टैक्स से पहले मकान का कंप्यूटर नंबर बना बड़ा झमेला, हर वार्ड में ऐसे सैकड़ों घर जिनमें यही दर्ज नहीं

News - संपत्ति कर अदा करने के लिए जोन दफ्तरों में पहुंचने वाले लोग नई परेशानी में फंस रहे हैं। पुरानी रसीद लेकर राजस्व...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news the computer number of the house became huge before tax hundreds of houses in every ward which are not registered

संपत्ति कर अदा करने के लिए जोन दफ्तरों में पहुंचने वाले लोग नई परेशानी में फंस रहे हैं। पुरानी रसीद लेकर राजस्व कर्मचारियों के पास जाने के बाद वे तब तक टैक्स की रकम नहीं लेते हैं, जब तक उसमें कंप्यूटराइज्ड नंबर न डल जाए। ये वही नंबर है, जिसे पिछले साल सर्वे के बाद लिखा गया था। इसे दर्ज करने के लिए कंप्यूटर अापरेटर भी हैं लेकिन ज्यादातर लोगों को उसका यही जवाब है कि मकान की एंट्री ही नहीं है। कंप्यूटराइज्ड नंबर नहीं मिलने पर मोहर्रिर टैक्स नहीं ले रहे हैं। जोन के कर्मचारी लोगों को ये कहकर लौटा रहे हैं कि अपने अासपास घर के आसपास वालों का नंबर लेकर आ जाइए, तो एंट्री हो जाएगी। लेकिन लोगों का कहना है कि पूरी-पूरी गली के नंबर गायब हैं। इस मुद्दे पर हर जोन दफ्तर में रोजाना विवाद के हालात बनने लगे हैं।

इसलिए नहीं मिल रहीं आॅनलाइन एंट्री

आॅनलाइन सर्वे करने वाली कंपनी ने पिछले साल जो सर्वे किया था उस दौरान कई लोग घरों में नहीं मिले थे और कई जगहों पर लोगों के घरों में ताले थे। ऐसे लोगों के मकानो‌ं की नाप-जोख ही नहीं हो पाई। इस वजह से सर्वे करने वाली कंपनी ने इन मकानों को छोड़ दिया और इसकी इंट्री भी नहीं। अब ऐसे ही लोग सबसे ज्यादा परेशान हो रहे हैं। इनके अलावा हजारों की संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिनके मकानों का नापजोख होने के बावजूद उसकी ऑनलाइन इंट्री नहीं की गई। कंपनी के पास स्टाफ की कमी होने की वजह से यह काम आधा-अधूरा ही हो पाया।

सर्वर आईपी ने बढ़ाई मुश्किल

निगम के पुराने सर्वर को अपडेट किया जा रहा है। इसकी स्पीड भी बढ़ाई जा रही है। यह काम एक हफ्ते से हो रहा है। इसलिए लोगों की परेशानी और बढ़ गई है। पुराने सर्वर को अपडेट करने की वजह से उसकी स्पीड कम हो गई है। लोग टैक्स रसीद लेकर जा रहे हैं तो कंप्यूटर ऑपरेटर उन्हें सोमवार को आने की सलाह दे रहे हैं। अफसरों का दावा है कि दो दिनों के भीतर सर्वर अपडेट करने का काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद मकानों की जो ऑनलाइन इंट्रियां हुई है वो आसानी से दिख जाएंगी।

नामांतरण नहीं हुअा अाॅनलाइन

टैक्स अदा करने वाले ऐसे लोग और परेशान हो रहे हैं जिन्होंने पिछले एक-दो साल में किसी से जमीन और मकान खरीदे हैं और उसका निगम में नामांतरण करवाया है। ऐसे किसी भी केस की एंट्री ऑनलाइन दर्ज नहीं की गई है। क्योंकि पुराने दस्तावेजों और नापजोख के आधार पर पुराने मकान और जमीन मालिक का नाम ही ऑनलाइन इंट्री में दर्ज है। निगम का सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद ऐसे लोगों की इंट्री की जाएगी। यह काम कब तक पूरा होगा इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है।

ऑनलाइन संपत्ति कर अदा ही नहीं कर पा रहे

जमीन और मकानों के रिकार्ड पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं होने की वजह से लोगों को संपत्ति कर अदा करने के लिए बार-बार जोन दफ्तर में जाना ही पड़ रहा है। इसके अलावा जिन जोन दफ्तरों में ऑनलाइन टैक्स अदा करने की सुविधा दी गई थी वो भी फेल हो गई। सर्वर के काम नहीं करने की वजह से ऑनलाइन टैक्स जमा होता ही नहीं है।

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