हमने छह माह तक खुदाई की, 3 मीटर की गहराई में मिले राम मंदिर के प्रमाण

News - देश में 80 के दशक में अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद तूल पकड़ चुका था। तब मामला उत्तरप्रदेश के लखनऊ हाईकोर्ट में...

Nov 10, 2019, 07:45 AM IST
देश में 80 के दशक में अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद तूल पकड़ चुका था। तब मामला उत्तरप्रदेश के लखनऊ हाईकोर्ट में पहुंचा था। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि इस मामले की तह तक जाने और सबूत जुटाने के लिए विवादित स्थल की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से खुदाई करवाए। इसके बाद 1982 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के 8 सदस्यीय विशेषज्ञ अफसरों की एक टीम बनाई गई थी। बात 37 साल पुरानी हो गई, इसलिए मुझे ठीक से याद नहीं कि हमारी टीम में कौन लोग थे। हमने छह महीने तक करीब 30-40 मजदूरों के साथ बड़ी मेहनत व तत्परता से विवादित स्थल की खुदाई की। चूंकि मामला बेहद पेचीदा था और एक-एक प्रमाण बहुमूल्य था, इस वजह से हमने खुदाई में जो भी निकला उसे बड़े सहेजकर और सुरक्षित रखा। एक-एक रिकार्ड रखा कि कौन सी चीज कब और कहां से निकली। लगभग तीन मीटर की खुदाई में हमें अयोध्या में राम मंदिर होने के सबूत हाथ लगने लगे। इनमें मगर की वह प्रतिमा भी थी, जो मंदिरों में पानी निकालने के लिए रहती है। इसके अलावा बड़ी संख्या में छोटी-छोटी देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिलीं। हमें मिट्टी के टूटे-फूटे बर्तन (पात्र) भी मिले। जानवरों की अस्थियां भी मिलीं। खुदाई के दौरान सबसे बड़ा प्रमाण मिला वह था एक शिलालेख। इस शिलालेख पर अंकित है कि 1239 ईस्वी में गहरवाल राजा ने राम मंदर का निर्माण कराया था।

स्कूलों से बाजारों तक...दिनभर चहल-पहल

सिटी रिपोर्टर | रायपुर

राजधानी में सुबह से सबकुछ नार्मल रहा। बाजार और स्कूल सुबह निर्धारित समय पर खुल गए। बसें, टैक्सी और आटो रिक्शा आम दिनों की तरह ही दौड़ते रहे। होटलों और चाय-नाश्ते की दुकानों पर भी आमदिनों जैसा ही नजारा था। केवल शराब दुकानें ही बंद थी। इसके अलावा अगर कुछ अलग था तो प्रमुख चौक चौराहों पर पुलिस के जवानों की तैनाती। शहर के कुछ पुराने मोहल्लों और भीड़ वाली जगहों पर भी पांच-छह की टोली में जवान खड़े दिखे।

पुलिस ने शुक्रवार की रात कुछ चौक-चौराहों को संवेदनशील घोषित किया था। वहीं सुबह कुछ समय तक खाकी वर्दी वालों की हलचल थी। सब अलर्ट थे। दोपहर 12 बजे के बाद जैसे जैसे कोर्ट का फैसला वायरल होता गया, स्थिति और सामान्य होती चली गई। हालात देखकर चौराहों पर तैनात जवान भी सामान्य हो गए और चाय नाश्ते की दुकान पहुंच गए। वायरलेस पर बार-बार मैसेज भी प्रसारित होना बंद हो गया। भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रशासन ने ऐहतियातन एंबुलेंस की व्यवस्था भी रखी थी। किसी भी इमरजेंसी के लिए जरूरत कहीं भी नहीं पड़ी। इसके विपरीत वीकएंड होेने की वजह से बाजार, मॉल और पार्कों में भीड़ रोज की तुलना में ज्यादा रही। शाम को लोग परिवार के साथ शॉपिंग के लिए निकल पड़े। पंडरी और गाेलबाजार में तो शादियों की शॉपिंग में लोग व्यस्त नजर आए।

बाहर से बुलाए गए जवान

शहर की सुरक्षा के लिए दूसरे शहरों से भी फोर्स बुलायी गई। इसमें अधिकारी भी शामिल हैं। अफसरों ने बताया कि अतिरिक्त महिला फोर्स को भी बुलाया गया है।

स्कूलों में जल्दी छुट्‌टी

शहर के स्कूलों में छुट्‌टी नहीं थी। शनिवार होने के कारण ज्यादातर स्कूल सुबह की पाली में लगे थे। कुछ स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की छुटि्टयां समय से पहले ही कर दी। इसकी पूर्व सूचना नहीं थी, लेकिन फैसला आने के बाद स्कूल प्रशासन ने इसका निर्णय लिया।

अयोध्या फैसला
स्कूल लगे, छुट्‌टी थोड़ा जल्दी हुई।

सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी

शनिवार सुबह फैसला आने के पहले ही शहर में आठ सौ से ज्यादा पुलिस फोर्स तैनात कर दिए गए थे। अभी तीन दिन तक यही स्थिति रहेगी। पूरा अमला फील्ड में रहेगा। इधर सोशल मीडिया में नजर रखने के लिए 15 एक्सपर्ट की विशेष टीम बनाई गई। जो दिनभर मैसेज पर नजर रखती रही। इसमें साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की टीम के सदस्यों को रखा गया था। इनमें से सभी दर्जनों वाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम व ट्विटर जुड़े हैं। उनकी मदद से ही फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम में अयोध्या से संबंधित पोस्ट पर नजर रखी जा रही थी। एक-एक पोस्ट को चेक किया जा रहा था। एसएसपी शेख आरिफ हुसैन ने बताया कि उनके साइबर सेल के पास सोशल मीडिया पर नजर रखने का विशेष सॉफ्टवेयर है। उसकी मदद से कुछ विशेष पोस्ट पर नजर रखी जाती है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने लगभग आठ हजार से ज्यादा पोस्ट की जांच की है, जो रायपुर से संबंधित थे। किसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर किसी तरह का विवादित या साम्प्रदायिक भावना को ठेस पहुंचाने वाला पोस्ट नहीं किया है। सभी का पोस्ट सामान्य हैं। उन्होंने बताया कि उनकी गोपनीय टीम कई वाट्सएप ग्रुप में जुड़ी हुई है। इसमें समाज के कई लोगों की भी मदद ली जा रही है। वे भी विवादित पोस्ट पर नजर रखे हुए हैं।

वे पुलिस को अपने सामाजिक ग्रुप की जानकारी शेयर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि रायपुर में किसी भी वाट्सएप ग्रुप में भी किसी तरह का विवादित पोस्ट नहीं शेयर किया गया है।

मदरसे में सर्वधर्म बैठक, शांति बनाए रखने पर सब एकमत

इधर, अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही सर्व आस्था मंच ने बैजनाथपारा स्थित मदरसे में सर्वधर्म बैठक बुलाई। मौलाना मोहम्मद अली फारुकी, पूर्व विधायक श्रीचंद सुंदरानी, बिशप हेनरी ठाकुर समेत सभी धर्मों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए। सबने एकमत होकर लोगों से अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतहीन विवाद का बड़ी समझदारी से अंत कर दिया है। एक तरफ मंदिर तो दूसरी ओर मस्जिद के लिए जमीन देने का फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आने वाली पीढ़ी को नफरत की अंधी गलियों में जाने से बचा लिया है। जनता से यही अपील है कि कोई भी उत्तेजित न हो। संयम बनाए रखें। इस फैसले का स्वागत कर देश की एकता मे अपना योगदान दें। इस दौरान फैजल रिजवी, मनमोहन सिंह सैलानी, प्रेमशंकर गौटिया, तलवीर सिंह ढिल्लों आदि मौजूद रहे।

पुलिस तैनात, बैजनाथपारा मार्केट में चहलपहल।

यहां विशेष सुरक्षा

पुलिस ने शहर के कुछ इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। प्रशासन और पुलिस मिलकर वहां के स्थानीय नेता, जनप्रतिनिधि और बड़े-बुजुर्गों से लगातार संपर्क में है। ऐसे इलाकों में थानेदारों ड्यूटी लगाई गई है, जो थाना छोड़कर 18 घंटे से अपने फोर्स के साथ फील्ड में तैनात हैं। प्रशासन के अधिकारी भी लगातार वहां की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। राजातालाब, नूरानी चौक, पुरानी बस्ती, ताजनगर, संजय नगर, कालीनगर, आजाद चौक, बैजनाथपारा, मौदहापारा, गाजीनगर, मोवा, ईदगाहभाठा, हांडीपारा समेत कुछ अन्य इलाके शामिल हैं।



वहां पर स्थाई तौर पर फोर्स लगा दी गई है। अाला अफसर भी इलाके में लगातार चक्कर लगा रहे है। अधिकारियों ने बताया कि मुस्लिम समुदाय का रविवार को त्योहार है। रात में खुशियां मनाई जाती है, इसलिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके अलावा मंदिरों के आसपास के इलाके में भी फोर्स तैनात की गयी। कुछ संगठनों के लोगों पर नजर भी रखी गई है। ताकि फैसले को लेकर संगठन और संस्थान के लोग कुछ गतिविधियां न करें, जिस पर प्रशासन ने प्रतिबंध लगाया है।

सबूत चित्र समेत पेश किए थे कोर्ट में : विवादित स्थल की खुदाई के बाद इसकी करीब 100 पेज की रिपोर्ट लखनऊ हाईकोर्ट में पेश की गई। खुदाई में मिले सबूतों के चित्र भी अदालत में प्रस्तुत किए गए। हमारी टीम के सदस्यों की भी हाईकोर्ट में गवाही हुई। सारी तहकीकात के बाद लखनऊ हाईकोर्ट ने माना कि विवादित स्थल पर राम मंदिर था। तब फैसला हिंदु पक्ष की तरफ अाया, लेकिन मुस्लिम पक्ष ने इन सबूतों को मानने से इनकार कर दिया। तब हाईकोर्ट ने कहा कि आप की ही मांग पर विवादित स्थल की खुदाई की गई थी। अब आप लोग ही उन सबूतों को मानने से इनकार कर रहे हैं। बाद में मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। तब से यह केस वहीं चल रहा था। आज 9 नवंबर 2019 को इसका फैसला आया। मैं दैनिक भास्कर का अाभारी हूं कि इस महत्वपूर्ण काम के लिए उन्होंने मेरे अनुभव शेयर किए। यह भी बताना चाहता हूं कि तब जुटाए गए सबूत इतने पुख्ता थे कि इसके बाद कभी अदालत ने दोबारा खुदाई करने या सबूत जुटाने के लिए नहीं कहा। (जैसा जॉन राजेश पॉल को बताया)

दिन में भजन-आरती, रात में जलाए दीए

अयोध्या फैसले के बाद सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की। वहीं राममंदिर समेत कई धार्मिक स्थलों में भजन-कीर्तन किए गए। भाजपा सांसद सुनील सोनी और संतोष पांडे ने राममंदिर के कार्यक्रम में आरती की। देर रात को लोगों और संगठनों ने कई जगह पर दीए प्रज्जवलित किए। शांति नगर, राममंदिर में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव द्वारा महाआरती का आयोजन किया गया। इसमें रामप्रताप सिंह, रमेश मोदी, चंद्रशेखर साहू, दीपक म्हस्के, बबलू वर्मा, दिलीप धनगर अादि माैजूद थे।

प्रथम महिला विधायक रजनीताई उपासने ने परिवार के साथ दीप जलाए।

छठ महापर्व समिति ने 102 दीए जलाए : महादेवघाट पर सदस्यों ने ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जताई और साथ ही आपसी भाईचारा का परिचय दिया। इस मौके पर 102 दीए प्रज्जवलित किए गए।

जयस्तंभ चौक पर दिनभर सामान्य रहा ट्रैफिक।

भाजपा नेताओं ने भी अपने घरों और परिसरों में शाम को जलाए दीए।

संयम बरतने की अपील








छत्तीसगढ़ में ढाई लाख लोगों ने सर्च किया अयोध्या का रिजल्ट

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाइव5 प्रसारण, परिचर्चा और सोशल मीडिया में लगातार न्यूज वायरल होने बाद भी इंटरनेट यूजर्स गूगल पर इसे सर्च करते रहे। अयोध्या से जुड़े तथ्यों को देश के 51 लाख से ज्यादा लोगों ने सर्च किया है। इसमें अयोध्या रिजल्ट और अयोध्या फैसला दो नामों से सबसे ज्यादा सर्च किया गया है। अयोध्या रिजल्ट के नाम से सबसे ज्यादा सर्च छत्तीसगढ़ में हुआ। यहां के ढाई लाख लोगों ने इस नाम से कोर्ट के फैसले काे देखा है, तो वहीं अयोध्या फैसला के नाम से सर्चिंग में छत्तीसगढ़ का सातवां स्थान रहा है। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि लगातार अयोध्या से संबंधित तथ्यों को सर्च करने वालों की संख्या बढ़ते जा रही है। 18 घंटे में देश के 51 लाख लोगों ने इसे सर्च किया है।

चर्चित वाट्सएप ग्रुप के एडमिन से पुलिस ने सुबह की थी बात

पुलिस ने कुछ चर्चित वाट्सअप ग्रुप की जानकारी लेकर उसके एडमिन से बात कर ली थी। पुलिस अफसरों से चर्चा के बाद ज्यादातर एडमिन ने अपने ग्रुप को कंट्रोल में ले लिया। उन्होंने सेटिंग बदलकर ग्रुप में मैसेज भेजने का अधिकार अपने पास ही रख लिया। हालांकि ज्यादातर ग्रुप में शुक्रवार की रात से ही रिक्वेस्ट मैसेज चलने लगा कि किसी भी तरह का विवादित मैसेज ग्रुप में न डाला जाए। फेसबुक में भी लोगोें ने अपने-अपने स्तर पर शांति और सदभाव बनाए रखने के मैसेज भेजे।

समाज प्रमुखों के साथ बैठक

शनिवार को कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस के अफसर अलग अलग समाज के प्रमुखों से चर्चा करते रहे। इस बैठक के दौरान कोर्ट के फैसले के बाद शांति व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बातें की गईं। रविवार को मुस्लिम समाज के जुलूस काे लेकर भी चर्चा की गई। सुबह जुलूस निकाला जाएगा।

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