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समाज में जब-जहां जरूरत होगी खड़े रहेंगे स्वयंसेवक

एक वर्ष पहले
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बदलते परिवेश में स्वयं को बदल रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब नए रूप में नजर आएगा। यूनीफार्म में बदलाव के बाद वह अपनी कार्यप्रणाली में भी परिवर्तन कर रहा है और समाज के करीब जाने की कोशिश कर रहा है। अब संघ के स्वयंसेवक समाज में सकारात्मक परिवर्तन को लेकर काम करेंगे। वे समाज की जरूरत के अनुसार काम करेंगे। इसमें प्रदेश के करीब 30-35 हजार स्वयं सवकों को लगाया जाएगा।

बताते हैं कि संघ ने अपने वरिष्ठ नेताओं के जरिए एक सर्वे कराया था। इसमें स्वयं सेवकों की समय की उपलब्धता, रूचि व क्षमता पर उनसे विचार-विमर्श किया गया था। देशभर में इस सर्वे में 30 साल से अधिक उम्र के 15 लाख से अधिक स्वयं सेवकों से चर्चा हुई। इनमें छत्तीसगढ़ के भी लगभग 30 से 35 हजार स्वयं सेवक शामिल हैं। इन्होंने समाज में सक्रिय भूमिका निभाने सहमति जताते हुए काम करने पर सहमति जताई। संघ का मानना है कि सीधे तौर पर लोगों की मदद के लिए आगे आने से समाज का उसके प्रति नजरिया बदलेगा। वक्त पर काम आने और दुख में शामिल होने पर ही लोग एक दूसरे के करीब आते हैं। संघ इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर 15 से 17 मार्च तक बैंगलुरू में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में विशेष रूप से बात करेगा। बैठक में सीएए व अन्य ज्वलंत मुद्दों के अलावा स्वयं सेवकों की समय की उपलब्धता, रूचि व क्षमता को लेकर ब्लूप्रिंट तैयार करेगा। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ के फैसले लेने वाली बड़ी ईकाई है। इसमें भाग लेने छत्तीसगढ़ से संघ के नेता बैंगलुरू रवाना हो चुके हैं। वे वहां प्रांत में हासिल की गई उपलब्धियों की रिपोर्ट भी देंगे। प्रांत व क्षेत्र स्तर के सरसंघ चालक, कार्यवाह, प्रचारक, अभा कार्यकारिणी के सदस्य इसमें शामिल होंगे। इस दौरान इसमें संघ नेताओं के दौरे भी तय होंगे।

सालभर के कार्यक्रम बनाती है अभा प्रतिनिधि सभा

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का महत्व इस वजह से है कि इसमें संघ के चुनिंदा 1500 नेता नेता शामिल होते हैं। देशभर के संघ के 44 प्रांतों का चुने हुए प्रतिनिधि, विशेष आमंत्रित, राष्ट्र सेवा समिति के कार्यकर्ता, संघ के 35 अनुषांगिक संगठनों के अध्यक्ष व महासचिव, विहिप, वनवासी कल्याण आश्रम आदि के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। सरकार्यवाह भैयाजी जोशी अंत में अधिवेशन के फैसलों की जानकारी देंगे।
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