36 साल बाद चेयरमैन बोले- अतिक्रमण गंभीर समस्या, परियोजना शुरू हो पाएगी, कहना मुश्किल

5 वर्ष पहले
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रांची. बीएंडके एरिया का नासूर बना दामोदर नदी एवं रेलवे डायवर्सन परियोजना (डीआरएंडआरडी) के शुरु होने के आसार न के बराबर है। 36 साल में 3 हजार करोड़ खर्च करने के बाद कोल इंडिया प्रबंधन को इसका आभास हुआ है। कोल इंडिया के चेयरमैन एके झा ने कहा कि इस प्रोजेक्ट की जमीन पर अतिक्रमण की गंभीर समस्या है। इन समस्याओं से निजात पाकर यह प्रोजेक्ट शुरू हो पाएगा कि नहीं, यह बता पाना मुश्किल है। बेहतर होगा कि इस प्रोजेक्ट के बारे में आप सीसीएल से बात कर लें। जब इस बारे में सीसीएल के सीएमडी गोपाल सिंह से पूछा गया तो उन्होंने भी जमीन और अतिक्रमण की समस्या बताई। जब उनसे पूछा गया कि प्रोजेक्ट पर 3000 करोड़ रु. खर्च हुए हैं। तब गोपाल सिंह ने कहा कि नहीं इतना खर्च नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर आगे की योजना के बारे में पूछने पर सिंह ने कहा कि अभी मैं बाहर हूं। लौट कर आने के बाद बात करेंगे।

 

 

1990 में बनी थी सिन्हा जांच कमेटी, रिपोर्ट बनी पर सार्वजनिक नहीं हुई

- इस प्रोजेक्ट में विस्थापितों को मिलने वाली नौकरी में हुए घोटाले की जांच के लिए 1990 में एमएम सिन्हा जांच कमेटी बनी थी। कमेटी ने रिपोर्ट भी तैयार की थी। पर रिपोर्ट को दबा दिया गया। इस रिपोर्ट में कई ऐसे नाम थे, जो फर्जी तरीके से नौकरी ले चुके थे।इनमें से अधिकांश सीसीएल अधिकारी, पैरवीकार, अंचलाधिकारी आदि के रिश्तेदार हैं। आज भी ऐसे कई फर्जी लोग नौकरी कर रहे हैं।

 

विस्थापित नेताओं ने कोयला मंत्री को कई बार पत्र लिखा, सिर्फ आश्वासन मिला, नतीजा शून्य ही रहा

- बेरमो के विस्थापित नेता काशीनाथ केवट ने केंद्रीय कोयला मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक यह प्रोजेक्ट राजनीति का शिकार होता रहेगा। 36 साल बाद भी प्रोजेक्ट चालू करने के प्रति कोयला मंत्रालय और प्रबंधन उदासीन हैं।

- उन्होंने कोयला मंत्री को याद भी दिलाया है कि उन्होंने 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान बेरमो के दुग्दा चुनावी सभा में प्रोजेक्ट को शीघ्र चालू करने और प्रभावित विस्थापितों को समुचित पुर्नवास देने का वादा किया था। साढ़े तीन वर्ष बीत गए, लेकिन अभी तक प्रोजेक्ट चालू करने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है।

 

 

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