टीएन शेषन मजाक में कहते थे- मैं राजनीतिज्ञों को नाश्ते में खाता हूं, अर्जुन सिंह से लेकर लालू यादव तक को सिखाई हद

News - शेषन 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। शेषन पर कांग्रेसी होने का ठप्पा लगा था। पर कांग्रेस खुद उनके फैसलों से...

Nov 11, 2019, 07:11 AM IST
शेषन 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। शेषन पर कांग्रेसी होने का ठप्पा लगा था। पर कांग्रेस खुद उनके फैसलों से परेशान थी। शेषन अक्सर मजाक में कहते थे- मैं नाश्ते में राजनीतिज्ञों को खाता हूं। मप्र, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश में भाजपा सरकारों को भंग करने के बाद पूर्व मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा था कि इन राज्यों में चुनाव सालभर बाद होंगे। शेषन ने तुरंत प्रेस विज्ञप्ति जारी की, याद दिलाया कि चुनाव की तारीख मंत्रिगण नहीं, चुनाव आयोग तय करता है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर भी शेषन सख्त रहे। लालू, शेषन को जमकर लानतें भेजते। कहते- शेषनवा को भैंसिया पे चढ़ाकर गंगाजी में हेला देंगे। बिहार में 1995 में 4 चरणों में चुनाव हुए थे।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन नहीं रहे, आयोग को उसकी ताकत याद दिलाई थी

किस्से: सतर्क इतने कि प्रधानमंत्री को भी बिना जांचे बिस्किट नहीं खाने दिया

सुरक्षा को लेकर सख्त: कैबिनेट सचिव रहे शेषन ने एक बार राजीव गांधी के मुंह से यह कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो चीज नहीं खानी चाहिए, जिसका पहले परीक्षण न किया गया हो।

स्वामी मनाते रहे, पर राजीव से मिलने के बाद ही आयुक्त बनने पर राजी हुए

शेषन के आयुक्त बनने की कहानी बेहद रोचक है। दिसंबर 1990 की रात करीब 1 बजे तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी शेषन के घर पहुंचे। उन्होंने पूछा था, क्या आप अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनना पसंद करेंगे? करीब 2 घंटे तक स्वामी उन्हें मनाते रहे। पर राजीव गांधी से मिलने के बाद ही शेषन ने सहमति दी।

शेषन के चुनाव सुधार मिशन से ही प्रचार के गलत तरीके रुके

उम्मीदवारों के खर्च पर लगाम हो या फिर सरकारी हेलीकॉप्टर से चुनाव प्रचार के लिए जाने पर रोक शेषन ने ही लगाई। दीवारों पर नारे, पोस्टर चिपकाना, लाउडस्पीकरों से शोर, प्रचार के नाम पर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाले भाषण देना, उन्होंने सब पर सख्ती की।

चुनौती मिली तो यात्रियों से भरी बस 80 किमी तक चलाकर दिखा दी

जब शेषन चेन्नई में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर थे, तो सवाल उठा कि उन्हें ड्राइविंग और बस इंजन की जानकारी नहीं है, तो ड्राइवरों की समस्या कैसे हल करेंगे? इस पर शेषन ने ड्राइविंग के साथ बस का इंजन खोलकर दोबारा फिट करना सीखा। चेन्नई में बस हड़ताल के वक्त यात्रियों से भरी बस 80 किमी तक चलाकर ले गए।

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