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इतनी लाचार एसआईटी नहीं देखी, लगता है पुलिस आरोपी है और आरोपी पुलिस: हाईकोर्ट

3 वर्ष पहले
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चंडीगढ़/ पानीपत.  हरियाणा सिविल सर्विसिस (एचसीएस) ज्युडीशियल ब्रांच के पेपर लीक मामले में बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने  जांच कर रही स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) से पूछा कि मजिस्ट्रेट के सामने हुई सीआरपीसी 164 के तहत गवाहियां सील कवर में रखी गई थीं तो फिर उन्हें पुलिस फाइल में बिना सील कवर क्यों रखा गया। क्या जांच के नाम पर महज दिखावा हो रहा है या फिर ऐसा इसलिए किया गया कि आरोपियों को इसे आसानी से उपलब्ध करवा दिया जाए। 

 

इतनी लाचार एसआईटी नहीं देखी- कोर्ट
जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावालिया की बेंच ने कहा कि एक तरफ तो एसआईटी कह रही है कि जांच जारी है और दूसरी तरफ मजिस्ट्रेट के सामने हुई गवाहियां आरोपियों को दी जा रही हैं। सुनवाई कर रहे जज ने यदि ये गवाहियां आरोपी पक्ष को देने के आदेश दिए तो क्या इन आदेशों के खिलाफ अपील दायर नहीं की जा सकती थी। इससे पता चलता है कि जांच किस कदर गंभीरता से की जा रही है। यही नहीं एसआईटी के पुलिस अफसर की कॉल्स डिटेल्स जिला अदालत  प्रिजर्व करवा रही है और एसआईटी इस फैसले पर भी सहमत है और कोई अपील नहीं की जा रही। इतनी लाचार एसआईटी नहीं देखी, जिसकी फोन कॉल डिटेल्स आरोपियों के लिए उपलब्ध हो। ऐसा लगता है कि पुलिस आरोपी है और आरोपी पुलिस है। यह सब भी तब हो रहा है जब हाईकोर्ट जांच को मॉनीटर कर रहा है। हाईकोर्ट की आंखों में भी धूल झोंकी जा रही है, लेकिन ऐसा होगा नहीं। मामला बेहद गंभीर है। ऐसे में डीजीपी गुरुवार को पेश हो। 

 

यह है मामला    

पिंजौर निवासी वकील सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि एचसीएस परीक्षा का डेढ़ करोड़ में पेपर बिक रहा था और इसकी उसे भी पेशकश की गई थी। परीक्षा के लिए याची ने भी आवेदन किया था। परीक्षा की तैयारी के लिए याची ने एक कोचिंग सेंटर ज्वाइन किया। सेंटर में उसकी दोस्ती सुशीला नामक एक महिला से हुई। एक दिन उसने सुशीला से लेक्चर से जुड़ी ऑडियो क्लिप मांगी, जो ऑडियो क्लिप उसे दी गई, उसमें सुशीला किसी दूसरी लड़की सुनीता से बात कर रही थी और डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात हो रही थी। सुशीला ने याची को छह सवाल भी बताए जो परीक्षा में आने थे। 16 जुलाई को हुई परीक्षा में जैसे ही याची ने प्रश्नपत्र देखा तो वह हैरान रह गई कि जो प्रश्न बताए गए थे वे सभी परीक्षा में आए हुए थे। इसके बारे में याची ने अपने पति को बताया तो उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस और हाईकोर्ट को प्रशासनिक स्तर पर दी। याचिका में मांग की गई कि मामले को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए।

 

हाईकोर्ट ने उदाहरण दिया: डेरा सच्चा सौदा केस में 15 साल सील कवर में रही गवाहियां 

 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद मजिस्ट्रेट के सामने हुई गवाहियां आरोपियों को उपलब्ध कराई जाएं तो यह बात समझ में आती है। एसआईटी कह रही है कि जांच जारी है और सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की जाएगी। फिर गवाहियां आरोपियों को क्यों दी गई। बेंच ने कहा कि डेरा सच्चा सौदा मामले में मजिस्ट्रेट के सामने हुई गवाहियां 15 साल तक सील कवर में रही। इस पर एसआईटी के वकील ने कहा कि पुलिस के सामने हुई गवाहियां और मजिस्ट्रेट के सामने हुई गवाहियों में कोई अंतर नहीं था लिहाजा ये दे दी गई। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि यह बात तो एसआईटी को पता थी। इसकी जानकारी आरोपियों को नहीं थी जो बता दी गई। 

 

 

चंडीगढ़ में प्रॉसीक्यूशन डिपार्टमेंट है भी या नहीं 

 

हाईकोर्ट ने कहा कि चंडीगढ़ में प्रॉसीक्यूशन डिपार्टमेंट है भी या नहीं। पिछले दस साल में डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन ने कितनी मीटिंग की। जिला अदालत में एसआईटी की पैरवी कर रहे अधिकारी को कानून की जानकारी ही नहीं है। यह कारण है कि गवाहों के बयान और कॉल डिटेल्स जैसे फैसले के खिलाफ अपील ही नहीं की गई। 22 फरवरी को गवाहियां और 10 अप्रैल को कॉल डिटेल्स संबंधी अर्जी मंजूर की गई थी। इस पर एसआईटी की तरफ से सीनियर एडवोकेट आरएस राय ने कहा कि उन्होंने फैसले के खिलाफ अपील की ओपिनियन दी है और कल ही अपील दायर की जा रही है। इसके अलावा जिला अदालत में केस की पैरवी अब डिस्ट्रिक्ट अटार्नी खुद करेंगे। 

 

सीडी रह गई थी, वह भी दे देते 

 

एसआईटी के लापरवाह रवैया पर हाईकोर्ट ने कहा कि आपकी कॉल डिटेल्स प्रिजर्व कर ली गई हैं। इनमें आफिस के साथ प्राइवेट टेलीफोन नंबर भी शामिल है। जांच जारी है और मजिस्ट्रेट के सामने हुई गवाहियां भी आरोपी पक्ष को दे दी गई है। एसआईटी के पास अब सीडी रह गई है, वह भी आरोपियों को दे देते तो सारा काम खत्म हो जाता। इतनी लापरवाही कैसे हो सकती है। 

 

 

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