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डाउनलोड करेंऔबेदुल्लागंज. राष्ट्रीय राजमार्ग 12 स्थित तामोट का शासकीय प्राइमरी स्कूल आज भी वर्षों पुरानी जर्जर इमारत में संचालित किया जा रहा है। यहां न तो बच्चों को बैठने के लिए समुचित व्यवस्थाएं हैं और न ही बुनियादी सुविधाओं के कोई इंतजाम। पानी की टंकी भी जर्जर है। यहां बालक-बालिकाएं रोज दहशत के बीच स्कूल की जर्जर इमारत के नीचे बैठने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी इस पीढ़ा को समझने वाला कोई नहीं है। स्कूल प्रबंधन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा एवं क्षेत्रीय सांसद व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी इस समस्या से अवगत करा दिया गया है, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला।
नए शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद भी न तो यहां के अध्यापक गंभीरता दिखा रहे हैं और न ही अभिभावक। तामोट में हाई स्कूल भवन सन् 1954 में बना था। इसके कुछ समय बाद प्राइमरी कक्षा यहां लगना शुरू हो गई, फिर मिडिल और वर्ष 2002 में हाई स्कूल की कक्षाएं भी यही लगने लगी। तब से सारी कक्षाएं प्राथमिक शाला भवन में ही संचालित हो रही हैं। जर्जर शाला भवन के कुल पांच कमरे में दसवीं तक की कक्षाएं लग रही है। इसकी वजह से पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
छात्रों के साथ शिक्षक भी परेशान
इस समस्या को लेकर स्कूल प्रबंधन और ग्राम पंचायत की ओर से प्रशासन को कई बार प्रस्ताव बनाकर भी दिए गए, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा एवं क्षेत्रीय सांसद व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को भी इस समस्या से अवगत करा दिया गया है, लेकिन स्कूल की इस जर्जर इमारत को लेकर कोई निर्णय नहीं हो सका। बारिश के दौरान स्कूल भवन में पानी भरा जाता है। कई बार स्कूल भी बंद रखना पड़ता है। इस वजह से शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नए शाला भवन निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा
औबेदुल्लागंज बीआरसी शिव नारायण चौहान ने बताया कि हाईस्कूल में कम बच्चे होने के कारण यहां हाईस्कूल की बिल्डिंग के लिए स्वीकृित नहीं मिल रही है। इस कारण प्राइमरी एवं मिडिल के भवन में ही हाईस्कूल लग रहा है। जगह की कमी हाेने के कारण यहां परेशानी हो रही है। इस समस्या को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से नए शाला भवन के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर दिया है, उम्मीद है जल्द ही हाईस्कूल के लिए नया भवन मिल जाएगा।
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