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शहीद की अंत्येष्टि में दहाड़ मार रो रहीं थी पत्नी-मां और बहनें, मासूम बेटों ने कहा- हम कहीं नहीं जाएंगे, पापा आ रहे हैं उनके लिए स्टेज सजा रहे हैं

3 वर्ष पहले
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बीहट (बिहार)। बीहट में आज एक हर लोगों की आंखें नम थी और जुबां पर जोश था। हजारों युवा आंखों में आंसू लिए भारत माता की जयकारा के साथ अपने शहीद को श्रद्धांजलि दे रहे थे। सबकी जुबां पर भारत माता की जय, शहीद राजेश अमर रहे। शहीद राजेश के घर से लेकर चांदनी चौक, सीआईएसएफ मैदान और फिर सिमरिया धाम तक बस लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर निगाहें आज बरबस राजेश को देखने के लिए बेताब था। 

 

- हर निगाहें आज बरबस राजेश को देखने के लिए बेताब थी। शहीद राजेश छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स में थे।

- यह गांव के लोग कम ही जानते थे, लेकिन जब उसके शहीद होने की खबर गांव तक आई तो गांव का हर व्यक्ति, हर बच्चा उसके इंतजार में अहले सुबह से लेकर देर शाम तक टकटकी लगाए रहे।

- शहीद राजेश का घर, बीहट बाजार, सीआईएसएफ ग्राउंड  हर जगह लोगों की भीड़ उसके दर्शन के लिए बेताब खड़ी थी।   

 

दहाड़ मार रोने लगी पत्नी, मां और बहनें, लोगों ने संभाला  
- शहीद राजेश का शव ज्योंहि घर पर पहुंचा शहीद की पत्नी स्वीटी दहाड़ मार कर रोने लगी। उसके पीछे शहीद की मां और चार बहनें भी उस भीड़ में बिलखती रही।

- ताबूत में पड़े शव के अंतिम दर्शन और शव से लिपटकर रोने की चाह ने हर परिजनों को गमगीन कर दिया।

- शहीद की पत्नी, मां और बहनों को दर्शन के लिए लाया गया तो जगह ही नहीं बच पाई। चौकी पर रखे गए शव के दर्शन के लिए उमड़े लोगों के कारण लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।

 

शहीद के मासूम बेटे बोले हम पापा के लिए स्टेज सजा रहे हैं वो आने वाले हैं

-  श्रद्धांजलि के लिए शहीद राजेश के आवास पर एक स्टेज को फूल माला से सजाकर उस पर राजेश का बड़ा तैलचित्र लगाया गया था। उसके आसपास राजनीतिक गैर राजनीतिक गणमान्य बैठे।

- कभी देश की बिगड़ती व्यवस्था तो कभी नक्सलवाद व अपराध पर आपस में चर्चा कर रहे थे।

- इसी बीच मंच के बगल में खेल रहे एक 6 साल एवं एक 4 साल के बच्चे को लोगों ने मंच को सजाए फूल माला को तोड़-तोड़ कर तैलचित्र एवं मंच पर बिखेरते देखा।

- कुछ लोग गुस्साए मुद्रा में वहां के कार्यकर्ताओं से उक्त बच्चे को भगाने का निर्देश देते हैं। लेकिन तभी दूसरी ओर से आवाज आती है नहीं, नहीं रहने दीजिए ये शहीद के पुत्र हैं।

- इसी बीच तपाक से उक्त बच्चे का भी जवाब आता है ' मैं कहीं नहीं जाऊंगा, मेरे पापा आ रहे हैं, मैं अपने पापा के लिए स्टेज सजा रहा हूं।' इस बच्चे की आवाज सुनकर सभी अवाक।

- कुछ समय के लिए वहां का माहौल ध्वनि शून्य हो जाता है। लेकिन इससे बेफिक्र उक्त दोनों बालक फूल तोड़-तोड़ कर अपने पापा के लिए उक्त कथित मंच को सजाने में व्यस्त रहता है।

 

सैकड़ों बाइक सवार युवाओं ने की शहीद के शव की अगुवानी 

- शहीद राजेश ने शायद ही सोचा होगा कि उसके शहीद होने पर उसके दर्शन के लिए लोग इतने व्याकुल होंगे। लोग राजेंद्र पुल पर सैकड़ों बाइक के साथ हजारों युवा इंतजार कर रहे थे।

-  घड़ी के जब 4.10 बजे तो राजेश का शव राजेंद्र पुल के रास्ते बीहट की ओर बढ़ चला।

- आगे-आगे बैंड बाजा पीछे हजारों युवा और फिर शहीद का कटआउट वाहन और उसके पीछे वाहनों की लंबी काफिला लग गई। 

 

बड़े बेटे ने दी मुखाग्नि 
- शाम के करीब छह बजे शहीद राजेश का पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए सिमरिया गंगा घाट के लिए ले जाया गया। जहां उनके बड़े ऋषभ कुमार ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।