उत्तरायण हुए सूर्य... घरों में घुली तिल-गुड़ की मिठास, स्नान-दान भी

News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर बुधवार को शोभन योग के शुभ संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। लोगों का दिन...

Jan 16, 2020, 07:40 AM IST
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कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

बुधवार को शोभन योग के शुभ संयोग में मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। लोगों का दिन पूजा और दान-पुण्य में बीता। इससे पहले तड़के लोगों ने नदी-तालाबों में स्नान किया क्योंकि इस बार पुण्यकाल सुबह 8.30 बजे तक ही था। यहां लोगों ने सूर्यदेव की आराधना कर उन्हें अर्घ्य दिया। इसके बाद तिल-गुड़, खिचड़ी व वस्त्र आदि के दान का सिलसिला शुरू हुआ, जो शाम तक जारी रहा। मंदिरों में देव दर्शन के लिए भी लोग पहुंचे।

महादेवघाट स्थित महादेव मंदिर, महामाया मंदिर, राम मंदिर समेत कई मंदिरों में लोग देर रात तक दर्शन के लिए पहुंचते रहे। कई संस्थाओं ने अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में लड्डू व वस्त्र बांटे। महाराष्ट्र समाज के लोगों ने घरों में मिट्टी के छोटे घड़ों में कई प्रकार की सब्जी, फल, तिल के लड्डू, कपास आदि रखकर पूजा की। सुहागिनों को तिल और गुड़ दान किया गया। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उनके उत्तरायण होने पर मनाई जा रही संक्रांति पर लोगों ने मंदिर-मंदिर जाकर मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की। गायत्री शक्ति पीठ में हवन भी किया गया। कई स्थानों पर सूर्य मंत्रों का जाप हुआ। विभिन्न स्थानों पर तिल्ली के लड्डू, गुड़, खिचड़ी, वस्त्रों का दान करते दिखाई दिए। मंदिरों में देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

मंदिर सजाने केरल से आए थे कलाकार

मकर संक्रांति पर टाटीबंध स्थित अय्यपा मंदिर में इस बार मकर संक्रांति पर लक्षदीप महोत्सव मनाया गया। मंदिर समिति के संजीत नायर ने बताया कि लक्ष का मतलब लाख होता है। मंदिर को इतने ही दीयों से सजाया गया था। मंदिर में पहली बार ऐसा आयोजन किया गया था। इसकी तैयारी के लिए हफ्तेभर पहले ही केरल के सबरीमाला मंदिर से टीम बुलाई ली गई थी। इसके अलावा मंदिर प्रांगण को भी विशेष रूप से सजाया गया था। इसके अलावा प्रसाद के रूप में दक्षिण भारतीय पकवान बांटे गए। केरल के अय्यप्पा मंदिर में साल में एक बार दीया जलाया जाता है। उसी तर्ज पर यहां भी पर्व मनाया जाता है।

तिल दान... सूर्य-शनि के मतभेद से जुड़ी है वजह

एक कथा के अनुसार शनि देव को उनके पिता सूर्य देव पसंद नहीं करते थे। इसी कारण सूर्य देव ने शनि देव और उनकी मां छाया को अपने से अलग कर दिया। इस बात से क्रोध में आकर शनि और उनकी मां ने सूर्य देव को कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया। पुत्र यमराज ने तपस्या कर सूर्यदेव को कुष्ठ मुक्त कराया। इधर, क्रोध में आकर सूर्यदेव शनि और उनकी माता के घर कुंभ गए जो शनि प्रधान राशि है। कुंभ को उन्होंने जला दिया। इससे छाया और शनि को कष्ट हुआ। यमराज ने सौतेली माता और भाई को कष्ट में देख उनके कल्याण के लिए सूर्य से विनती की। सूर्य मान गए और शनि से मिलने उनके घर पहुंचे। कुंभ में आग लगाने के बाद वहां काले तिल के अलावा सब जल गया था। इसीलिए शनि ने सूर्य की पूजा काले तिल से की। वहीं शनि को नए घर के रूप में मकर भी मिल गया। तभी से मकर संक्रांति पर तिल दान का महत्व बढ़ा।

1 लाख दीयों से सजा अय्यप्पा मंदिर

फोटो: सुधीर सागर

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