पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक बैन करने में नगर परिषद फेल

Mohali Bhaskar News - शिवरात्रि पर जीरकपुर शहर में लगे लंगरों में जमकर सिंगल यूज प्लास्टिक की प्लेटस व अन्य सामान इस्तेमाल हुआ। कई टन...

Feb 22, 2020, 07:31 AM IST
Zirakpur News - city council fails to ban polythene and single use plastic

शिवरात्रि पर जीरकपुर शहर में लगे लंगरों में जमकर सिंगल यूज प्लास्टिक की प्लेटस व अन्य सामान इस्तेमाल हुआ। कई टन सिंगल यूज प्लास्टिक की प्लेटस सड़कों पर पड़ी रही। दुकानों पर भी जमकर कैरीबैग का इस्तेमाल हो रहा है। यहां की नगर परिषद सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाने में फेल है। अधिकारियों के गैर जिम्मेदारना व्यवहार से शहर में हर महीने कचरा बढ़ रहा है। पहले रोजाना 45 से 50 टन कचरा शहर में पैदा हो रहा था। अब इसमें बढ़ोतरी हो गई है। जिसमें प्लास्टिक के लिफाफों की भरमार है। नगर परिषद सफाई के मामले में बेहद लापरवाह है। शहर में न तो लिफाफे बेचने वालों और न ही दुकानों में इनका इस्तेमाल करने वालों पर कोई कार्रवाई हो रही है। शहर में पॉलीथीन पर पाबंदी लगाने पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। न ही दुकानदारों के चालान काटे जा रहे है।

प्लास्टिक पर बैन नहीं, गीला सूखा कचरा भी नहीं हो रहा अलग: गीला और सूखा कचरा अलग रखने के लिए रेजिडेंट्स डस्टबिन का काम भी अधूरा रह गया है। गीला और सुखा कचरा अलग-अलग रखने के लिए डस्टबिन बांटने का काम भी लटक गया है। जीरकपुर शहर में रोज निकलने वाला कई टन कचरा शहर को प्रदूषित कर रहा है। स्वच्छता की श्रेणी में इस शहर को लाना यहां की नगर परिषद के लिए बड़ी चुनौती है। इस कंपीटिशन में भाग लेना तो दूर की बात, अपने शहर के रेजिडेंट्स के स्वास्थ्य को भी कचरे के प्रदूषण से दूर रखना मुश्किल हो रहा है। 45 टन से ज्यादा कचरा कहां ठिकाने लगाया जाए, इसको लेकर नगर परिषद ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया था। इसमें शहर को चार जोन में बांटकर कचरे को इकट्ठा करना, उसका प्रोसेसिंग के तहत निपटान करना और कचरे से प्लास्टिक अलग करने समेत पूरी डिटेल के साथ यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया पर अभी तक इसको तैयार करने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

एमसी ऑफिस से लेकर लोकल बाडीज विभाग तक काम ठप: शहर के लोगों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि यहां प्लास्टिक पर पाबंदी नहीं है। इसलिए जो लोग इसका विरोध करते है। एमसी को शिकायत करते है तब भी सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई नहीं होती है। डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन करने वाले सफाई कर्मी भी यहां काम करने से पीछे हट रहे हे। रोजाना कचरा बढ़ रहा है। पर इसकी प्रोसेसिंग के लिए काेई प्रबंध नहीं है। ना ही कचरे को जमा करने के लिए कहीं जगह बची है।

लालडू में गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट हुआ फेल: जीरकपुर एमसी ने शहर के कचरे का निपटान करने के लिए दो साल पहले मार्स नाम की कंपनी का लालडू में गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट से समझौता किया गया था। यहां कचरे से बिजली तैयार की जानी थी। कंपोस्ट बनाने का भी काम होना है लेकिन इस कंपनी ने जीरकपुर का कचरा कुछ ही दिन उठाया। दावा था कि मार्स कंपनी के प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता 600 टन कचरे को प्रोसेस करने की थी लेकिन दो साल से यह प्रोजेक्ट लटका है।

एमसी के अधिकारियों का गैर जिम्मेदारान रवैया बना कारण

सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी है। जो इसकाे बेचेगा इस्तेमाल करेगा उस पर कार्रवाई होगी। - मनवीर गिल, ईओ एमसी

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