डेकोरेटिव आइटम्स, ज्वेलरी बेडशीट स्टॉल पर काफी भीड़**
डोरंडा जैप-1 बास्केटबॉल ग्राउंड में प्लेयर्स रोजाना कड़ी मेहनत करके अपना भविष्य बनाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। दो घंटे से ज्यादा प्रैक्टिस करके अपने खेल को निखारने की ललक यहां के खिलाड़ियों में है। खेल विभाग की ओर से संचालित डे बोर्डिंग सेंटर में छोटे-छोटे बच्चों की प्रैक्टिस देखते बनती है। शाम 4 बजे से प्रैक्टिस शुरू हो जाते हैं लेकिन खिलाड़ी तीन बजे से ही ग्राउंड में आकर अपने आपको तैयार करने में लग जाते हैं। छह साल के बच्चे से लेकर सीनियर स्तर के खिलाड़ियों को यहां बास्केटबॉल के गुर सिखाए जा रहे हैं। 2015 में सेंटर खुलने के बाद से कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर का सफर तय करके अपना दम दिखाया। यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट खेलने के बाद रूके नहीं आैर जूनियर एनबीए में खेलकर सबका चौंकाया। अंडर-13 से लेकर सीनियर स्तर के टूर्नामेंट में ट्रॉफी जीतकर रांची का नाम रौशन किया।सेंटर के खिलाड़ियों ने विभिन्न टूर्नामेंट में सेंटर को कई बार चैंपियन बनवाया। 2016 आैर 2017 में अंडर-19 ब्वॉयज टीम ने स्टेट चैंपियनशिप का ट्रॉफी सेंटर को दिया। 2018 में अंडर-13 में ब्वॉयज आैर अंडर-16 में गर्ल्स टीम स्टेट टूर्नामेंट में चैंपियन बनीं। 2019 में ब्वॉयज अंडर-13 टीम ने खिताब अपने नाम किया। वहीं, गर्ल्स की टीम रनर-अप रही थीं। सेंटर में अंडर-13, 16, 19 आैर सीनियर स्तर के खिलाड़ियों को संवारा जा रहा है।