पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंनेशनल डेस्क. एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव के विरोध में 2 अप्रैल के दिन दलितों ने भारत बंद का आह्वान किया था। उनका कहना था कि आज भी उनके साथ दलित के नाम पर भेदभाव और मारपीट की जाती है। भारत बंद के लगभग 47 दिन बाद राजकोट में हुई एक घटना ने फिर से दलितों की कही बात को सच साबित कर दिया। गुजरात के दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवानी ने एक वीडियो ट्वीट किया। जिसमें दिख रहा है कि एक शख्स को रस्सी से बांधकर बुरी तरह से पीटा जा रहा है। ट्वीट में लिखा है कि मुकेश नाम का शख्स, जो कि एक दलित था, उसे फैक्ट्री के मालिक ने पीट-पीटकर मारा डाला।
कचरा इकट्ठा करता था मुकेश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृत व्यक्ति का नाम मुकेश था। वो अपनी पत्नी के साथ कचरा इकट्ठा करने का काम करता था। दोनों फैक्ट्री के पास कचरा इकट्ठा कर रहे थे। इतने में फैक्ट्री से कुछ लोग आए और पहले कचरा उठाने से मना किया फिर पीटने लगे। पहले मुकेश की पत्नी से मारपीट की, फिर उसे फैक्ट्री से भगा दिया। इसके बाद मुकेश को रस्सी से बांधकर पीटना शुरू कर दिया। मुकेश को इतना पीटा की वो बेहोश हो गया। इससे पहले कि वो हॉस्पिटल पहुंचता उसकी मौत हो गई।
क्या राजनीति में मोहरा भर हैं 'दलित'?
ये सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि 'भारत बंद' के दौरान सभी पार्टियां दलितों के हक में थीं। सभी ने एससी-एसटी एक्ट में हुए बदलाव को वापस लेने की मांग की। अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में है। लेकिन क्या वाकई राजनीतिक पार्टियां दलितों का विकास और उनका उद्धार करना चाहती हैं? इसे कुछ आंकडों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं।
- देश में 16.6 प्रतिशत आबादी दलितों की है। आंकड़ों की बात करें तो साल 2014 में दलितों के साथ अपराध के 40,401 केस, 2015 में 38,670 और 2016 में 40,801 केस दर्ज किए गए। यानी एक दिन में दलितों के खिलाफ अपराध के 111 मामले दर्ज होते हैं।
- अगर दलित के साथ रेप के मामले देखें तो साल 2006 में रेप के 1217 केस दर्ज हुए। जो 2015 में बढ़कर 2326 तक पहुंच गया। यानी एक दिन में 6 दलित महिलाओं के साथ रेप हो रहा है।
- योजना आयोग की रिपोर्ट की मुताबिक शहरों में 37 प्रतिशत दलित गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहें हैं जबकि अन्य की संख्या 16 प्रतिशत है। गांवों की बात करें तो वहां 40 प्रतिशत दलित गरीबी रेखा से नीचे हैं जबिक दूसरी जातियों के सिर्फ 16 प्रतिशत लोग गरीब हैं हैं।
- दलितों पर अत्याचार की एक बड़ी वजह उनकी साक्षरता दर में कमी का होना भी है। योजना आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक गांव में सिर्फ 62 प्रतिशत दलित हैं लेकिन बाकी जातियों के 77 फीसदी साक्षर हैं...शहरों में दलितों की साक्षरता दर 76 प्रतिशत है। अन्य की 90 प्रतिशत। वहीं आमदनी की बात की जाए तो 99 प्रतिशत दलितों की आमदनी 10 हजार रुपए/माह भी नहीं है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.