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डाउनलोड करेंजयपुर. मीसा बंदियों की तरह आपातकाल का विरोध करने पर धारा 151 व 107, 103 में जेल भेजे गए लोगों को सरकार ने मीसा बंदियों की तर्ज पर लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। लेकिन यह दर्जा सिर्फ उन्हीं को मिलेगा जिनके कोर्ट ऑर्डर में यह लिखा होगा कि उन्हें आपातकाल का विरोध करने के लिए ही धारा 151, 107 व 103 में जेल भेजा है।
- लंबे समय से सरकार को इसके ज्ञापन मिल रहे थे कि मेंटिनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) की धारा के अलावा भी आपातकाल का विरोध करने वाले लोगों को बड़ी संख्या में शांतिभंग की धारा लगाकर जेल भेजा गया था। इसलिए उन्हें मीसा बंदियों की तर्ज पर प्रदेश में लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही थी।
- इसके लिए सरकार ने गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। कमेटी ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप दी थी। फिर एडमिनिस्ट्रेटिव अप्रूवल के लिए फाइल मुख्यमंत्री को भेजी गई। मुख्यमंत्री ने इसे मंजूरी दी दी है।
- अब इसे वित्तीय स्वीकृति के लिए वित्त विभाग और विधिक परीक्षण के लिए विधि विभाग को भेजा जाएगा। प्रदेश में अभी लोकतंत्र सेनानियों की संख्या 1050 है, जिन्हें 12 हजार रु. पेंशन और 1200 रु. प्रतिमाह मेडिकल भत्ता दिया जाता है।
- गौरतलब है कि ऐसे लोगों को पहले मीसा बंदी कहा जाता था, सरकार ने पिछले दिनों इनका नाम बदल कर लोकतंत्र सेनानी कर दिया था।
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