पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

जीने की राह- संचार के साधनों का संयम से इस्तेमाल हो

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

इंसान से इंसान की दूरी को कम करने के लिए दूरसंचार के साधनों का अाविष्कार किया गया। आज के दिन जब दुनिया विश्व दूरसंचार दिवस मनाती है तो संदेश देती है कनेक्टिीविटी बढ़ाने का। मोबाइल फोन ने तो क्रांति ही ला दी। आवाज के जरिये अनुपस्थित को उपस्थित कर दिया। सारी दुनिया जैसे मुट्‌ठी में आ गई। काम-काज की सुविधा हो गई लेकिन, समय बचाने के इस प्रयोग ने उल्टा समय का दुरुपयोग करना सिखा दिया। इस क्रांति के बाद अब आप एक-दूसरे से दूर तो नहीं हैं लेकिन, फिर भी एक-दूसरे से दूर हो गए। जब यह साधन नहीं था तो सब एक-दूजे के दिल में समाए थे। इस एक क्रांति ने आज एक छत के नीचे कई दुनिया बसा दीं। दुरुपयोग तो किसी का भी किया जाए, नुकसान ही होगा। इसलिए अब यह तय करना होगा कि जैसे भोजन की अति से बचने के लिए उपवास किए जाते हैं, विवाह समारोह में अच्छे वस्त्र पहने जाते हैं, घूमने जाने की तैयारी अलग से की जाती है ऐसे ही एक उदासी जो खास तौर पर मोबाइल लेकर आया है, इसे मिटाने के लिए इसके साथ कुछ सख्त नियम बनाने होंगे। एक प्रयोग कीजिए कि सप्ताह में एक दिन घर में प्रवेश करने के बाद मोबाइल फोन बंद कर देंगे। एक-आध दिन ऐसा भी किया जा सकता है कि बेडरूम में मोबाइल साथ नहीं रखेंगे। शायद यह बात अभी समझ में न आए, लेकिन यदि आप अपने इंसान होने को बचाना चाहते हैं तो इन यंत्रों के उपयोग के प्रति सावधान हो जाएं। वरना इस दूरसंचार का मतलब होगा केवल संचार रह गया, दूरियां अलग ढंग से और बढ़ती चली गईं।    

 

 

(जीने की राह कॉलम पं. विजयशंकर मेहता जी की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए टाइप करें JKR और भेजें 9200001164 पर)

खबरें और भी हैं...