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डाउनलोड करेंभोपाल. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के गुजरात फार्मूले पर बनी मप्र की टीम के बीच एक महीने बाद काम का बंटवारा हो गया। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने चारों कार्यवाहक अध्यक्षों को बड़ी जवाबदारी सौंपते हुए चुनावी जमावट शुरू कर दी है। जीतू पटवारी को युवाओं और किसानों को साधने का जिम्मा सौंपा गया है जबकि बाला बच्चन आदिवासियों और सुरेंद्र चौधरी दलितों के बीच पैठ बनाएंगे। रामनिवास रावत को संगठन को मजबूत करने के साथ एनजीओ और चुनाव आयोग से जुड़ीं गतिविधियों की जिम्मेदारी दी गई है।
बताया जा रहा है कि यह चारों कार्यवाहक अध्यक्ष जल्द ही कमलनाथ से चर्चा के बाद अपनी टीम बनाएंगे। कमलनाथ के अध्यक्ष बनने के बाद से ही कार्यकर्ताओं को इंतजार था कि कब वे अपनी संगठनात्मक जमावट को अंजाम देंगे। इसकी शुरूआत उन्होंने गुरुवार को कर दी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्र्रेस दफ्तर में उन्होनंे गुरुवार को कमलनाथ के साथ अनुसूचित जाति विभाग के पदाधिकारियों की बैठक ली।
किसको-क्या जिम्मेदारी
- बाला बच्चन - आदिवासियों के कार्यक्रमों का आयोजन, सारे कर्मचारी संगठन, आदिवासी क्षेत्रों में कार्यरत सभी एनजीओ और इंटक का काम।
- रामनिवास रावत - सेवादल व प्रशिक्षण, पिछड़ा वर्ग विभाग, एनजीओ समन्वय, चुनाव आयोग से संबंधित सूचना और विधि प्रकोष्ठ व चुनाव प्रचार अभियान का समन्वय।
- जीतू पटवारी - आंदोलन व धरना प्रदर्शन की कार्ययोजना और क्रियान्वयन, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, महिला व किसान कांग्रेस के कार्यक्रमों का आयोजन व समन्वय।
- सुरेंद्र चौधरी - अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक कार्यक्रम समन्वय व क्रियान्वयन, अजा वर्ग से संबंधित सभी एनजीओ का काम देखेंगे।
छह सदस्यीय समन्वय समिति गठित
कमलनाथ ने छह सदस्यीय समन्वय समिति भी गठित कर दी। समिति कांग्रेस में फिर से प्रवेश के लिए प्राप्त आवेदन पर विचार कर अपना अभिमत कमलनाथ को देगी। इस समित में पूर्व मंत्री इंद्रजीत कुमार पटेल को संयोजक बनाया गया है। इनके अलावा पूर्व सांसद सत्यनारायण पंवार, पूर्व विधायक विश्वेश्वर भगत, पूर्वमंत्री नर्बदाप्रसाद प्रजापति, भारत सिंह जावरा, चंद्रकुमार भनोट सदस्य रहेंगे।
भाजपा की नीयत लोगों तक पहंुचाएं : कमलनाथ
कमलनाथ ने गुरुवार को कहा कि भाजपा की नीयत और डीएनए क्या है यह बात लोगों तक पहुंचानी होगी। हमारे पास समय बहुत कम है और यह देखना है कि 90 दिनों में क्या संभव है। कार्यकर्ताओं को देखना होगा कि कहां उनके प्रभाव से रणनीति सीट में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार से हर वर्ग परेशान है।
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