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बेटे के शूटिंग के लिए पिता ने छोड़ी वकालत, खेलने के लिए CBSE ने दी स्पेशल परमिशन

3 वर्ष पहले
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करनाल। कॉमनवेल्थ गेम्स में शुक्रवार को 15 साल के शूटर अनीश ने 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में गोल्ड मेडल जीता। वे सबसे कम उम्र में गोल्ड जीतने वाले भारतीय एथलीट बन गए। जीत के बाद पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। हो भी क्यों ना, उन्होंने बेटे की शूटिंग के लिए अपने प्रोफेशन को छोड़ा है। जी हां, अनीश के पिता जगपाल ने बेटे की प्रैक्टिस के लिए पिछले 4 साल से वकालत छोड़ रखी है। करनाल के आसपास शूटिंग रेंज न होने की वजह से बेटे की प्रैक्टिस के लिए वकालत छोड़ वे अब दिल्ली में रह रहे हैं। 4 गेम से शुरूआत की, शूटिंग में रिजल्ट अच्छे आए तो बाकी छोड़े....

  
 

- अनीश मूल रूप से सोनीपत के कासंडी गांव के हैं। उनका जन्म गांव में ही हुआ था। लेकिन बाद में वे करनाल आकर रहने लगे। 
- अनीश करनाल के सेंट थेरेसा कान्वेंट स्कूल से 10वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। पिता जगपाल बताते हैं कि 10 साल की उम्र में अनीश ने करनाल के स्टेडियम में जाना शुरू कर दिया था।
- यहां उसने स्वीमिंग, फेसिंग, रनिंग और शूटिंग शुरू की। प्रैक्टिस करते-करते 2013 में अनीश साइप्रस में अंडर-12 वर्ल्ड चैंपियनशिप खेलने के लिए गया। यहां उसे कोई पदक नहीं मिला।
- इसके बाद 2015 में बीजिंग में एशियन चैँपियनशिप खेलने के लिए गया। यहां दूसरे गेम की बजाए शूटिंग में अच्छे परिणाम आए। 
- इसके बाद कोच ने दूसरे खेल छोड़कर खाली शूटिंग पर ध्यान देने के लिए कहा। यहीं से शूटिंग में अनीश के कैरियर की सही शुरूआत हुई। 
 

 

कॉमनवेल्थ शूटिंग विजेता ने दी 25 मीटर में शूटिंग की सलाह
- अनीश ने करनाल में शूटिंग शुरू की। यहां उसके पड़ोस में कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाले हरप्रीत सिंह उसके पड़ोस में रहते थे।
- उन्होंने अनीश को 25 मीटर में शूटिंग करने की सलाह दी लेकिन इसके लिए कोई भी शूटिंग रेंज नहीं थी। 
- अनीश के लिए उसके पिता ने करनाल छोड़कर दिल्ली बसने का निर्णय लिया।
- इसके बाद वे दिल्ली रहने लगे और अनीश ने फरीदाबाद में शूटिंग प्रैक्टिस शुरू की। 
 

 

भाई-बहन दोनों हैं शूटर
- अनीश की बड़ी बहन मुस्कान उससे एक साल बड़ी है। वह भी शूटर है।
- अनीश की बहन 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही है। 
 

 

जर्मनी से मंगाते हैं गोली
- अनीश के पिता जगपाल का कहना है कि शूटिंग काफी महंगा खेल है। एक गोली 20 रुपये में पड़ती है।
- उनके दोनों बच्चे शूटिंग कर रहे हैं, इस वजह से वे जर्मनी से गोलियां मंगाते हैं।
- वकालत छोड़ने के बाद भी वे पुश्तैनी जमीन से बच्चों का खर्च उठा रहे हैं। 

 

 

सीबीएसई ने दी एग्जाम के लिए स्पेशल परमिशन
- कॉमनवेल्थ गेम में जाने के लिए अनीश ने 10वीं कक्षा के तीन एग्जाम छोड़ दिए हैं। 
- सीबीएसई ने स्कूल के आग्रह करने पर उसे स्पेशल परमिशन दी है। अब गेम के बाद ही उसका हिंदी, एसएस और मैथ का एग्जाम होगा। 
 

 

दादा बोले-पोते ने नाम रोशन कर दिया
- अनीश के परिवार में उसकी मां पूनम रानी, दादा यशवंत सिंह, ताई प्रियंका, चाचा कुलवीर रहते हैं।
- अनीश के मेडल जीतने के बाद सभी खुश हैं। दादा यशवंत का कहना है कि उसके पोते ने नाम रोशन कर दिया। उन्हें बेहद खुशी है।

 

 

सभी फोटोः चमन लाल, करनाल

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