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डाउनलोड करेंझुंझुनूं(सीकर). शहर के भानीपुरा गांव में सात दिन की नवजात बेटी को कोई शिव मंदिर के बाहर चबूतरे पर छोड़ गया। बच्ची को तेज बुखार था और सांस लेने में भी दिक्कत थी। लेकिन बच्ची के परिवार के लोगों को रहम नहीं आया। वे उसे छोटे से कपड़े में लपेटकर छोड़ गए। शुक्रवार सुबह मंदिर में आरती करने पहुंचे दो पुजारियों को यह बच्ची मिली। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। बालिका को पहले बुहाना सीएचसी व बाद में झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यहां उसका इलाज चल रहा है। भानीपुरा के शिव मंदिर के चबूतरे पर लोहे की रैलिंग लगी है। गुरुवार देर रात कोई मंदिर के बाहर चबूतरे पर इस बालिका को छोड़ गया। सुबह साढ़े पांच बजे गांव के गुलाब व बाबूलाल यादव आरती के लिए पहुंचे तो उन्हें बालिका के रोने की आवाज सुनाई दी। बाद में सरपंच पति नरेश कुमार, एएसआई रामसिंह, हैड कांस्टेबल, वीरेंद्र यादव, महेंद्र मौके पर पहुंचे और सीएचसी में भर्ती कराया। बच्ची को पीलिया है तथा उसे सांस लेने में भी हल्की तकलीफ हो रही है, लेकिन वह खतरे से बाहर है।
प्री मैच्योर है डिलीवरी :
बीडीके अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वीडी बाजिया का कहना है कि यह प्री मैच्योर डिलीवरी लग रही है क्योंकि यह लगभग आठ माह की है। नाल सूख चुकी है। उसका जन्म 7 से 10 दिन पहले हुआ होगा। वजन 2.2 किलो है।
अस्पताल ने दिया ‘लक्ष्मी’ नाम :
बच्ची को अस्पताल प्रशासन ने ‘लक्ष्मी’ नाम दिया है। बच्ची मिलने की सूचना पर जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुमन पूनिया बीडीके अस्पताल पहुंचीं।
बेटियों के घर से चिंता की खबर :
बेटी बचाने के लिए झुंझुनूं जिले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित कर चुके हैं। जिले की पहचान बेटियों के घर के रूप में होने लगी है। वर्ष 2017 में लिंगानुपात (नवजात) 955 है। ऐसे में लक्ष्मी को यूं मंदिर के बाहर छोड़ जाना चिंता का कारण है ही प्रशासन पर भी सवाल उठाता है।
बच्ची का चेहरा लाल हो गया, शरीर तप रहा था
मैं रोज की तरह मंदिर में बाबूलालजी के साथ आरती के लिए गया था। चबूतरे के पास कोई बच्चा जोर-जोर से रो रहा था। पास जाकर देखा तो एक बच्ची कपड़े में लिपटी हुई थी। चेहरा लाल हो चुका था। शरीर तप रहा था। जी भर आया। गांव वालों को बताया।-गुलाबराम,पुजारी
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