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करोड़ों में खरीदे गए सामान पड़े हैं बेकार पर ट्रैफिक जवानों को ~50 का मास्क नहीं
झारखंड सरकार कोरोना वायरस से निबटने के लिए पूरी तरह से सतर्क है। अस्पतालों में पहले से ही सुरक्षा व संदिग्ध के पाए जाने पर इलाज की मुकम्मल व्यवस्था की गई है। लेकिन, शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर 12 से 14 घंटे तक ड्यूटी करनेवाले ट्रैफिक जवानों के लिए 50 रुपए के मास्क की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि, ट्रैफिक सिस्टम के लिए करोड़ों रुपए के सामान खरीदे गए हैं। इनमें कई सामान सिर्फ बक्सों की शोभा बढ़ा रहे हैं या फिर उनका उपयोग ही नहीं हो रहा है। ट्रैफिक जवानों को सबसे ज्यादा लोगों के संपर्क से गुजरना पड़ता है, क्योंकि वे ऐसी जगहों पर ड्यूटी करते हैं, जहां से हर घंटे सैकड़ों लोग व वाहन गुजरते हैं। इन लोगों में कौन संक्रमित है, यह कोई नहीं जानता। अगर, किसी एक ट्रैफिक जवान को संक्रमण हो जाए तो उसके जरिए कई जवान संक्रमित हो सकते हैं।
इंटरसेप्टर से तेज रफ्तार वाहनों को पकड़ने के बजाय हो रही सीएम हाउस के पास पेट्रोलिंग
इधर, ब्रेथ एनेलाइजर का भी उपयोग बंद हो गया है। सिर्फ इसलिए कि जांच करने वाला पाइप जिसे हर बार बदला जाता है, वह खत्म हो गया। कुछ दिनों बाद ट्रैफिक पुलिस के लिए वीडियो कैमरे खरीदे गए, ताकि जवानों के साथ बदसलूकी करनेवालों की रिकार्डिंग हो सके, लेकिन एक-दो दिन के उपयोग के बाद वे बंद हो गए। तेज रफ्तार वाहनों को पकड़ने के लिए लाखों रुपए के दो इंटरसेप्टर खरीदे गए, पर अब सीएम आवास के आसपास गश्ती के लिए हो रहा है।
लाखों के सामान बढ़ा रहे बक्से की शोभा
ट्रैफिक पुलिस के लिए दो साल पहले लाखों रुपए के बटन कैमरे खरीदे गए थे। करीब 41 बटन कैमरे सभी ट्रैफिक पोस्ट के लिए खरीदे गए, लेकिन कुछ ही दिन बाद इनका उपयोग सिर्फ इसलिए बंद हो गया, क्योंकि विभाग से फरमान जारी हो गया कि अगर कैमरा टूटता है, तो इस्तेमाल करनेवाले जवान के वेतन से पैसा काटा जाएगा। इसके बाद सारे बटन कैमरे बक्से में बंद हो गए।