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डाउनलोड करेंरांची. स्थानीय एवं नियोजन नीति में संशोधन के लिए गठित भू-राजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी की अध्यक्षता वाली हाईलेवल कमेटी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री रघुवर दास को रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें गैर अनुसूचित 11 जिलों में भी 13 अनुसूचित जिलों की तरह ही थर्ड और फोर्थ ग्रेड पदों पर 10 साल तक उसी जिले के स्थानीय निवासी को नौकरी देने की अनुशंसा की गई है।
- उन्होंने कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में आरक्षण का लाभ सिर्फ उन्हें दिया जाए, जिनका नाम खतियान में दर्ज है। इन अनुशंसाओं पर राज्य सरकार द्वारा अंतिम फैसला लिए जाने तक 11 गैर अनुसूचित जिलों के जिलास्तरीय पदों सहित वैसी सभी नियुक्तियों पर रोक लगे, जो प्रारंभिक स्तर (विज्ञापन आदि) पर हैं या जिनकी परीक्षाएं अभी नहीं हुई हैं।
- मंगलवार को कई दौर की बैठक के बाद शाम 4:45 बजे अध्यक्ष अमर कुमार बाउरी और सदस्य राधाकृष्ण किशोर, अमित कुमार मंडल, सत्येंद्र कुमार तिवारी, राज सिन्हा व रामकुमार पाहन ने सीएम को रिपोर्ट सौंपी।
प्रमुख अनुशंसाएं
- इन 11 जिलों में थर्ड-फोर्थ ग्रेड पदों पर 10 साल तक उसी जिले के स्थानीय निवासी की नियुक्ति हो।
- यूपीएससी और बिहार-छत्तीसगढ़ आदि में लोकसेवा आयोग में पीटी में आरक्षण का प्रावधान है। जेपीएससी की परीक्षाओं में भी यही प्रावधान लागू हो।
- राज्य की सभी नियुक्तियों में स्थानीय निवासियों (महिलाओं सहित) के लिए अधिकतम उम्र सीमा 45 साल तय हो।
20 से 22 हजार नियुक्तियां प्रभावित होंगी
- हाईलेवल कमेटी की अनुशंसा लागू होने पर राज्य में 20 से 22 हजार नियुक्तियां प्रभावित होने की संभावना है। इनमें जिलास्तरीय लिपिक, पुलिस बल और विभिन्न विभागों के जिलास्तरीय कर्मचारी शामिल होंगे। हालांकि यह राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वह किन नियुक्तियों को स्थगित करने का निर्णय लेती है।
दारोगा नियुक्ति प्रक्रिया को भी त्रुटिपूर्ण बताया
- रिपोर्ट में कहा गया है कि दारोगा नियुक्ति के लिए आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में शारीरिक दक्षता के लिए निर्धारित मापदंड त्रुटिपूर्ण है। इन परीक्षाओं में भी शारीरिक दक्षता के लिए वही मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जो इन पदों पर सीधी नियुक्ति के लिए है। सीधी नियुक्ति में अगर एक घंटे में 10 किमी दौड़ जरूरी है तो सीमित परीक्षा में शामिल होने वाले 35 से 38 साल के पुलिसकर्मी नहीं दौड़ सकते। यह शर्त अव्यवहारिक है।
डेवलपमेंट इंडेक्स को बनाया अनुशंसा का आधार
- अमर कुमार बाउरी और राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि गैर अनुसूचित जिलों में स्थानीय के लिए नौकरी को आरक्षित करने के लिए डेवलपमेंट इंडेक्स को आधार बनाया गया है। भौगोलिक बनावट, जल संसाधन की कमी, वनोच्छादन का ह्रास और अनियंत्रित एवं त्वरित औद्योगिकीकरण के कारण सोशल इंडेक्स औसत से काफी कम है। इन जिलों की स्थिति 13 अनुसूचित जिलों से बेहतर नहीं है। नीति आयोग ने देश के जिन 115 जिलों को अति पिछड़े जिलों में शामिल किया है, उनमें झारखंड के 19 जिले हैं। इनमें आठ गैर अनुसूचित 11 जिलों में से ही हैं। इससे स्पष्ट है कि गैर अनुसूचित जिलों में विकास की स्थिति दयनीय है। संविधान के आर्टिकल 16 की उपधारा 4 में कहा गया है कि पिछड़ेपन के आधार पर नियोजन में आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है।
आगे क्या: सरकार ले सकती है लीगल ओपिनियन
- यह कब से लागू होगी, इस सवाल पर किशोर ने कहा कि यह सरकार का मामला है। सरकार लीगल ओपिनियन ले सकती है या कैबिनेट की स्वीकृति लेकर लागू कर सकती है। अब सरकार पर निर्भर है कि वह कब इसे लागू करे।
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