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वकार नकवी का कॉलम : नियमित रिटर्न के लिए फिक्स्ड इनकम स्कीम में कर सकते हैं निवेश

फिक्स्ड इनकम स्कीम हर अवधि के निवेशकों के लिए होती हैं

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jul 19, 2018, 10:26 AM IST

वकार नकवी का कॉलम : नियमित रिटर्न के लिए फिक्स्ड इनकम स्कीम में कर सकते हैं निवेश
म्यूचुअल फंड की स्कीम्स निवेशकों को मुख्य रूप से दो श्रेणी में निवेश के मौके उपलब्ध कराती हैं। इक्विटी ओरिएंटेड और फिक्स्ड इनकम स्कीम। इक्विटी स्कीम में फंड का ज्यादा पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है। फिक्स्ड इनकम स्कीम में अधिकांश पैसा डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश होता है। इनके अलावा एक्सचेंज ट्रेडेड गोल्ड फंड यानी गोल्ड ईटीएफ और हाइब्रिड स्कीम भी होती हैं। हाइब्रिड में इक्विटी के साथ डेट या गोल्ड में निवेश का विकल्प होता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड 2013 से निवेशकों के पसंदीदा हैं। इन्होंने निवेशकों को निराश भी नहीं किया है। लेकिन इस दौरान फिक्स्ड इनकम वाले म्यूचुअल फंड खुदरा निवेशकों के रडार से बाहर रहे। फिक्स्ड इनकम स्कीम निवेश के लिए बेहतर विकल्प हैं या नहीं, यह समझने के लिए जरूरी है कि फिक्स्ड इनकम स्कीम के सभी विकल्पों, इसके जोखिम और इनकी परफार्मेंस को प्रभावित करने वाले आर्थिक इंडिकेटर्स पर विचार किया जाए।
2 दिन से 15 साल तक के लिए निवेश: फिक्स्ड इनकम स्कीम शॉर्ट, मीडियम और लांग टर्म तीनों तरह के निवेशकों के लिए होती हैं। शॉर्ट टर्म फंड को लिक्विड फंड भी कहते हैं। इसमें 2 दिन के लिए भी पैसा लगा सकते हैं। मीडियम टर्म 6 महीने से 3 साल तक रहता है। लांग टर्म 5 से 15 साल हो सकता है। इनके अलावा म्यूचुअल फंड फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान भी ऑफर करते हैं। इन स्कीमों की अवधि पहले से तय होती है। निवेशक को इसमें पूरे समय के लिए बने रहना पड़ता है। फिक्स्ड इनकम स्कीम में छोटे जोखिम को छोड़ दें तो भी दो बड़े रिस्क होते हैं। ब्याज दर का जोखिम और क्रेडिट का जोखिम।
ब्याज दर का जोखिम : फिक्स्ड इनकम स्कीम और ब्याज दरें विपरीत दिशा में चलती हैं। अगर इकोनॉमी में ब्याज दरें बढ़ रही हैं तो फिक्स्ड इनकम स्कीम पर रिटर्न घटेगा। ब्याज दरें घटने पर इनमें रिटर्न बढ़ेगा। वैसे तो यह बात लांग टर्म वाली फिक्स्ड इनकम स्कीम्स पर लागू होती है, लेकिन कई बार शॉर्ट टर्म फिक्स्ड इनकम स्कीम भी ब्याज दर से प्रभावित होती हैं। लिक्विड फंड का रिटर्न ब्याज दर के साथ ही चलता है। इसलिए अगर ब्याज दरें बढ़ने की संभावना हो तो लिक्विड फंड में निवेश कर सकते हैं। इसी तरह फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान वाली स्कीम भी बढ़ती ब्याज दरों के समय ज्यादा रिटर्न देते हैं।
क्रेडिट रिस्क : इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड ने जिस कंपनी की सिक्योरिटी में पैसा लगाया है, यदि उसने डिफॉल्ट किया यानी समय पर पैसे नहीं लौटाए तो म्यूचुअल फंड के लिए अपने निवेशकों को पैसा लौटाने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि बड़े फंडों के पास इससे निपटने के विकल्प होते हैं। इसलिए जो निवेशक फिक्स्ड इनकम स्कीम में पैसा लगाना चाहते हैं उन्हें निवेश की अवधि और जोखिम को ध्यान में रखकर ही ऐसा करना चाहिए।
- ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

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