चिंता छोड़िए, अच्छा सोचिए क्योंकि जैसा सोचेंगे वैसे बनेंगे : मनीष सागर

News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर जैसा आप सोचते हैं, वैसे बन जाते हैं। चिंता छोड़िए और अच्छा सोचिए। सोचिए कि वो कौन सा...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:31 AM IST
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

जैसा आप सोचते हैं, वैसे बन जाते हैं। चिंता छोड़िए और अच्छा सोचिए। सोचिए कि वो कौन सा मार्ग है जो मुझे परमात्मा तक लेकर जाएगा क्योंकि आत्मा की सफलता परमात्मा से मिलन में ही है। इसके लिए आपको सबसे पहले विराधना छोड़कर आराधना करनी होगी। जीवन में सच्चे सद्गुरु मिल जाएं तो सुपात्र दान करें। संगत हमेशा अच्छी और यात्रा धार्मिक होनी चाहिए। इन सबका आचरण करेंगे तो निश्चित ही जीवन एक दिन सफल हो जाएगा। एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में मुनि मनीष सागर ने यह विचार रखे।

उन्होंने आगे कहा कि चिंताओं के समूह में रहते हुए जीवन को पतित न करें। अपने चित्त से कहें कि तू चिंताओं का त्याग कर। इस भव या अगले भव में उतना ही मिलेगा, जितने कर्म तूने किए हैं। आर्तध्यान, रौद्रध्यान न करते हुए केवल धर्मध्यान कर। जो पूर्व भवों में जीव ने संचित किया है, उसी पुण्य से इस भव में भोग-समृद्धि, राज्य और सत्-पुरूषार्थ से मोक्षलक्ष्मी आदि जिसे प्राप्त होते हैं, उसी महापुरुष के चरणों में तीनों लोक के जीव दास हो जाते हैं। वे अपने सद्चरित्र और अपनी निर्मलता के बल पर पूजे जाते हैं। गौरतलब है कि दादाबाड़ी में नवपदजी ओली की आराधना के अंतर्गत प्रवचन श्रृंखला चल रही है। शनिवार को श्रीपाल-मैना सुंदरी कथानक के अंतर्गत महाराजा धरापाल की नगरी दलपत्तन में राजकुमारी श्रृंगारसुंदरी व पांच सखियों द्वारा स्वयंवर सभा में पूछे जा रहे प्रश्नों और श्रीपाल कुमार द्वारा दिए गए उत्तरों पर मुनि ने प्रवचन दिया।

धर्म कभी विफल नहीं जाता, बशर्ते वह पूरे मन से किया गया हो

मुनि महेंद्र ने कहा कि धर्म कभी विफल नहीं जाता। अगर आपने अच्छे काम कर रहे हैं तो निश्चित है कि आपको अच्छा फल भी मिलेगा, बशर्ते आपने उस काम को पूरे मन से किया हो। अधूरे मन से किया काम कभी आपको फल नहीं दे सकता। धार्मिक क्रियाएं तब तक फलदायी नहीं हो सकतीं जब तक आपके मन में सिद्ध चक्र न बसा हो। सिद्ध चक्र का साधक वही हो सकता है जो अपने अजर-अमर-अविनाशी स्वरूप पर आस्था रखकर स्वयं को पहचान ले। ऐसे लोगों को वांछित फलों की प्राप्ति होती है। सिद्धचक्र यानी सिद्ध बनाने वाला चक्र या सिस्टम। इसी के जरिए अंत में जाकर सिद्ध बना जा सकता है।

तनाव प्रबंधन पर छह दिवसीय शिविर 15 से

चातुर्मास समिति के उपाध्यक्ष तरूण कोचर ने बताया कि ‘स्ट्रेस मैनेजमेंट’ विषय पर 6 दिवसीय आध्यात्मिक शिविर 15 से 20 अक्टूबर तक किया गया है। दादाबाड़ी में शिविर सुबह 6 से 7.30 और शाम को 8.30 से 10 बजे तक आयोजित होगा। अध्यात्म योगी महेंद्र सागर महाराज और युवा मनीषी मनीष सागर महाराज के सानिध्य में शिविर संपन्न होगा। इसके लिए पंजीयन दादाबाड़ी कार्यालय अथवा निर्धारित वेब लिंक के माध्यम से किया जा सकता है।

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