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स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन तो बढ़ा, उसे जनता तक भी पहुंचाएं

करंट अफेयर्स पर 30 से कम उम्र के युवाओं की सोच

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 12:02 AM IST
रचित पंड्या रचित पंड्या

भारत विद्युत ऊर्जा के उत्पादन और उपभोग में विश्व में पांचवें स्थान पर है। बिजली का उत्पादन तो बढ़ रहा है लेकिन, बढ़ती हुई जनसंख्या तक इसकी पहुंच बनाना चुनौती है। इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा सौर ऊर्जा के विकास और प्रोत्साहन से संबंधित योजनाओं में जनता को भी सक्रियता दिखानी होगी। भारत एक ट्रॉपिकल देश है। वर्षभर लगभग 3000 घंटे सूरज की रोशनी मिलती है, जिसका लाभ भारत को लेना चाहिए। इस दिशा में ग्रीन एंड क्लीन एनर्जी के उपयोग हेतु भारत का ‘इंटरनेशनल-सोलर-अलायन्स’ जैसे संगठन में सदस्य बनना, ऊर्जा नीति के संदर्भ में एक रणनीतिक कदम है।


वहीं, किसानों को सोलर पम्पों के वितरण वाली ‘कुसुम-योजना’, ऊर्जा की सुनिश्चित पहुंच के साथ अतिरिक्त आय भी मुहैया करा रही है। बायोगैस के उत्पादन हेतु ‘गोबरधन-योजना’ साथ ही कर्नाटक में सोलर पार्क ‘शक्तिस्थल’ की स्थापना सही मायनों में ‘न्यू-इंडिया’ की संकल्पना को सिद्ध करेगी। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए यह कारगर साबित होगा। भारत अब ऊर्जा की दिशा में खुद आगे रहकर पहल कर रहा है, जिसका उदाहरण हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ‘अंतरराष्ट्रीय-ऊर्जा-मंच’ है, जो वैश्विक स्तर पर स्वच्छ-ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी और इनोवेशन साझा करने के लिए बढ़ाया गया क्रांतिकारी कदम है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा की समस्या भारत की ही नहीं दुनिया की समस्या है।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों का एक मंच पर आकर सौर-ऊर्जा के संबंध में गंभीरता दिखाना धरती के पर्यावरण के लिए अच्छा रहेगा, क्योंकि प्रदूषण से जैव विविधता संकट में आ गई है और खतरे में पड़ी प्रजातियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह माना जा रहा है कि परम्परागत ऊर्जा स्रोत जैसे कोयले के भंडार 2040-2050 तक समाप्त हो जाएंगे। अतः आवश्यकता है कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि जैसे अक्षय ऊर्जा योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के साथ जनता में इनके प्रति जागरुकता बढ़ाकर ग्रीन एनर्जी की पहुंच को सुनिश्चित किया जाए।

रचित पंड्या, 27
एमएससी, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
rachitpandya26@gmail.com

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