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डाउनलोड करेंबिलासपुर. करीब 10 सवालों की जांच के लिए हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ पीएससी को विषयवार एक्सपर्ट कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं। कमेटी विलोपित किए गए और आंसर बदले गए सवालों की जांच कर सही उत्तर तय करेगी। रिपोर्ट के आधार पर पीएससी को प्रारंभिक परीक्षा परिणाम फिर से जारी करने के भी निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने इसके लिए 15 दिनों का समय दिया है।
पीएससी-2017 की मुख्य परीक्षा 22 जून से होनी थी। पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के बाद जारी किए गए मॉडल आंसर के जवाबों पर आपत्ति दर्ज करवाई गई, लेकिन इसका निराकरण किए बगैर पीएससी ने नतीजे जारी कर दिए। वहीं, तीन सवाल विलोपित कर दिए गए हैं। इसी तरह संशोधित मॉडल आंसर में कुछ सवाल विलोपित किए गए, वहीं कुछ के जवाब बदल गए। इसी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं प्रस्तुत की गई है।
18 फरवरी को थी प्रारंभिक परीक्षा
छत्तीसगढ़ पीएससी ने पिछले साल 18 फरवरी को प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। 22 फरवरी को मॉडल आंसर जारी कर दावा-आपत्ति मंगाई गई। प्रारंभिक परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों ने आपत्ति दर्ज करवाई, लेकिन इसका निराकरण नहीं किया गया। इसी तरह पीएससी ने तीन अन्य सवालों को विलोपित कर दिया। इसके बाद 7 अप्रैल 2018 को संशोधित मॉडल आंसर जारी किए गए। आपत्ति का निराकरण किए बगैर नतीजे जारी करने पर विवेक गांगुली ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें कहा गया है कि पूर्व में जारी मॉडल आंसर सही होने के बावजूद संशोधित मॉडल आंसर में सवाल विलोपित किए गए हैं, या बदलाव किए गए हैं, यह गलत है।
जस्टिस पी सैम कोशी की बेंच ने दिए निर्देश
आपत्ति किए गए सवालों सहित तीन अन्य विलोपित सवालों के नंबर मिलने पर वे पीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास कर सकते थे। मंगलवार को जस्टिस पी सैम कोशी की बेंच ने पीएससी आपत्ति किए गए सवालों की जांच के लिए विषयवार एक्सपर्ट कमेटी का गठन करने के निर्देश दिए हैं। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर पीएससी को प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे फिर से जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी को प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी, ऐसा नहीं कर पाने की स्थिति में 22 जून से होने वाली मुख्य परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाई जाएगी।
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