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16 महीने बाद मरावी हटे तो हमीदिया अस्पताल में जश्न, ढाई घंटे तक लड्डू बंटे, आतिशबाजी

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   हमीदिया अस्पताल में पहले भी कई अधीक्षक आए और गए। मगर डॉ. दीपक मरावी की विदाई जैसा दृश्य इसके पहले कभी नहीं देखा गया। गुरुवार को उन्हें 16 महीने की सेवाओं के बाद हटा दिया गया। शुक्रवार को अस्पताल परिसर में जश्न का माहौल था। मरीजों, डॉक्टरों, नर्सों के बीच बूंदी के लड्डू बांटे गए। दोपहर में पटाखे फोड़े गए। शनिवार को परिसर में स्थित मंदिर में सुंदरकांड होगा।

 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के बाद हमीदिया की हालत में सुधार की उम्मीद में 26 दिसम्बर 2016 को मरावी को अधीक्षक बनाया गया था। लेकिन उनके आते ही विवादों और शिकायतों का एक अलग ही दौर शुरू हो गया। कर्मचारी संगठनाें का कहना है कि हमीदिया में 16 महीने तक एक ऐसे शख्स का टिके रहना भी सरकार के लचर रवैए का प्रमाण है, जिसने शुरू से ही बेतुकी बातें और फैसले लिए। जिसके अनुभव और योग्यता पर लगातार सवाल उठे।

 

नए अधीक्षक बोले- कोई दिक्कत हो तो मुझे बताएं
नए अधीक्षक डॉ. एके श्रीवास्तव ने शुक्रवार को अपनी जिम्मेदारी संभाल ली।  वे काम संभालने के फौरन बाद ओपीडी और भर्ती मरीजों से मिलने पहुंचे। भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की परेशानी होने पर 24 घंटे उनको संपर्क किया जा सकता है। प्रत्येक मरीज को गुणवत्ता का इलाज मुहैया कराना उनकी पहली प्राथमिकता है। 

 

 

शिकायतों की फेहरिस्त लंबी है 


फरवरी 2017 : नर्सों ने आरोप लगाया कि मरावी  ठीक से बात नहीं करते। हर बात पर द्विअर्थी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। नर्सों से यह कहना कि वह फोटो खींच कर भेजें। 
मई : उनकी डिग्री एमसीआई में रजिस्टर्ड नहीं होने के बावजूद रेगुलर होने का झमेला खड़ा हुआ। मामला चिकित्सा शिक्षा (राज्य मंत्री) शरद जैन तक पहुंचा। उन्होंने मरावी को  हटाकर उनकी नियम विरुद्ध सहायक प्राध्यापक ग्रेड-2 के पद पर की गई नियुक्ति की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। 
मंत्री के सवाल: जो पद स्वीकृत ही नहीं, उस पर कैसे मरावी की नियुक्ति हो गई? डिग्री रजिस्टर्ड नहीं, फिर कैसे कर दिया नियमित? मंत्री ने जांच रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को देने के लिए कहा। 
जून : संस्कृति बचाओ मंच ने आरोप लगाया कि मरावी ने वॉट्सएप ग्रुप पर ब्राह्मण व क्षत्रिय समाज के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। अभद्र भाषा प्रयोग करने वाले मरावी इस पद के योग्य ही नहीं हैं। 
अप्रैल 2018: एमबीबीएस की 150 सीटों की मान्यता के लिए एमसीआई की टीम आई थी। सदस्यों ने कहा था कि मरावी एमसीआई मापदंड के अनुसार फिट नहीं हैं। पिछले साल भी एमसीआई ने आपत्ति की थी। तब शासन ने पत्र लिखकर कहा था कि डॉ. मरावी की जगह स्थायी अधीक्षक रखा जाएगा।  
आखिरी मनमानी: मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर गार्ड तैनात किए। मामला सीएम हाउस तक पहुंचा। संभागायुक्त अजातशत्रु श्रीवास्तव ने फटकार लगाई।

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