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कोर्ट में 2 मामले: बिना पति को बताए गर्भपात कराने और बेइज्जती को मानसिक क्रूरता बताया

3 वर्ष पहले
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नई दिल्ली.  दिल्ली हाईकोर्ट ने मैट्रिमोनियल डिस्प्यूट के दो मामलों में पति के हक में फैसला दिया। जस्टिस दीपा शर्मा और जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल की बेंच ने बिना पति को बताए गर्भपात कराने और पति को बूढ़ा, काला, बदसूरत और अनपढ़ कहने को मानसिक क्रूरता की श्रेणी में रखा। इसके अलावा कोर्ट ने शादी के 18 साल बाद पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के केस को समाज में पति की प्रतिष्ठा को नुकसान करने वाला माना।

 

केस 1: शादी के पहले ही दिन संबंध बनाने से मना किया, 2 महीने बाद साथ रहने को राजी हुई

पति के आरोप के मुताबिक, फरवरी 2007 में शादी हुई थी। उसकी पत्नी ने शादी के पहले दिन ही शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया। पत्नी का कहना था कि चूंकि उसका रंग काला है, उसकी उम्र उससे अधिक है और वह देखने में आकर्षित नहीं है इसलिए वह उसे पसंद नहीं करती। पति का दावा था कि दो महीने परिजनों के समझाने के बाद वह उसकी पत्नी के रूप में रहने के लिए राजी हुई थी। लेकिन वह उससे झगड़े करती थी, उसकी मां के साथ गाली-गलौज करती थी, उसे मारती थी। वह उसे बूढ़ा, काला, बदसूरत और अनपढ़ कहती थी। मार्च 2008 में उनके घर बेटे ने जन्म लिया। 

 

पिता के घर जाकर कराया गर्भपात, कहा- मुझे प्राइवेट जॉब करनी है

सितंबर 2010 में गर्भवती थी। वह बिना बताए पिता के घर चली गई और वहां गर्भपात करा दिया। उसका तर्क था कि वह प्राइवेट नौकरी करना चाहती है जहां उसे सुंदर दिखना होगा और दूसरा बच्चा पैदा करने के बाद उसके शरीर की बनावट खराब हो जाएगी। पति ने 2013 में निचली अदालत में तलाक की अर्जी दायर की थी। जनवरी 2018 में कोर्ट ने उसे तलाक दिया। पत्नी ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया। हाईकार्ट ने पति के हक में फैसला दिया है। वहीं, महिला का आरोप था कि शादी के पहले दिन से पति दहेज उत्पीड़न करने लगा था।  

 

केस 2: शादी के 18 साल बाद किया दहेज उत्पीड़न का केस, पर साबित न कर सकी 

दंपती की नवंबर 1982 में शादी हुई थी। चार बच्चे भी हुए। शादी के 18 साल बाद साल 2000 में महिला ने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दायर किया। महिला का आरोप था कि उसके पति की दिमागी हालत ठीक नहीं है। वहीं, पति का तर्क था कि महिला अपने परिजनों को आर्थिक मदद करने के लिए उससे पैसे लेती है। उसने अपने साले की शादी में भी पैसे खर्च किए। महिला ने अपने भाइयों के साथ मिलकर जबरन उसकी प्रॉपर्टी अपने नाम करवाने की कोशिश की। वह उसके साथ मारपीट करती है। 1990 में उसे अस्थमा हुआ, लेकिन वह उसका ख्याल नहीं रखती थी। वह घर में खुले में सोने को मजबूर है, उसे बाथरूम तक यूज नहीं करने दिया जाता। 

 

पति को मानसिक तनाव हुआ, जो क्रूरता है: कोर्ट

मार्च 2018 में निचली अदालत ने माना कि शादी के 18 साल बाद दहेज उत्पीड़न के केस से समाज में पति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और महिला के व्यवहार से पति को मानसिक तनाव हुआ, जो क्रूरता है और तलाक का आधार है। इस आदेश को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। जिसे अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और पति के हक में फैसला दिया है।

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