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कर्नाटक के बाद छत्तीसगढ़ में भी गठबंधन की संभावना तलाश रहीं कांग्रेस-बसपा

3 वर्ष पहले
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रायपुर. कर्नाटक में गठबंधन के जरिए कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में भी गठबंधन की संभावनाओं पर विचार तेज हो गया है। कांग्रेस और बसपा दोनों ही पार्टियों में  यह मंथन चल रहा है।  जानकारों के मुताबिक दोनों में गठबंधन हुआ तो दर्जनभर ऐसी सीटोें पर कांग्रेस को बढ़त मिल सकती है जिनमें वह पिछले चुनाव में हारी थी। इन सीटों पर बसपा को  जीत-हार के फैसले बदलने लायक वोट मिले हैं।

 

- पिछले दिनों जांजगीर चांपा इलाके में बसपा के कार्यकर्ताओं व मतदाताओं से समर्थन मांग कर पीसीसी चीफ भूपेश बघेल पहले ही इस ओर संकेत दे चुके हैं। बिलासपुर में कोटमी की सभा में राहुल के मंच पर गोंडवाना पार्टी के हीरा सिंह मरकाम की मौजूदगी भी गठबंधन की ओर संकेत कर रही है। शनिवार को दिल्ली में मीडिया से चर्चा के दौरान भी राहुल ने 2019 के चुनाव में गठबंधन करने की बात की थी। इसके बाद नए सिरे से छत्तीसगढ़ में समीकरण पर चर्चा शुरू हो गई है।

 

गठबंधन के नजरिए से यदि 2013 के विधानसभा चुनावों में मिले मतों को देखा जाए तो प्रदेश की उन 11 विधानसभा सीटों पर जहां कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, वहां कांग्रेस को बढ़त मिलने की गुंजाइश है। भास्कर ने भाजपा, कांग्रेस और बसपा को मिले मतों के अाधार पर भविष्य की राजनीति की पड़ताल करने की कोशिश की। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को जैजैपुर सीट से जीत मिली थी। यहां पर कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी।

 

इसके अलावा प्रदेश की 9 सीटों पर बसपा को 8 प्रतिशत से अधिक मत मिले हैं। एससी सीटों के अलावा सामान्य सीटों पर भी यह समीकरण को प्रभावित करने की स्थिति में है। बसपा को 2013 के विधानसभा चुनाव में  सारंगढ़ में 12 प्रतिशत, तखतपुर 20 प्रतिशत, जांजगीर चांपा 20 प्रतिशत, चंद्रपुर 29 प्रतिशत, पामगढ़ 29 प्रतिशत, बिलाईगढ़ 20 प्रतिशत, कसडोल 15 प्रतिशत, सक्ती में कुल वैध मतों का 10 प्रतिशत मिला था। 


बसपा के प्रभाव वाले अधिकांश विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के बीच हार-जीत का अंतर एक प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक है। कुछ स्थानाें बैकुंठपुर, मुंगेली, तखतपुर और कवर्धा में कांग्रेस को लगभग 1 फीसदी मतों से हार का सामना करना पड़ा था। एेसे में कांग्रेस-बसपा गठबंधन प्रदेश में नई संभावनाओं को दिशा देने में सहायक हो सकता है। 

 

 

बसपा भी गठबंधन के लिए तैयार 
- बसपा के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश बाचपेयी ने भी गठबंधन पर अपनी सहमति जताई है। हालांकि, उन्होंने सीटों के तालमेल के लिए दोनों पार्टियों को साथ बैठने की जरूरत पर बल दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने गठबंधन को लेकर चल रही चर्चा के बीच स्पष्ट किया कि विपक्ष का उद्देश्य भाजपा को सत्ता से बेदखल करना है। ऐसे में उन्होंने बसपा के मतदाताओं से कांग्रेस को समर्थन देने की अपील की थी। गठबंधन की चर्चाओं के तेज होने के विषय में उन्होंने कहा कि गठबंधन पर कोई भी निर्णय कांग्रेस आलाकमान द्वारा ही लिया जाएगा।

 

 

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