सद््गुरु का सानिध्य आनंददायी होता है और उनकी डांट प्रसाद है: मुनि मनीष

News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर एमजी राेड स्थित जैन दादाबाड़ी में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि मनीष सागर ने...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:51 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news sadhguru39s brother is joyful and his scolding is prasad muni manish
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

एमजी राेड स्थित जैन दादाबाड़ी में चल रहे चातुर्मासिक प्रवचन में मुनि मनीष सागर ने कहा कि वास्तव में अतिथि उसे कहते हैं जो बगैर आमंत्रण के अकस्मात पधारते हैं। प्रायोजित रूप से या आमंत्रण पर आने वाले को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अतिथि नहीं कहा जा सकता। श्रेष्ठ अतिथि वे होते हैं जो पंच महाव्रतधारी हों। गुरू रूप अतिथि से धर्म मिलता है। वे हमारे भव-भव को सुधारते हैं क्योंकि सद्गुरु का सानिध्य आनंददायी है। उनकी डांट या सीख प्रसाद रूप है। ऐसे उत्कृष्ट अतिथि को ही अपना श्रेष्ठ अतिथि मानना, उनके निकट रहना और ऐसे उत्कृष्ट अतिथि न मिले तो देव-गुरू और धर्म पर आस्था रखने वाले व्रतधारी श्रावक को अतिथि मानना। इन्हें मध्यम अतिथि कहा गया है। अतिथि सम्मीभाग व्रत उसे कहा गया है जिसमें अपने उत्कृष्ट अतिथि की आवभगत के साथ उनके लिए अपनी सामग्री में अहोभाव के साथ सात्विक भोज्य पदार्थ या उनकी आवश्यकता की वस्तु प्रदान कर आनंदित होना। जो उनकी आवश्यकता है, वही उन्हे वोहराना। मगर किसी वस्तु को उन्हें देने की जिद ना करना।

उन्होंने कहा कि जीव राशि क्षमापणा प्रत्येक श्रावक के लिए आवश्यक है क्योंकि हमने न जाने किन-किन भवों में किन-किन रूपों में सूक्ष्म जीवों की हिंसा का तांडव किया है। इसीलिए इस जगत की अनंत जीव राशियों से क्षमापणा अवश्य करें। जीव राशि क्षमापणा और जीव दया के 9 क्षेत्रों में यथाशक्ति दान करें। इसके पीछे आपकी नीति और रीति केवल स्वयं को सुधारने की हो। श्रावक के लिए निर्धारित 12 व्रतों में से जितने ग्रहण कर सकें। अवश्य धारण करें।





व्रत का संकल्प धारण करते समय उपवास में रहे या एकासना अवश्य करें।

X
Raipur News - chhattisgarh news sadhguru39s brother is joyful and his scolding is prasad muni manish
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना