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सहकारी भंडार में भ्रष्टाचार: 1 साल में 22 लाख के ड्राईफ्रूट खा गए तत्कालीन स्टोर प्रभारी !

3 वर्ष पहले
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जोधपुर. सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार में वर्ष 2016-17 में किराणा के स्टोर प्रभारी ने एक साल में करीब 22 लाख रु. के ड्राईफ्रूट खा लिए। इतना ही नहीं, यह गड़बड़ 6-7 साल से चलने एवं सहकारी भंडार को 1 करोड़ रु. का नुकसान पहुंचाने की भी आशंका है। भ्रष्टाचार के यह कारनामे भंडार में वर्ष 2016-17 के किराणा खरीद-भुगतान को लेकर चल रही ऑडिट में पता लगे हैं। इसके बाद ऑडिट टीम ने भंडार के महाप्रबंधक को मीमो जारी कर सेंट्रल स्टोर के तत्कालीन प्रभारी किराणा नरपतसिंह राठौड़ को राशि जमा करवाने के निर्देश दिए। राठौड़ के राशि जमा नहीं करवाने पर अतिरिक्त रजिस्ट्रार अपील्स व भंडार के प्रशासक प्रदीप जैन ने सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर भंडार में ड्राईफ्रूट व किराणा खरीद में घपले की जांच करवाने की मांग की। रजिस्ट्रार के आदेश पर अतिरिक्त सहकारी समितियां एसएल लखानी ने बाड़मेर के उप रजिस्ट्रार सुदोधन उज्जवल व विशेष लेखा परीक्षक अशोक शर्मा के निर्देशन में दो सदस्यों की कमेटी को जांच के निर्देश हैं।

 

 

- प्रदीप जैन ने बताया कि आॅडिट में 22 लाख का गबन सामने आने के बाद में रिपोर्ट बनाकर विभाग को भेज दी है। जांच होने पर गबन का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। राठौड़ को जिम्मेदार मान गबन का केस दर्जकिया जाएगा। 

 

#तीन तरीके से भंडार में किया भ्रष्टाचार 

 

1. रजिस्टर में सामान की 100% तक की कमी- सेंट्रल गोदाम प्रभारी आए हुए माल की मात्रा एवं वजन में 1 से लेकर 100 प्रतिशत तक की कमी कर इन्वेंट्री कंट्रोल रजिस्टर में एंट्री करता। इसी दौरान खरीदे काजू-बादाम के बिलों में भी हेराफेरी की गई। करीब 22 लाख रुपए के ड्राईफ्रूट भंडार में कम दिए।

 

2. बचे माल के अनुसार खरीद रेट बढ़ाता- इस माल में कमी के बाद खरीद दर के अंतर को भी बराबर करता। इसके लिए बचे हुए माल का कुल खरीद मूल्य में भाग दिया जाता। जो रेट आती उसे ही खरीद दर बताया जाता।

 

3. छीजत-छूट का दुरुपयोग करता- व्यवस्था के अनुसार माल बिक्री पर छीजत-छूट करीब 1 प्रतिशत होती है। यह छीजत-छूट भी माल पर प्राप्त कर ली जाती। यानी माल की कमी के बाद छीजत, दोनों ही गलत रूप से प्राप्त करता।

 

 

सिलसिला सालों से चलने का शक

ऑडिट टीम ने आशंका जताई है कि घोटाला पांच-छह साल से चल रहा है और एक करोड़ रुपए की हेराफेरी हो सकती है। इसकी जांच के लिए बीते पांच साल की ऑडिट करने का सुझाव दिया गया है। इधर, ऑडिट प्रभारी ने स्टोर प्रभारी भंडार प्रशासन को मीमो जारी कर भंडार का पक्ष मांगा है। ऑडिट ने यह भी माना है कि भंडार प्रबंधन के नियमित जांच नहीं करने के कारण वर्ष 2017-18 में भी ऐसी गड़बड़ी होने की आशंका है।

 

नोटबंदी में बेचे 9 करोड़ के माल पर भी संदेह 

नोटबंदी के दौरान भंडार ने करीब 9 करोड़ रु. का सामान पुराने नोट लेकर बेचा था। बताया यह भी जा रहा है कि इस दौरान बड़ी मात्रा में पुराने नोट के बदले ड्राईफ्रूट बेचे गए। हालांकि नोटबंदी के दाैरान बेचे व खरीदे गए माल की आॅडिट अभी नहीं हुई है।

 

 अभी तो आॅडिट चल रही है। आॅडिट पूरी होने के बाद में ऑडिटर के साथ में बैठकर सामान की लिस्ट का मिलान करेंगे। वैसे अभी इस मामले में कुछ भी नहीं कहना है।

- नरपतसिंह राठौड़, तत्कालीन किराणा प्रभारी भंडार

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