड़क सुरक्षा सप्ताह से आम लोग जुड़ ही नहीं पा रहे हैं, सिर्फ पुलिस द्वारा बुलाए लोग और बच्चे शामिल होते हैं। इस वजह से भी पूरे शहर को फायदा नहीं मिल रहा है। साल दर साल ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। सड़क हादसे कम नहीं हो रहे हैं। इसमें मरने वालों के आंकड़े भी बढ़ रहे हैं। सड़क सुरक्षा सप्ताह में आम लोग कम ट्रैफिक पुलिस ज्यादा दिखायी देती है।

दस माह में 21 हजार का ई चालान

पिछले दस महीने में 21 हजार लोगों के घरों पर ई-चालान भेजा है। उनसे 28 लाख रुपए की वसूली की गई है। इसी से पता चलता है कि हर साल ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। 20 हजार हेलमेट बांटने के अलावा आउटर में रोज 60 चालान बिना हेमलेट वाहन चालकों के किए जा रहे हैं।

एक्सपर्ट व्यू

रिटायर आईपीएस राजीव माथुर का मानना है ऐसा करने से आएगी जागरुकता








X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना