कल है शरण पूर्णिमा... फिर 12 नवंबर तक कार्तिक मास और इस बीच 20 बड़े त्योहार

News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर शरण पूर्णिमा सोमवार को है और कार्तिक मास मंगलवार से शुरू हो जाएगा। महिलाएं इस मौके...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 07:45 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news tomorrow is sharan purnima then kartik month till 12 november and 20 big festivals in the meantime
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

शरण पूर्णिमा सोमवार को है और कार्तिक मास मंगलवार से शुरू हो जाएगा। महिलाएं इस मौके पर नदी-तालाबों में कार्तिक स्नान करेंगी। फिर 12 नवंबर तक लगातार 20 बड़े त्योहार पडेंगे। इनमें करवा चौथ, धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, छठ, देव दीपावली, गुरुनानक जयंती जैसे बड़े पर्व शामिल हैं। अगले एक माह घर से लेकर बाजार तक त्योहारों की रौनक नजर आएगी।

त्योहारों की धूम के बीच भगवान विष्णु 8 नवंबर को जागेंगे। माना जाता है कि भगवान देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक 4 महीने विश्राम करते हैं। उनके जागने पर जगह-जगह तुलसी विवाह कराया जाएगा। ज्योतिषियों के मुताबिक नवरात्र के बाद कार्तिक का पवित्र मास शुरू होता है। इस बार इसकी शुरुआत रेवती नक्षत्र और हर्षण योग के साथ हो रही है। मास में करीब 20 प्रमुख पर्व पड़ेंगे। हर मत को मानने वालों के लिए यह महीना काफी महत्वपूर्ण है और इसकी शुरुआत शरद पूर्णिमा के अगले दिन से होती है। शास्त्रों के मुताबिक इस अवधि में मांस-मछली व मट्ठा का त्याग करना चाहिए। बता दें कि इस महीने में व्रत की शुरूआत 17 अक्टूबर को करवा चौथ से होगी। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए निर्जला उपवास रखेंगी। चांद को चलनी में देख व्रती व्रत तोड़ेगी। वहीं 28 अक्टूबर को अन्नकूट पूजा मनाई जाएगी। इस दिन विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु को 56 प्रकार के भोग लगाए जाएंगे।

8 नवंबर को 4 माह बाद जागेंगे भगवान विष्णु, होगा तुलसी विवाह

शुक्रवार को दूधाधारी मठ में भगवान बालाजी की विशेष आरती की गई

13 को शरद ऋतु में अश्विन नक्षत्र में पूर्ण चंद्र

का संयोग होगा लाभदायक: डॉ. होस्केरे

ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे ने कहा कि आश्विन मास की पूर्णिमा को चंद्र पूर्णता को प्राप्त करता है। यानी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसी दिन श्रीकृष्ण ने महारास रचा था। मान्यता है शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। वैसे तो साल की 12 पूर्णिमा पर्व के समान हैं, लेकिन इनमें आश्विन मास की पूर्णिमा का खास महत्व है। शरद ऋतु की इस पूर्णिमा को पूर्ण चंद्र का अश्विनी नक्षत्र से संयोग होना श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इस नक्षत्र के स्वामी अश्विनीकुमार आरोग्य के स्वामी हैं। एक कथा के अनुसार च्यवन ऋषि को आरोग्य का पाठ और औषधि का ज्ञान अश्विनी कुमारों ने ही दिया था। इसी कारण ऐसा माना जाता है कि इस पूर्णिमा को ब्रह्मांड से अमृत की वर्षा होती है।

विवाह के लिए ये उपाय: विवाह में विलंब या व्यवधान हो तो शरद पूर्णिमा को घी का दीपक जलाकर चांद की राशनी में 8 बार अर्गला स्रोत का पाठ करें। शीघ्र विवाह होगा।

दीपावली से ठीक 15 दिन पहले पड़ने वाली शरद पूर्णिमा का संबंध रात्रि जागरण से है। धर्मग्रंथों के मुताबिक शरद पूर्णिमा की रात विष्णुप्रिया लक्ष्मी जी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और यह देखती हैं कि कौन उनके स्वागत के लिए जाग रहा है। जिस घर में उनके स्वागत के लिए रात्रि-जागरण, स्मरण, पूजन-संकीर्तन हो रहा होता है वहां वे प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का वरदान देकर बैकुंठ लौट जाती हैं।

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जानिए किस दिन कौन सा त्योहार...

17 अक्टू. करवा चौथ

21 अक्टू. राधाष्टमी

24 अक्टू. रंभा एकादशी

25 अक्टू. धनवंतरी जयंती, धनतेरस

26 अक्टू. हनुमज्जयंती

27 अक्टू. दीपावली

28 अक्टू. गोवर्धन पूजा

29 अक्टू. भइया दूज व चित्रगुप्त पूजा

31 अक्टू. छठ व्रत (नहाय खाय)

01 नवं. खरना (लोहंडा)

02 नवं. सूर्य षष्टी व्रतोप्रवास, संध्याकालीन अर्घ्य

03 नवं. पारण के साथ व्रत का समापन

04 नवं. गोपाष्टमी

05 नवं. अक्षय नवमी, आंवला पूजन

08 नवं. हरि प्रबोधनी एकादशी, तुलसी विवाह

09 नवं. शनि प्रदोष व्रत

10 नवं. बैकुंठ चतुर्दशी

12 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा, गुरुनानक जयंती

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