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चीन की विकास दर तीन साल में सबसे कम

9 वर्ष पहले
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विश्व की दूसरे सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के नेताओं ने उम्मीदें निवेश पर लगाई हैं

चीन की अर्थव्यवस्था पिछले तीन साल में सबसे धीमी गति से बढ़ रही है क्योंकि उसके लिए अहम अमरीका और यूरोप के बाजार में उसके उत्पादों की मांग गिर रही है और निवेश में भी कमी आई है.

इस साल की दूसरी तिमाही में चीन का सकल घरेलू उत्पाद 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि इससे पिछली तिमाही में वह 8.1 प्रतिशत था.

मार्च में चीन ने वर्ष 2012 के लिए अपने विकास लक्ष्य को घटाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया था.

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में आर्थिक उत्पाद की दृष्टि से देखा जाए तो 20 प्रतिशत योगदान चीन का है और यदि चीन की अर्थव्यस्था में सुस्ती आती है तो उसका असर पूरी दुनिया पर होगा.

बीबीसी के बीजिंग संवाददाता मार्टिन पेशेंस के मुताबिक, "विश्व के सबसे बड़े निर्यातक चीन पर यूरोप और अन्य जगह पर छाई आर्थिक सुस्ती का खासा असर पड़ा है. ये आंकड़े वित्तीय संकट के शुरु होने के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था के सबसे बुरे हैं. चीन के नेताओं को निवेश से उम्मीद है. दो बार ब्याज दरों को घटाया जा चुका है."

मार्टिन पेशेंस कहते हैं, "एक दशक में एक बार होने वाला नेतृत्व परिवर्तन इस साल शुरु होगा और चीनी राजनीति में ये नाजुक समय है. नेतृत्व को इस बात की भी चिंता रहेगी कि यदि आर्थिक विकास में और सुस्ती आती है तो उससे सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है."

'हल आसान नहीं होगा'

एशिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएँ भी व्यापार सहयोगी के तौर पर चीन पर निर्भर करने लगी हैं.

सिंगापुर में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के ताई हुई का कहना था, "चीन इस साल एशियाई बाजार में आई सुस्ती का बड़ा कारण बना है. यदि इस साल के आखिरी छह महीनों में चीन की विकास दर नहीं बढ़ती तो इस पूरे क्षेत्र में उत्पादकों के लिए ये काफी कठिन समय हो सकता है."

चीन के केंद्रीय बैंक ने उस राशि को घटा दिया है जो बैंकों को बचाकर रखनी अनिवार्य है ताकि वह उसे कर्ज लेने के इच्छुक लोगों को दे सकें.

इसी के साथ एक ही महीने में चीन के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को दो बार घटाया है ताकि आर्थिक विकास में नई जान फूंकी जा सके.

लेकिन पर्यवेक्षकों का मानना है कि केवल अर्थव्यवस्था में पूँजी डालने और सरकारी खर्च बढ़ाने से चीन की विकास मुश्किलें हल नहीं होने वाली हैं.

वर्ष 2008-09 में वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में चीन ने मूलभूत ढांचे और निर्माण क्षेत्र में निवेश किया था जिससे प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ी थीं, उपभोक्ता के लिए कीमतें बढ़ी थीं और महँगाई भी खासी बढ़ी थी.

यही नहीं अमरीका और यूरोप के बाजारों में अमरीकी वस्तुओं की मांग घटने के कारण धीमे विकास का ये दौर आया है.

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