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डाउनलोड करेंइंदौर. आलीरापुर के धयड़ी गांव में खेल-खेल में तीन भाई-बहनों ने धतूर के जले बीज खा लिए। दोनों भाई की मौत हो गई, वहीं बहन की हालत गंभीर है। बच्चे अपने नाना-नानी के साथ रह रहे थे। उसके माता-पिता काम करने गुजारत गए हुए थे। माता-पिता को परिजनों से यह कहते हुए बुलाया कि बच्चों की तबीयत खराब है। घर पहुंचे पर उन्हें मौत की सूचना मिली।
- मिली जानकारी अनुसार ग्रामीण फुलसिंह के बच्चे गणपत (4), प्रभु (3) व काजल (6) घर से कुछ दूर खेत में इमली के पेड़ के नीचे खेल रहे थे। खेलते-खेलते उन्होंने धतूरे के जले बीज खा लिए। इसके बाद अचानक तीनों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घबराहट होने लगी। खेत में ही बच्चों के नाना थानसिंह व नानी कंचनबाई कपास बीन रहे थे। जब उन्होंने बच्चों की हालत देखी उनके पास पहुंचे और तीनों को पानी पिलाया। तब तक आसपास काम कर रहे अन्य ग्रामीण इकट्ठा हो गए।
- हालत ज्यादा बिगड़ने पर तीनों बच्चों को टांडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉ. हरेंद्र तोमर ने प्राथमिक उपचार के बाद तीनों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरदारपुर रैफर कर दिया। सरदारपुर ले जाते समय दोनों भाई गणपत व प्रभु की मौत हो गई। वहीं बालिका काजल का सरदारपुर स्वास्थ्य केंद्र में उपचार चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
माता-पिता मजदूरी करने गए थे
- पिता फुलसिंह और मां सोनू उर्फ सुनीता दोनों गुजरात मजदूरी करने गए थे। फुलसिंह मूलत: ग्राम घोर का निवासी है और धयड़ी में घर जमाई बनकर रहा था। दोनों पति-पत्नी जब भी मजदूरी करने जाते तो वे बच्चों को नाना-नानी के पास छोड़ देते थे। उन्हें बताया गया था कि बच्चों की तबीयत खराब है, जब वे सरदारपुर पहुंचे तो उन्हें मौत की सूचना मिली। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिए गए।
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