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डे हत्याकांड : छोटा राजन व 8 अन्य को उम्रकैद (राउंडअप)

डे हत्याकांड : छोटा राजन व 8 अन्य को उम्रकैद (राउंडअप)

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 09:15 PM IST
डे हत्याकांड : छोटा राजन व 8 अन्य को उम्रकैद (राउंडअप)
डे हत्याकांड : छोटा राजन व 8 अन्य को उम्रकैद (राउंडअप)

छोटा राजन से इस निर्णय के बारे में पूछे जाने पर कहा, 'ठीक है।'
विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात ने आईएएनएस से कहा, ""यह पहली बार है कि डॉन को हत्या जैसे बड़े मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।""
पिछले वर्ष उसे पासपोर्ट जालसाजी मामले में सात वर्षो की सजा सुनाई गई थी।
विशेष मकोका अदालत के न्यायाधीश समीर अदकर ने बुधवार को यह सजा सुनाई। इससे पहले अदालत द्वारा छोटा राजन और अन्य आठ को दोषी करार दिए जाने के बाद विशेष सरकारी वकील प्रदीप घरात और बचाव पक्ष के वकीलों ने सजा की अवधि पर अपनी-अपनी दलीलें पेश करने के दौरान तीखी बहसें की।
डे (56) जाने माने अपराध संवाददाता थे। जब उनकी हत्या की गई, उस समय वह अंग्रेजी सांध्य दैनिक मिड-डे के संपादक (इन्वेस्टीगेशन) थे। मुंबई में उनके पवई आवास के निकट 11 जून, 2011 को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
डे 'खल्लास-एन ए टू जेड गाइड टू द अंडरवर्ल्ड' और 'जीरो डायल : द डेंजरस वर्ल्ड ऑफ इनफॉरमर्स' के लेखक थे। वह मौत से पहले अपनी तीसरी किताब 'चिंदी : राग्स टू रिचेस' लिख रहे थे।
उन्होंने कथित रूप से अपनी आने वाली इस किताब में माफिया डॉन राजन की चिंदी (तुच्छ) अपराधी के रूप में छवि गढ़ी थी, जिसने संभवत: छोटा राजन को उकसाने का काम किया।
घरात ने आरोपियों के लिए मृत्युदंड की मांग करते हुए न्यायालय में अपनी बहस में कहा, ""डे एक पत्रकार थे। वह लोकतंत्र के चौथे खंभे का प्रतिनिधित्व करते थे। इस मामले को दुर्लभतम की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। एक कड़ा संदेश देने की जरूरत है।""
राजन की दिल्ली की तिहाड़ जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी हुई।
सजा सुनाने के बाद, विशेष न्यायाधीश अदकर ने छोटा राजन (59) से पूछा कि उसे अपनी पूरी जिंदगी अब जेल में बितानी होगी, क्या उसे कुछ कहना है?
कुछ देर बाद, बिना किसी भावना के प्रदर्शन के राजन ने विनम्रता से कहा, ""ठीक है।""
इस मामले में जांच का आदेश देने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त अरूप पटनायक ने फैसले के बाद कहा, ""मैं काफी संतुष्ट महसूस कर रहा हूं।""
विशेष सरकारी अभियोजक प्रदीप घरात ने आईएएनएस को बताया कि विशेष न्यायाधीश समीर अदकर ने इस मामले में सह आरोपी पत्रकार जिग्ना वोरा को बरी कर दिया, जिस पर हत्या की साजिश रचने के अलावा अन्य कई आरोप थे।
बरी किए जाने के जिग्ना रो पड़ीं।
घरात ने कहा कि जोसेफ पॉलसन को भी बरी कर दिया गया, जिस पर हत्या की साजिश रचे जाने के लिए मोबाइल सिम कार्ड मुहैया कराने का आरोप था।
मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से आठ दोषी पाए गए।
यह आठ दोषी रोहित थांगप्पन जोसफ ऊर्फ सतीश काल्या (28), अभिजीत काशराम शिंदे (27), अरुण जनार्दन डाके (27), सचिन सुरेश गायकवाड़ (35), अनिल भानुदास वाघमोड़े (35), नीलेश नारायण शिंगड़े उर्फ बब्लू (34), मंगेश दामोदर अगावाने (25) और दीपक सिसोदिया (28) हैं।
इस मामले के एक अन्य आरोपी विनोद असरानी उर्फ विनोद चेंबुर की एक निजी अस्पताल में अप्रैल 2015 में मौत हो गई थी। असरानी कथित रूप से इस पूरे अभियान का मुख्य सह-साजिशकर्ता और धन प्रबंधक था।
यह जांच पहले पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में इसकी जटिलता को देखते हुए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया।
इस मामले में सनसनीखेज मोड़ तब आया था, जब पुलिस ने 25 नवंबर, 2011 को मुंबई की द एशियन एज की डिप्टी ब्यूरो चीफ जिग्ना वोरा समेत 10 अन्य को गिरफ्तार किया। जांच के दौरान पता चला था कि वोरा कथित रूप से लगातार छोटा राजन के संपर्क में थीं और डे की हत्या के लिए उसे उसकाया था। लेकिन, यह बात सही साबित नहीं हुई और वोरा को बरी कर दिया गया।
मुंबई के उपनगरीय इलाके में सार्वजनिक स्थान पर दिन दहाड़े डे की हत्या कर दी गई थी।
--आईएएनएस
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