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कचरे से बनी खाद से जी उठा जड़ से उखड़ चुका नीम का पौधा, तब से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम में जुटीं हैं गरिमा

News - विवेकानंद नगर में रहने वाली 22 साल की गरिमा लूनिया काे आईआईटी दिल्ली की अाेर से ग्लोबल यंग लीडर फैलोशिप अाैर...

Oct 12, 2019, 07:51 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news the neem plant that has been uprooted from the root raised from the compost made from waste has been engaged in the campaign of environmental protection since then
विवेकानंद नगर में रहने वाली 22 साल की गरिमा लूनिया काे आईआईटी दिल्ली की अाेर से ग्लोबल यंग लीडर फैलोशिप अाैर कर्मवीर चक्र अवॉर्ड से नवाजा जाएगा। अाज शनिवार को होने वाले फंक्शन में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। पढ़ाई के साथ ही अन्य क्षेत्रों में बेहतर काम करने वाले युवाओं को प्रेरित करने के मकसद से ये अवॉर्ड चुनिंदा स्टूडेंट्स को दिया जाता है। बनारस यूनिवर्सिटी से एन्वायरमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी से एमएससी करने वाली गरिमा लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं। वे जैविक खाद, कचरे से खाद बनाने की तकनीक पर काम कर रही हैं। इसके लिए उन्हें कई फैलोशिप और अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। इसकी शुरुआत के बारे में गरिमा ने बताया, 2016 में घर के पास नीम का पौधा लगाया था। आंधी से वो पौधा जड़ सहित उखड़ गया। तब घर पर सब्जियों के कचरे से खाद बनाती थी। खाद यूज करके पौधा दोबारा उसी जगह लगाया। जड़ से उखड़ चुका पौधा कचरे की खाद से दोबारा जी उठा। अब पौधा पेड़ बन चुका है, उसकी हाइट 10 फीट से ज्यादा है। इसी पौधे की ग्रोथ ने मेरी सोच बदली। मुझे महसूस हुआ कि हम कचरे का सही यूज कर ग्रीनरी बढ़ा सकते हैं। साइंस स्ट्रीम से स्कूलिंग करने वाली गरिमा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लाइफ साइंस में बीएससी किया है। घरवाले चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें लेकिन पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को अागे बढ़ाने के मकसद से उन्होंने लाइफ साइंस की पढ़ाई चुनी।

शहर की गरिमा लूनिया को आज ग्लोबल यंग लीडर फैलोशिप और कर्मवीर चक्र अवॉर्ड से सम्मानित करेगा आईआईटी दिल्ली

रिसर्च प्रोजेक्ट का रहीं हैं हिस्सा

जून 2019 में केरल में इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी ने रिसर्च के लिए गरिमा सहित देश के चुनिंदा स्टूडेंट्स का सलेक्शन किया। वहां उन्होंने मराइन राइस पर दो महीने रिसर्च की। केरल में ऐसी टेक्निक से धान उगाया जाता है, जिसके तहत सिंचाई के दौरान पानी के साथ नमक मिलाया जाता है। इस पर गरिमा ने रिसर्च किया कि जैविक खाद का यूज करते हुए इसे कैसे और बेहतर किया जा सकता है। इस रिसर्च के लिए उन्हें 25 हजार की फैलोशिप भी मिली। जनवरी 2019 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की ओर से बेंगलुरू में समर रिसर्च फैलोशिप प्रोग्राम रखा गया। इसमें गरिमा ने पेस्टीसाइड का मॉडल पेश कर थर्ड प्राइज जीता। अन्ना हजारे और नामी वैज्ञानिक सोनम वांगचुक ने उन्हें सम्मानित किया।

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