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डाउनलोड करेंपानीपत. गोवंश को काटकर पानीपत से यूपी अौर अन्य स्थानों पर मांस सप्लाई किया जा रहा है। तस्करों को पुलिस का संरक्षण तो है ही कुछ स्थानीय लोग भी मददगार बने हैं। गोतस्कराें की गाड़ी के आगे करीब 100 किलो वजनी बंपर लगा होता है। अगर कोई गाड़ी सामने आए तो ये बंपर की मदद से उसको टक्कर मारकर भाग जाते हैं। तस्करों की गाड़ी को कुछ नहीं होता। गोरक्षा दल के उपाध्यक्ष आजाद सिंह आर्य का कहना है कि तस्करी में इस्तेमाल बंपर लगी गाड़ियां दिन में ही यूपी से हरियाणा में मुख्य सड़क से होते हुए आती हैं, लेकिन पुलिस को ये नजर नहीं आती। इन पर कभी कोई कार्रवाई नहीं होती है।
जनवरी से अब तक तस्करी के 11 मामले सामने आए हैं
- यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो पानीपत समेत अन्य जिलों में गो तस्करी एकदम बंद हो गई थी। यूपी में बूचड़खाने बंद कर दिए गए। सख्ती का ऐसा असर दिखा कि पानीपत में करीब 6 माह तक गो तस्करी का एक भी मामला सामने नहीं आया, लेकिन अब तस्करों ने हरियाणा में यमुना किनारे ठिकाने बना लिए हैं।
- जनवरी से अब तक तस्करी के 11 मामले सामने आए हैं। जो तस्कर गोवंश ले जाने में कामयाब हो जाते हैं, वे पुलिस रिकॉर्ड में नहीं हैं। 24 घंटे गश्त कर सक्रिय रहने का दावा करने वाली पुलिस का हाल ऐसा है तस्कर पुलिस को मिलते ही नहीं है। 11 केस में से करीब 9 में गोरक्षकों ने ही पुलिस को सूचना दी। फिर भी तस्कर आराम से भागने में कामयाब हो गए। हालांकि, एसपी संगीता की सख्ती के बाद पुलिस अब कुछ सक्रिय हो रही है।
भागने में यमुना के कच्चे घाट बने मददगार
गोरक्षा दल के उपाध्यक्ष आर्य का कहना है कि यूपी के तस्कर पानीपत से आवागमन करने में सबसे महफूज सफर मानते हैं। यहीं से तस्कर कई जिलों में गोवंश तस्करी कर वापस जाते हैं। गर्मी के सीजन में यमुना नदी का पानी कम होने से गोवंश तस्करी बढ़ जाती है। यमुना नदी के किनारे कच्चे घाट से तस्कर गाड़ी लेकर आराम से निकल जाते हैं। राणा माजरा, पत्थरगढ़, नन्हेड़ा व बिलासपुर गांव के पास बने घाट से तस्कर आ रहे हैं।
तस्करों को नकली गोरक्षकों का भी साथ
आर्य ने कहा कि गो तस्करी में पकड़े गए तस्कर पानीपत की फैक्ट्रियों में दिन में काम करके रैकी करते हैं। वे ही तस्करों को गोवंश के झुंड वाले स्थानों की जानकारी देते हैं। इसके अलावा नकली गोरक्षक बनकर भी आरोपी मदद करते हैं। पिछले दिनों एक आरोपी गोवंश लेकर जा रहा था। पकड़ा गया तो उसने अपना हिन्दू नाम बताया। जांच हुई तो आरोपी दूसरे समुदाय का निकला।
कच्चे घाट पर भी नाके लगाएं जाएंगे : एएसपी
- पानीपत एएसपी चंद्रमोहन के मुताबिक, पुलिस गोतस्करों का किसी प्रकार से सहयोग नहीं कर रही है। गो तस्करी रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह से प्रयासरत है। 8 पुलिसकर्मियों की एक टीम बनाई है, जो सिर्फ तस्करी रोकने व तस्करों को पकड़ने का काम करेगी। इसके साथ यमुना किनारे गांवों में पुलिस गश्त बढ़ाई गई है। आने वाले दिनों में यमुना के कच्चे घाट पर पुलिस नाके लगाए जाएंगे।
- बुधवार को पानीपत आए शामली एसपी से बैठक के दौरान भी गो तस्करी को लेकर बात हुई है। दोनों जिलों की पुलिस इस पर काम करेगी। बंफर लगी गाड़ियों पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। तस्कर दिन में यमुना किनारे गांवों में अपने सपोटरों के पास आकर गाड़ियां खड़ी कर देते हैं, फिर रात को तस्करी करते हैं।
गत दिनों हुई 5 वारदात
- 5 जनवरी को जावा कॉलोनी, मोतीराम कॉलोनी, ऊझा रोड व समालखा में तस्कर फायरिंग कर गोवंश ले गए।
- 16 फरवरी को सिवाह गांव बाईपास पर 22 गोवंश से भरा कंटेनर पकड़ा। तस्कर फायरिंग करने के बाद भाग निकले।
- 27 फरवरी को सिवाह बाईपास पर कंटेनर पकड़ा। फायरिंग करके एक तस्कर भाग निकला । 3 पकड़े गए।
- 31 मार्च को सेक्टर 11-12 के पास तस्करों ने फायरिंग व पथराव किया। पत्थर लगने से गोरक्षक रिंकू आर्य घायल हो गए।
- 12 मई को बापौली में गो तस्करों ने छात्र कुलबीर को गोली मार दी और पिकअप में गोवंश भरकर मौके से भाग गए।
तस्करों काे पुलिस का पूरा सहयोग: आर्य
गोरक्षा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष आजाद सिंह आर्य ने बताया कि तस्करों काे पुलिस का पूरा सहयोग है। पुलिस गोरक्षकों को अपनी बाधा मानती है। इसलिए पिछले सालों में 6 गोरक्षकों को डकैती के केस में फंसा दिया था। विरोध करने पर 40 दिन बाद ही पुलिस ने उन्हें निर्दोष बता दिया। पुलिस की नीयत साफ नहीं है। यमुना के किनारे गांवों में गोवंश कट रहे हैं। नई एसपी संगीता कालिया आई हैं, उनसे मिले तो अच्छा रिस्पांस मिला है। लगता है कि वे गो तस्करी को रोकेंगी।
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