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डाउनलोड करेंइंदौर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रहे घमासान के बीच मंगलवार को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मप्र में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। खरगोन जिले के भीकनगांव में असंगठित श्रमिक सम्मेलन के बाद मीडिया से चर्चा में शिवराज ने कहा कि नंदू भैया ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटने की इच्छा जताई है, जिस पर हम विचार करेंगे। इन सबके बीच सीएम शिवराज ने मंगलवार रात सीएम हाउस में एक बैठक बुलाई है, जिसमें केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल शिरकत करेंगे। बैठक में सभी मंत्रियों को उपस्थित रहने को कहा गया है।
- शिवराज सिंह ने मीडिया से चर्चा में कहा कि नंदकुमार सिंह चौहान ने सोमवार रात को उन्हें फोन कर पद से हटने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वे संसदीय क्षेत्र में काम करना चाहते हैं, इसलिए पर से हटना चाहते हैं। सीमए ने कहा कि उनके इस आग्रह पर विचार किया जाएगा।
- नंदकुमार सिंह चौहान अपने पद से क्यों हटना चाहते हैं, इस सवाल पर सीएम ने कहा कि नंदू भैय्या का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष रहने के नाते वे अपने क्षेत्र को समय नहीं दे पा रहे हैंं। इस पर मैंने उनसे आग्रह किया है कि वे अपने पद पर बने रहें। अब नंदू भैय्या मेरा आग्रह स्वीकारते हैं या नहीं, पता चलेगा।
इन नामों पर हो सकता है विचार
मंगलवार रात सीम हाउस में होने वाली बैठक में अगले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मंथन होगा। सूत्रों की माने तो मंत्री नरोत्तम मिश्रा, लाल सिंह आर्य, भूपेन्द्र सिंह के नाम चर्चा में है। इनमें से जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे चल रहा है।
कौन हैं नरोत्तम मिश्रा
- दतिया विधायक और मप्र सरकार में जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा का जन्म 15 अप्रैल 1960 को ग्वालियर में हुआ था। एमए, पीएचडी मिश्रा की साहित्य, कला में विशेष रुचि है।
- मिश्रा जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के छात्रसंघ के सचिव एवं मप्र भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रान्तीय कार्यकारिणी के सदस्य रह चुके हैं। इसके बाद वे भाजपा की प्रान्तीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। मिश्रा ने 1990 में वे पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वे 1998, 2003, 2008 और 2013 में दतिया से विधानसभा पहुंचे।
-वे बाबूलाल गौर सरकार में राज्य मंत्री जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में मंत्री के रूप में शामिल किया गया। इसके बाद वे कैबिनेट मंत्री बने। वर्तमान में वे मप्र सरकार में जनसंपर्क एवं संसदिय कार्यमंत्री है।
इसलिए बन सकते हैं प्रदेश अध्यक्ष
बता दें कि आरक्षण हटाने की मांग को लेकर लगातार सवर्ण वर्ग का बड़ा धड़ा शिवराज सरकार से नाराज चल रहा है। ऐसे में मिश्रा को अध्यक्ष बनाकर उच्च वर्ग को अपनी ओर खींचने का प्रयास भाजपा कर सकती है। नरोत्तम मिश्रा सीएम शिवराज के काफी करीबी माने जाते हैं वहीं उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें मिली जिम्मेदारी को उन्होंने बखुबी निभाया और वहां योगी सरकार बनाने तक में अहम भूमिका निभाई। अपनी काबीलियत के बूते मिश्रा अब पीएम माेदी और अध्यक्ष अमित शाह के चहेते हो गए हैं।
बयानबाजी बन सकती है अध्यक्ष पद खोने का कारण
आगामी विधानसभा चुनावों में लगभग 6 माह का समय शेष बचा है। भाजपा के आंतरिक सर्वे में करीब 80 विधायक का कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया है। ऐसे में शिवराज सरकार की प्रदेश में तीसरी पारी आसान नहीं होगी। प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की एक वजह उनकी बयानबाजी भी हो सकती है। नंदकुमार चौहान ने कई बार मंच से विवादित बयान दिए हैं जिसके कारण पार्टी को बैकफुट पर जाना पड़ा।
ये हैं उनके विवादित बयान
- हाल ही में बुरहानपुर में एक पुलिस स्टेशन का शुभारंभ करने पहुंचे नंदू भैया ने कहा था कि एक अपराधी भी अपराध करने के बाद अपने जनप्रतिनिधि से मदद की उम्मीद रखता है और ऐसे में हमें पुलिस को फोन करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
- मोदी की तारीफ में नंदकुमार सिंह चाैहान ने सागर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि वे असाधारण व्यक्ति हैं, मोदी के पीएम बनने से पहले देश भिखमंगा था।
- व्यापमं मामले में उन्होंने कहा था कि इस मामले में ना मुझे दुख है और ना अफसोस। सीएम शिवराज गंगा जल की तरह पवित्र है।
- वेतन की मांग को लेकर चौहान ने टीचरों को लेकर भी एक विवादित बयान दिया था। 500 रुपए में चने फुटाने खाकर काम चलाने वाले को अब पंद्रह से बीस हजार रुपए दिए जा रहे हैं इसके बावजूद उनका पेट नहीं भर रहा।
-बैतूल में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा था कि लोकायुक्त संगठन सीएम शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर काम करता है।
-नरसिंहपुर के करेली में एक चुनावी सभा में भाजपा को जिताने के लिए उन्होंने एक विवादित बयान दिया था जिसमें कहा था कि भाजपा के प्रत्याशी को जिताइए अगर नहीं जिताइएगा तो विकास के लिए धन नहीं आ पाएगा।
- प्रदेश में किसानों की मौत पर भी चौहान ने एक विवादित बयान दिया था। उन्होंने किसानों की मौत को कर्ज के बजाय फैशन करार दिया था। उन्होंने कहा था कि किसी की भी मौत हो जाती है तो उसे किसान की मौत बताना फैशन हो गया है।
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