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करन दत्त का कॉलम : बच्चों के भविष्य के लिए चिल्ड्रेंस फंड अपनाएं

आर्थिक लक्ष्यों में बच्चों की पढ़ाई और देखभाल सबसे महत्वपूर्ण

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 17, 2018, 11:42 AM IST

करन दत्त का कॉलम : बच्चों के भविष्य के लिए चिल्ड्रेंस फंड अपनाएं
भारत में बचत की परंपरा रही है। लेकिन उचित फाइनेंशियल प्लानिंग के अभाव में यह बचत वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाफी होता है। आर्थिक लक्ष्यों में सबसे महत्वपूर्ण होता है बच्चों की पढ़ाई एवं देखभाल। लेकिन अक्सर लोग बच्चों के नाम पर की जाने वाली बचत को पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। टैक्स चुकाने के बाद इस निवेश पर रिटर्न बहुत कम मिलता है। कई बार तो यह महंगाई की तुलना में भी कम रहता है। लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी लिंक्ड इन्वेस्टमेंट अच्छे हैं। महंगाई को एडजस्ट करने के बाद इनमें रिटर्न ज्यादा मिलता है। बच्चों के लिए बचत उनके जन्म लेने के साथ ही शुरू कर दिया जाना चाहिए। समय के साथ बचत की रकम बढ़ानी चाहिए। कभी-कभार बचत का एडहॉक तरीका अपनाने के बजाय नियमित निवेश का अनुशासित तरीका अपनाना चाहिए। इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए जरूरी खर्च की रकम जल्दी जमा हो जाती है।
बच्चों की पढ़ाई का खर्च दिनों दिन बढ़ता जा रहा है और माता-पिता के लिए उसे पूरा करना मुश्किल होता है। एक ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार भारतीय माता-पिता एक बच्चे की पढ़ाई पर औसतन 12.25 लाख रुपए खर्च करते हैं। यह खर्च प्राइमरी स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक का है। इसमें महंगाई दर को भी जोड़िए तो आपको एहसास हो जाएगा कि जल्दी निवेश शुरू करने का महत्व कितना है। चाइल्ड प्लान या फंड आपकी इस आर्थिक जरूरत हो पूरा करने के लिए बेहतर हो सकते हैं। चिल्ड्रन फंड ओपन एंडेड और लक्ष्य आधारित होते हैं। बच्चों के खर्च को ध्यान में रखकर इन्हें तैयार किया जाता है। इनका लॉक इन पीरियड 5 साल या बच्चे के वयस्क होने तक होता है। चिल्ड्रेंस फंड के फायदे यह हैं-
ज्यादा रिटर्न की संभावना : लॉकिंग पीरियड होने से फंड मैनेजर को लॉन्ग टर्म में ज्यादा रिटर्न देने वाले स्टॉक्स चुनने का मौका मिलता है। स्टॉक में ज्यादा रिटर्न के लिए धैर्य की जरूरत होती है, क्योंकि कंपनियों को बिजनेस और प्रॉफिट बढ़ाने के लिए समय चाहिए। यही वजह है कि लॉन्ग टर्म में इक्विटी बेहतर रिटर्न देते हैं। बच्चों की पढ़ाई जैसे लांग टर्म के आर्थिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे निवेश के विकल्प बेहतर हैं।
कंपाउंडिंग का लाभ: जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, कंपाउंडिंग का लाभ उतना ज्यादा मिलेगा। निवेश की अवधि ज्यादा होने से रिटर्न कई गुना बढ़ जाता है। अगर हर माह 10,000 रुपए 12% सालाना ब्याज वाले इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं तो 10 साल बाद 23.23 लाख रु. मिलेंगे। लेकिन यही निवेश 20 साल के लिए करते हैं तो आपका पोर्टफोलियो एक करोड़ रु. का हो जाएगा।
समय से पहले पैसे ना निकालें : लक्ष्य के अलावा किसी दूसरे मकसद के लिए पैसा खर्च नहीं करना चाहिए। हो सकता है कुछ महीने के लिए आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि नियमित निवेश जारी रख सकें। तब भी यह सुनिश्चित करें कि पुराना निवेश बना रहे। लॉक इन पीरियड के कारण जब-तब निवेश का पैसा निकालने से बचेंगे। बच्चे को बेहतर जीवन देना हर मां-बाप का सपना होता है। उचित फाइनेंशियल प्लानिंग से आप इस सपने को कम आमदनी होने पर भी पूरा कर सकते हैं।
-ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।
करन दत्त, चीफ बिजनेस ऑफिसर, एक्सिस म्यूचुअल फंड

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