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  • मां बाप की मौत के बाद बच्चे का जन्म, Child Born After Parents Died In China

मां-बाप के जन्म के चार बाद हुआ बच्चे का जन्म, कहानी फिल्मी नहीं एकदम असली है

3 वर्ष पहले
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स्पेशल डेस्क. ऐसा कैसे हो सकता है कि मां-बाप के मरने के चार साल बाद भी बच्चे का जन्म हो गया। पहली बार में तो ये खबर झूठी लगती है। लेकिन चीन की ये कहानी एकदम सच्ची है। दरअसल, बच्चे के मां-बाप 2013 में एक रोड एक्सीडेंट में मारे गए थे। लेकिन उन्होंने इससे पहले ही अपने भ्रूण सुरक्षित रखवा लिए थे। वो चाहते थे कि उनका बच्चा आईवीएफ तकनीक से इस दुनिया में आए। कपल की मौत के चार साल बाद बच्चे के जन्म लेने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। कपल के मौत के बाद आईं ये दिक्कतें...

 

- कपल की मौत के बाद उनके भ्रूण के इस्तेमाल को लेकर उनकी फैमिली ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी।
- उनके भ्रूण को चीन के नानजिंग हॉस्पिटल में करीब माइनस 196 डिग्री टेम्प्रेचर पर रखा था। 
- कोर्ट ने कपल की मौत के बाद उनके भ्रूण पर अधिकार बच्चे के दादा-दादी और नाना-नानी को दे दिया।
- फैमिली को भ्रूण तो मिल गया, लेकिन उसके बाद भी दिक्कतें कम नहीं हुई। 

 

हॉस्पिटल ने लगाई शर्त
- जिस हॉस्पिटल ने कपल का भ्रूण संभाल रखा था, उसने शर्त लगाई कि दूसरा अस्पताल उसे संभाल कर रखेगा।
- लेकिन मामला कानूनी होते देख कोई भी हॉस्पिटल उस भ्रूण को लेने को तैयार नहीं था।  
- दरअसल, चीन में सरोगेसी पर पाबंदी है। इसका सिर्फ एक ही ऑप्शन था कि सरोगेशन के लिए चीन के बाहर कोख ढूंढी जाए।

 

चीन से अफ्रीका तक गया भ्रूण
- काफी खोजबीन के बाद फैमिली को सरोगेसी एजेंसी की मदद से अफ्रीकी देश लाओस में एक महिला मिल गई।
- लाओस में सरोगेसी को वैध माना जाता है। लेकिन दिक्कत अभी भी कायम थी।
- वही कानूनी पचड़े में पड़ने के डर से कोई भी एयरलाइन भ्रूण वाली लिक्विड नाइट्रोजन की बोतल लाओस ले जाने को तैयार नहीं था।
- लिहाजा, एक कार के जरिए चीन से भ्रूण की बोतल को अफ्रीकी देश तक ले जाया गया। 
- वहां एक महिला की कोख में भ्रूण को प्लांट किया गया और दिसंबर 2017 बच्चे का जन्म हुआ।
 
फिर नागरिकता मिलने में आईं मुश्किलें
- बच्चे का नाम तियांतियां रखा गया है, लेकिन उसके सामने नागरिकता की भी प्रॉब्लम आ गई थी।
- चूंकि सरोगेट मदर टूरिस्ट वीजा लेकर चीन आई और उसे जन्म दिया। लिहाजा चीन उसे लाओस का नागरिक मान रहा था।
- लेकिन बच्चे को चीनी नागरिक साबित करने के लिए दादा-नाना को अपना डीएनए टेस्ट देना पड़ा था।