मेयर के दावेदार उतरेंगे वार्डों से, अपने साथ बगल की सीटें जिताने का टास्क

News - मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने पर अब बीजेपी सभी दावेदारों को वार्डों से उतारेगी। मेयर के दावेदारों को...

Oct 13, 2019, 07:25 AM IST
मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होने पर अब बीजेपी सभी दावेदारों को वार्डों से उतारेगी। मेयर के दावेदारों को अपने वार्ड के साथ ही पड़ोस की सीटों को जिताने की भी जिम्मेदारी होगी। हालांकि इससे पहले अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू होने से क्या नुकसान होंगे, यह बताने के लिए बीजेपी मुहिम छेड़ने की तैयारी में है। कांग्रेस सरकार बनने के दस महीने में शहरों में विकास कार्य नहीं होने को भी मुद्दा बनाया जाएगा।

नगर निगमों में पार्षदों में से मेयर चुनने की सरकार की मंशा सामने आते ही बीजेपी संगठन ने तैयारी शुरू कर दी थी। हालांकि प्रारंभिक तौर पर राज्य निर्वाचन आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर बीजेपी ने विरोध भी जताया था। उस समय सीएम भूपेश बघेल ने ऐसे किसी फैसले के संबंध में इंकार कर दिया था। मध्यप्रदेश और राजस्थान में अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू होने के बाद यह तय माना जा रहा था कि छत्तीसगढ़ में भी सरकार यह व्यवस्था लागू करेगी। बीजेपी इसे भी सकारात्मक ढंग से अपनाने की तैयारी में है। मेयर का चुनाव लड़ने के लिए सभी शहरों में आधा दर्जन से ज्यादा नाम सामने आ रहे थे। अब सभी दावेदारों को पार्टी उनके वार्ड से चुनाव लड़ने का मौका देगी। साथ ही, एक-दो सीटें जिताने के लिए भी कहा जाएगा। इस तरह मेयर का चुनाव लड़ने पर दावेदार को जो खर्च आएगा, वह कम हो जाएगा। पूरा फोकस ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने पर रहेगा, जिससे मेयर चुनने में कोई दिक्कत न आए।

बूथों की टीम पहले ही तैयार : सत्ता से बाहर होने के बाद बीजेपी ने संगठन पर फोकस किया। अब सभी शहरों में बूथाें की टीम बन चुकी है और मंडलों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इस टीम की मदद से बीजेपी वार्ड स्तर पर जीतने की रणनीति बनाएगी।

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वार्ड से किनारा करने वाले पार्षद फिर हुए सक्रिय, बढ़ेंगे उम्मीदवार

अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू होने की खबर से रायपुर निगम की राजनीति गर्माने लगी है। कांग्रेस व भाजपा दोनोें ही दलों से पार्षद प्रत्याशी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। कुछ पार्षदों ने अपने वार्ड के महिला या ओबीसी आरक्षित होने के बाद घर की महिला सदस्यों को चुनाव लड़ाने के बजाय दूसरे वार्ड से दावेदारी की तैयारी करने लगे हैं। अब बड़े-बड़े नेताओं में पार्षद बनने की होड़ मचने लगी है। एक-दो दशक से निगम की राजनीति में सक्रिय पार्षद अब वार्डों में फोकस करने लगे हैं।

भाजपा से दावेदारों की फौज : संजय श्रीवास्तव कालीमाता वार्ड से लड़ सकते हैं। सूर्यकांत राठौर का वार्ड प्रभावित नहीं हुआ है। प्रफुल्ल विश्वकर्मा का वार्ड भी सामान्य है। रमेश सिंह ठाकुर का वार्ड वामन राव लाखे ओबीसी है। महिला दावेदारों में डीडी नगर से मीनल चौबे सामने हैं। पार्षद मनोज प्रजापति महर्षि वाल्मीकि या सुभाष चंद्र बोस वार्ड से दावेदारी कर सकते हैं। भगवतीचरण वार्ड से राजकुमार वाडिया भी सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस में भी कम नहीं दौड़ : बंजारी माता वार्ड से नागभूषण राव यादव, मौलाना अब्दुल रऊफ वार्ड से एजाज ढेबर का वार्ड अारक्षण से अप्रभावित है। श्रीकुमार मेनन का वार्ड महिला होने के बाद वे रामकृष्ण परमहंस वार्ड से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। रानी लक्ष्मी बाई से गौसिया खान और मदर टैरेसा वार्ड से तरुणेश परिहार चुनाव के लिए तैयारी कर रहे हैं। बाबू जगजीवन राम वार्ड के महिला होने पर अब पूर्व पार्षद सुनील वांद्रे भी प|ी को लड़ाने के बजाए दूसरे वार्ड से खुद तैयारी कर सकते हैं।

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