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कर्नाटक में कांग्रेस के सीक्रेट सुपरस्टार, 4 दिन घर नहीं गए, सूटकेस में कपड़े लेकर घूमते रहे

3 वर्ष पहले
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बेंगलुरु. कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि बीजेपी निकल नहीं पाई। सीएम पद की शपथ लेने वाले येदियुरप्पा को फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उन्हें पता था कि पार्टी के पास इतने विधायक नहीं हैं कि बहुमत साबित कर सके। जिस चक्रव्यूह में फंसकर बीजेपी की सरकार गिरी, उसे रचने वाला दिल्ली में बैठा कांग्रेस का कोई बड़े नेता नहीं, बल्कि कर्नाटक की राजनीति के महारथी कांग्रेस विधायक डी के शिवकुमार हैं। वो सिद्धारमैया सरकार में मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने ही चार दिनों तक कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों को बीजेपी से बचाकर रखा।  चार दिन तक घर नहीं गए शिवकुमार...

 

कांग्रेस और जेडीएस ने आरोप लगाया कि बीजेपी उनके विधायकों को फोन करके करोड़ों रुपए ऑफर कर रही है। कांग्रेस ने यहां तक कहा कि उसके एक विधायक आनंद  सिंह को अगवा कर लिया गया है। ऐसे में कांग्रेस के विधायकों को बीजेपी की पहुंच से दूर रखना बड़ी चुनौती थी। लिहाजा पार्टी ने अपने विधायकों को पहले तो ईगलटन रिसॉर्ट में रखा फिर उन्हें बस में भरकर हैदराबाद ले गई। जब सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ही फ्लोर टेस्ट का फैसला सुना दिया तो फिर चुनौती हुई कि कैसे हैदराबाद से सही वक्त और सेफ्टी के साथ विधायकों को विधानसभा तक लाया जाए। ये सारी जिम्मेदारी निभाई शिवकुमार ने। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक रिजल्ट आने के बाद चार दिनों तक शिवकुमार घर नहीं गए। वो एक सूटकेस में कपड़े भरकर लगातार यहां-वहां ट्रेवल करते रहे। सिद्धारमैया ने जब सूटकेस में कपड़े रखने को लेकर उनसे मजाक किया तो उन्होंने जवाब दिया - मैं घर नहीं जा सकता इसलिए कपड़े साथ लाया हूं। पार्टी के प्रति शिवकुमार की निष्ठा भी अडिग है। जिस दौरान वो विधायकों को सेफ रखने के लिए दिन रात एक किए हुए थे, तो उनसे किसी ने पूछा आप सीएम नहीं बनना चाहते क्या? शिवकुमार ने जवाब दिया - मुझे अपने पार्टी लीडर्स पर पूरा भरोसा है, वो मेरे साथ इंसाफ करेंगे। 

 

शिवकुमार ने पहले ही कर दी थी भविष्यवाणी 
कांग्रेस से 7 बार के विधायक डी के शिवकुमार ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही कह दिया था कि येदियुरप्पा बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं।फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस के दो विधायक प्रताप गौड़ा और आनंद सिंह विधानसभा नहीं पहुंचे थे। तब कयास लग रहे थे कि दोनों विधायक बीजेपी को सपोर्ट करेंगे। तब भी डी के शिवकुमार निश्चिंत थे। उन्होंने कहा था कि वो आएंगे और कांग्रेस को ही वोट करेंगे।

 

पहले भी बन चुके हैं संकटमोचक
कर्नाटक में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की शुरूआत डी के शिवकुमार ने ही की थी। वक्त-वक्त पर उन्होंने विधायकों को रिसॉर्ट में रखकर पार्टी के लिए बहुमत बनाए रखने का काम किया है। कांग्रेस के लिए शिवकुमार की छवि संकटमोचक की ही रही है। पिछले साल राज्यसभा चुनाव में सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को जिताने के लिए गुजरात के कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा का जिम्मा डी के शिवकुमार को ही दिया गया था। तब शिवकुमार ने सभी विधायकों को रिसॉर्ट में ही रखा था। इसके अलावा साल 2002 में महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार को गिरने से बचाने के लिए वहां के 40 कांग्रेसी विधायकों को डी के शिवकुमार की देखरेख में ही बेंगलुरु के ईगलटन रिसॉर्ट में रखा गया था।

 

देवेगौड़ा से रही है दुश्मनी
राजनीतिक की शुरुआत से ही शिवकुमार की लड़ाई एच डी देवेगौड़ा और उनके बेटे कुमारस्वामी से रही है। शिवकुमार के सियासी करियर की शुरुआत 1983 में युवा कांग्रेस के राज्य सचिव बनने से हुई। 1985 कर्नाटक विधानसभा चुनाव में एचडी देवेगौड़ा ने होलानरसीपुर और सातनूर दो सीटों से पर्चा भरा। सातनूर विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर 25 साल के डी के शिवकुमार मैदान में थे। इस चुनाव में शिवकुमार की हार हुई। बाद में देवेगौड़ा ने सातनूर की सीट छोड़ दी, जिसके बाद शिवकुमार वहां से जीत गए।
- 1989 में शिवकुमार सातनूर से दूसरा चुनाव भी जीत गए। इसके बाद 1999 में शिवकुमार ने एचडी कुमारस्वामी को सातनूर से हराया।  
- इसके बाद 2004 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हुए। देवेगौड़ा फिर से दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे थे। यहां शिवकुमार ने एक पत्रकार तेजस्विनी को उनके खिलाफ उतारा और देवेगौड़ा को हरा दिया। लेकिन कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने तीनों को फिर से एक साथ लाकर खड़ा कर दिया। येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद कुमारस्वामी, शिवकुमार का हाथ थामते हुए विट्री साइन बनाते दिखे।

 

शिवकुमार से जुड़े फैक्ट्स

-  2013 में शिवकुमार सीएम पद की दौड़ में थे। लेकिन सिद्धारमैया की सरकार में ऊर्जा मंत्री के पद से संतोष करना पड़ा।
- कर्नाटक की राजनीति में डीके नाम से जाने जाने वाले शिवकुमार न्यूमेरोलॉजी में विश्वास करते हैं। उनका फेवरेट नंबर 6 है।  
- 1999 में शिवकुमार कर्नाटक कैबिनेट में सबसे युवा मिनिस्टर बने। 
- डी के शिवकुमार कर्नाटक के सबसे अमीर विधायकों में से एक हैं, उनकी घोषित संपत्ति 730 करोड़ रुपए है।