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कॉमनवेल्थ गेम्स: पूनम यादव ने दिलाया गोल्ड, उन्हें वेटलिफ्टर बनाने के लिए परिवार भूखा भी सोया

94 किग्रा कैटेगरी में विकास ठाकुर ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 08, 2018, 12:31 PM IST

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    पूनम ने क्लीन एंड जर्क की दूसरी कोशिश में 122 किग्रा उठाया, लेकिन फाउल किया। तीसरी कोशिश में वह 122 किग्रा उठाने में कामयाब रहीं।

    • कॉमनवेल्थ गेम्स में अलग-अलग कैटेगरी में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर बनीं
    • ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 63 किग्रा कैटेगरी में उन्होंने ब्रॉन्ज जीता था। तब परिवार के पास मिठाई बांटने के भी पैसे नहीं थे।

    गोल्ड कोस्ट.यहां कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने लगातार चौथे दिन सोना जीता। वेटलिफ्टर पूनम यादव ने 69 किग्रा कैटेगरी में 222 (स्नैच में 100 और क्लीन एंड जर्क में 122) किग्रा का वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। इंग्लैंड की सारा डेविस ने सिल्वर और फिजी की अपोलानिया वायवाय ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। उधर, 94 किग्रा कैटेगरी में वेटलिफ्टर विकास ठाकुर ने 351 किग्रा वजन उठाकर भारत को ब्रॉन्ज पदक दिलाया। पूनम के माता-पिता ने DainikBhaskar.comको बताया कि उनकी बेटी ने तंगी के बावजूद अपना संघर्ष जारी रखा। एक वक्त ऐसा भी आया, जब बेटी को प्रैक्टिस कराने के लिए परिवार को मवेशी बेचने पड़े थे। ग्लासगो में ब्रॉन्ज जीती थी तब परिवार के पास मिठाई बांटने के लिए भी पैसे नहीं थे।


    2 कैटेगरी में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय

    - पूनम कॉमनवेल्थ गेम्स में दो अलग-अलग कैटेगरी में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय वेटलिफ्टर हो गईं हैं। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 63 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीता था।

    - उनसे पहले यह कारमाना संजीता चानू ने किया। उन्होंने इस कॉमनवेल्थ गेम्स में 53 किग्रा कैटेगरी में 192 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड जीता है। ग्लासगो में उन्होंने 48 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था।

    पूनम ने ऐसे जीता गोल्ड

    स्नैच

    पहली कोशिश:95 किग्रा

    दूसरी कोशिश:98 किग्रा

    तीसरी कोशिश:100 किग्रा

    - स्नैच में पूनम और फिजी की अपोलानिया ही सबसे आगे थीं।

    क्लीन एंड जर्क

    पहली कोशिश:118 किग्रा

    दूसरी कोशिश:122 किग्रा (फाउल)

    तीसरी कोशिश:122 किग्रा

    इंग्लैंड की सारा ने जीता सिल्वर

    स्नैच

    पहली कोशिश:92 किग्रा

    दूसरी कोशिश:95 किग्रा (फाउल)

    तीसरी कोशिश:95 किग्रा

    क्लीन एंड जर्क

    पहली कोशिश:119 किग्रा

    दूसरी कोशिश:122 किग्रा

    तीसरी कोशिश:128 किग्रा (फाउल)

    - सारा ने पहले 124 ऑप्ट किया था, लेकिन गोल्ड जीतने की ख्वाहिश में फैसला बदलकर 128 किग्रा आप्ट किया था।

    फिजी की अपोलानिया ने बॉन्ज जीता

    स्नैच

    पहली कोशिश:97 किग्रा

    दूसरी कोशिश:100 किग्रा

    तीसरी कोशिश:103 किग्रा (फाउल)

    क्लीन एंड जर्क

    पहली कोशिश:115 किग्रा (फाउल)

    दूसरी कोशिश:116 किग्रा

    तीसरी कोशिश:122 किग्रा (फाउल)

    पूनम ने ग्लासगो में 63 किलोग्राम कैटेगरी में जीता था ब्रॉन्ज
    2014, ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: 63 किलोग्राम कैटेगरी में ब्रॉन्ज

    2017, कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप (गोल्ड कोस्ट): 69 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर
    2015, पुणे में हुई कॉमनवेल्थ चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में गोल्ड

    2014, अलमाटी (कजाखिस्तान) वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 63 किग्रा कैटेगरी में 20वें नंबर पर रहीं थीं।

    2017, अनॉहाइम (अमेरिका) में हुई वर्ल्ड चैम्पियनशिप: 69 किग्रा कैटेगरी में 9वें नंबर पर रहीं थीं। तब उन्होंने 218 किग्रा (स्नैच में 98 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 120 किग्रा) का वजन उठाया था।

    गरीबी ऐसी की भूखे रहना पड़ता था: मां

    - पूनम की फैमिली वाराणसी के दांदुपुर में रहती है। DainikBhaskar.comसे बातचीत में मां उर्मिला ने कहा कि बेटी ने काफी स्ट्रगल किया। हम वो पल नहीं भूल सकते, जब कई बार भूखे भी रहना पड़ा। पूनम के खेलने पर लोग ताने मारते थे, आज वही सलाम करते है।
    - उर्मिला ने बताया कि 2014 के ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में जब बेटी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता तो हमारे पास इतने पैसे भी नहीं थे कि मिठाई बांट सके। तब पूनम के पापा कहीं से पैसों का इंतजाम करके मिठाई लाए। तब घर में खुशियां मनाई गई थीं।

    7 साल में ऐसे बदली किस्मत
    - पिता कैलाश यादव ने बताया कि ओलिम्पिक में कर्णम मल्लेश्वरी के गोल्ड मेडल जीतने के बाद से यही सपना था कि मेरी बेटी भी मेडल लाए। 2011 में पूनम ने प्रैक्टिस शुरू की। घर और खेतों का सारा कामकाज भी वही करती थी। गरीबी के चलते उसे पूरी डाइट भी नहीं मिल पाती थी। फिर अपने गुरु स्वामी अगड़ानंद जी ने मुझे स्थानीय समाजसेवी और नेता सतीश फौजी के पास भेजा। उन्होंने पूनम को खिलाड़ी बनाने में पूरी मदद की और करीब 20 हजार रुपए महीना खर्च दिया। ग्लासगो कॉमनवेल्थ में हिस्सा लेने के लिए हमारे पास पैसे नहीं थे। तब भैंसों को बेच दिया और करीबियों से 7 लाख रुपए उधार लिए। यहां ब्रॉन्ज मेडल लाकर उसने सबका सपना पूरा कर दिया।

    पूनम के दोनों भाई हॉकी के नेशनल प्लेयर
    - पूनम ने फिलहाल बीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर ली है। रेलवे में वे टीटीई की नौकरी भी कर रही हैं।
    - उनके 2 भाई और 4 बहनें हैं। दोनों भाई आशुतोष और अभिषेक हॉकी के नेशनल प्लेयर हैं।

    विकास ठाकुर ने उठाया 351 किग्रा वजन

    - वेटलिफ्टिंग की 94 किग्रा कैटेगरी में भारत के विकास ठाकुर ब्रॉन्ज मेडल जीतने में सफल रहे। उन्होंने 351 किग्रा (स्नैच में और क्लीन एंड जर्क में) किग्रा वजन उठाया। उन्होंने स्नैच की पहली कोशिश में 152, दूसरी में 156 और तीसरी में 159 किग्रा वजन उठाया। क्लीन एंड जर्क की पहली कोशिश में उन्होंने 192 किग्रा वजन उठाया। इसके बाद की दो कोशिशों में 200 किग्रा ऑप्ट किए, लेकिन दोनों बार असफल रहे।

    - विकास ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में 85 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज जीता था।

    - 94 किग्रा कैटेगरी में डिफेंडिंग चैम्पियन पापुआ न्यू गिनी के स्टीवन कारी ने इस बार भी गोल्ड जीता। उन्होंने 370 (स्नैच में 154 और क्लीन एंड जर्क में 216) किग्रा वजन उठाया।

    - सिल्वर मेडल कनाडा के बोडी सैनटावी ने जीता। उन्होंने 369 (स्नैच में 168 और क्लीन एंड जर्क में 201) किग्रा वजन उठाया।

    पदक तालिका: टॉप 5 देश

    देशगोल्डसिल्वरब्रॉन्जकुल
    ऑस्ट्रेलिया31252884
    इंग्लैंड1919947
    कनाडा7151028
    भारत72312
    स्कॉटलैंड6710

    23

    * यह तालिका भारतीय समयानुसार रविवार शाम 6:00 बजे तक अपडेट है।

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    इंग्लैंड की सारा (बाएं) ने सिल्वर और फिजी की अपोलानिया वायवाय (दाएं) ने बॉन्ज जीता।
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    पूनम अपने माता-पिता के साथ।
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