पुलिस को जवाब नहीं दे पाया निगम, उन्हें खुद नहीं पता किसकी कस्टडी में होती हैं फाइलें

Panchkula Bhaskar News - पंचकूला नगर निगम के स्ट्रॉन्ग रूम से करोड़ों रुपए के वर्क टेंडर्स की फाइलों को गायब करने के मामले में एक ओर जहां...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:36 AM IST
Panchkula News - corporation could not answer the police they themselves do not know whose files are in their custody
पंचकूला नगर निगम के स्ट्रॉन्ग रूम से करोड़ों रुपए के वर्क टेंडर्स की फाइलों को गायब करने के मामले में एक ओर जहां सेक्टर-14 पुलिस थाने में बिल्डर और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी और इस पूरे मामले की जांच उलझती हुई नजर आ रही है। क्योंकि जिन सवालों का जवाब पुलिस ने मांगा है, उस बारे में निगम को कोई जानकारी ही नहीं हैं। लिहाजा अब सेक्टर-14 पुलिस थाने ने निगम को दूसरा नोटिस भेजा है। जिसमें पूछा है कि चोरी होने वाली कितनी, कौन सी फाइलें थी। स्ट्रांग की जिम्मेदारी किस कर्मचारी से लेकर अधिकारी के अंडर आती है। क्योंकि ऐसे तो निगम के काफी कर्मचारी और अधिकारी हैं और सभी को पुलिस थाने में बुलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में निगम पर जहां सवाल खड़े किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर इन्वेस्टिगेशन में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके लिए पुलिस ने साइबर सैल की हेल्प भी ली है। असल में नगर निगम के एक्सईएन की ओर से अपने ही कर्मचारियों और योर्क बिल्डर पर आईपीसी की धारा 406, 420, 120बी के तहत मामला दर्ज करवाया गया है। जिसमें कहा गया है कि निगम के स्ट्रॉन्ग रूम से फाइलों को किसी कर्मचारी या अधिकारी की मदद से चोरी किया गया है या गायब किया गया है। ताकि रिकॉर्ड गायब होने पर निगम को नुकसान पहुंचाया जा सके।

असल में मामला वर्ष 2016- 2017 से जुड़ा है। योर्क कंपनी को निगम ने 12 से 13 करोड़ रुपए के वर्क अलॉट किए थे। इसके बाद कंपनी ने अपने मैटीरियल के एडवांस सैंपल दिए थे। नियमों के हिसाब से निगम ने इन सैंपलों को दिल्ली की एक लैब में क्वालिटी वर्क चेक करने भेजा था। इसमेंे एक के बाद एक, तीनों सैंपलों की यहां से निगेटिव रिपोर्ट सामने आई थी। लैब ने तीनों के मैटीरियल गलत बताए थे।

पुलिस ने निगम को नोटिस भेज पूछे ये सवाल...

सेक्टर-14 पुलिस थाने की ओर से निगम के एक्सईएन को नोटिस भेजा गया है। जिसमें पूछा गया है कि सबसे पहले ये बताएं कि निगम की कौन-कौन सी फाइलें थी? वो किस काम से जुड़ी थी? उनके बारे में किस-किस अधिकारी की डीलिंग हुई थी? स्ट्रॉन्ग रूम में कौन-कौन सी फाइलों को रखा जाता है? इन फाईलों को कब आउटिंग और इन किया जाता है, उसका प्रोसेस क्या है? लास्ट टाइम ये फाइल किसने रखी और किसने मंगवाई थी? स्ट्रॉन्ग रूम में डीलिंग हेड कौन है, उसके बाद जिम्मेदार अधिकारी कौन-कौन है? क्योंकि डिपार्टमंेट की जिम्मेदारी ताे बतानी होगी, नहीं तो पंचकूला नगर निगम में काफी कर्मचारी और अधिकारी हैं। सभी से पूछताछ करना सही नहीं होगा।

लेकिन यहां उलझा है मामला... असल में इस बारे में पुलिस के सवाल पूछने के बाद सामने आया है कि यहां स्टोर में किसकी ड्यूटी है या नहीं, इस बारे में तो निगम को खुद ही नहीं पता है। फाइलों को कैसे मॉनीटर करते हैं। इस बारे में भी जानकारी नहीं हैं। वहीं मामला इंजीनियरिंग विंग और ईओ ऑफिस के बीच उलझ पड़ा है। इसके बाद अब पुलिस के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। जब तक निगम की ओर से कहानी को क्लीयर नहीं किया जाएगा, तब तक बिल्डर्स से भी पूरी इन्वेस्टिगेशन नहीं की जा सकती है।

पुलिस की इन्वेस्टिगेशन





अमित शर्मा | पंचकूला

पंचकूला नगर निगम के स्ट्रॉन्ग रूम से करोड़ों रुपए के वर्क टेंडर्स की फाइलों को गायब करने के मामले में एक ओर जहां सेक्टर-14 पुलिस थाने में बिल्डर और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी और इस पूरे मामले की जांच उलझती हुई नजर आ रही है। क्योंकि जिन सवालों का जवाब पुलिस ने मांगा है, उस बारे में निगम को कोई जानकारी ही नहीं हैं। लिहाजा अब सेक्टर-14 पुलिस थाने ने निगम को दूसरा नोटिस भेजा है। जिसमें पूछा है कि चोरी होने वाली कितनी, कौन सी फाइलें थी। स्ट्रांग की जिम्मेदारी किस कर्मचारी से लेकर अधिकारी के अंडर आती है। क्योंकि ऐसे तो निगम के काफी कर्मचारी और अधिकारी हैं और सभी को पुलिस थाने में बुलाया नहीं जा सकता है। ऐसे में निगम पर जहां सवाल खड़े किए गए हैं, वहीं दूसरी ओर इन्वेस्टिगेशन में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके लिए पुलिस ने साइबर सैल की हेल्प भी ली है। असल में नगर निगम के एक्सईएन की ओर से अपने ही कर्मचारियों और योर्क बिल्डर पर आईपीसी की धारा 406, 420, 120बी के तहत मामला दर्ज करवाया गया है। जिसमें कहा गया है कि निगम के स्ट्रॉन्ग रूम से फाइलों को किसी कर्मचारी या अधिकारी की मदद से चोरी किया गया है या गायब किया गया है। ताकि रिकॉर्ड गायब होने पर निगम को नुकसान पहुंचाया जा सके।

असल में मामला वर्ष 2016- 2017 से जुड़ा है। योर्क कंपनी को निगम ने 12 से 13 करोड़ रुपए के वर्क अलॉट किए थे। इसके बाद कंपनी ने अपने मैटीरियल के एडवांस सैंपल दिए थे। नियमों के हिसाब से निगम ने इन सैंपलों को दिल्ली की एक लैब में क्वालिटी वर्क चेक करने भेजा था। इसमेंे एक के बाद एक, तीनों सैंपलों की यहां से निगेटिव रिपोर्ट सामने आई थी। लैब ने तीनों के मैटीरियल गलत बताए थे।

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