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7 साल में सीपीए ने लगाए 32 हजार पौधे, अब भेल ने रखी शर्त- जरूरत पड़ी तो पेड़ काट खाली कर देनी होगी जमीन

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   बीएचईएल में हर साल अप्रैल में राजधानी परियोजना प्रशासन (सीपीए) द्वारा पौधरोपण किया जाता है। लेकिन आधा मई बीत  जाने के बाद भी इस कार्य की शुरुअात नहीं हो पाई है।  इसकी वजह, भेल द्वारा लगाई गई शर्तें हैं। भेल की ओर से जारी की गई एनओसी में शर्त रखी गई है कि सीपीए हमारे क्षेत्र प्लांटेशन कर सकता है, लेकिन जब भी भेल को उक्त जमीन की जरूरत होगी तो सीपीए को पेड़ काटकर जमीन खाली करके देनी होगी।

 

यही नहीं, पेड़ों की कटाई आदि के लिए अनुमति और एनओसी भी सीपीए को ही लेनी होगी। पेड़ों की कटाई और क्षतिपूर्ति प्लांटेशन करने की जिम्मेदारी भी सीपीए पर ही होगी। ऐसे में सीपीए ने हाथ खड़े कर दिए हैं। सीपीए ने 7 साल में 32 हजार पौधे भेल क्षेत्र में लगाए हैं। इस संबंध में जब भेल के ईडी डीके ठाकुर और एजीएम अनंत टोप्पो से बात की गई तो वे जानकारी देने से बचते रहे।

 

5 साल सुरक्षा करता है सीपीए
राजधानी परियोजना प्रशासन जहां भी प्लांटेशन करता है उन पौधों की तीन साल तक सिंचाई की जिम्मेदारी लेता है। यही नहीं पांच साल तक पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सीपीए की होती है। सीपीए 2011 से भेल में प्लांटेशन कर रहा है।

 

एक पेड़ काटने के एवज में लगाने होते हैं चार पौधे
नियमानुसार किसी भी पेड़ काे काटने पर जिसके तने की गोलाई 30 सेमी से अधिक हो उसके लिए दो पौधे लगाने और तने की मोटाई 30 सेमी से अधिक होने पर एक पेड़ काटने के एवज में चार पौधे लगाने होते हैं। एक पौधा लगाने और पांच साल तक उसकी देखभाल करने के एवज में सीपीए फॉरेस्ट 1450 रुपए जमा करता है। तब 30 सेमी गाेलाई वाले पेड़ को काटने के लिए 2900 रुपए जमा करने होते हैं। भेल भविष्य में होने वाले निर्माण आदि के लिए पेड़ काटने पर इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी सीपीए पर थोप रहा है।

 

 

कहां कितने पौधे लगाए

- 16 हजार पौधे जंबूरी मैदान।

- 5140 पौधे एम्स नगर वन।

- 2900 पौधे बरखेड़ा में। 

- 2000 पौधे पिपलानी में। 

- 2000 पौधे कस्तूरबा अस्पताल के पीछे। 

- 1100 पेड़ डीएवी स्कूल के पास।

- 1255 पौधे जीवीएन स्कूल के पास।

- 1400 पौधे अय्यप्पा मंदिर के आसपास के इलाकों में।

 

ऐसे में प्लांटेशन संभव नहीं
सीपीए फॉरेस्ट सीसीएफ सुदीप सिंह ने बताया कि भेल ने पौधरोपण के लिए शर्त रखी है कि जब भी उसे जमीन की जरूरत होगी पेड़ काटकर जमीन खाली करके देनी होगी। इस शर्त पर  प्लांटशेन कर पाना संभव ही नहीं है।
 

भेल पीआरओ विनोदानंद झा ने बताया कि भेल की जमीन पर किसी भी तरह के उपयोग की अनुमति हम लोकल लेबल पर नहीं देते हैं। पिछले सालों में अनुमति कैसे हुई, मैं इस संबंध में कुछ नहीं कह सकता हूं।

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