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डाउनलोड करेंपटना। लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के संरक्षक शरद यादव ने कहा कि केंद्र में एनडीए सरकार के आने के बाद से देश में अघोषित आपातकाल कायम हो गया है। मोदी सरकार लोकतंत्र को कुचलने का प्रयास कर रही है। इसका विपक्ष के तमाम राजनीतिक दलों को मिलकर विरोध करना चाहिए। शरद शुक्रवार को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एलजेडी के स्थापना सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने ने कहा कि भाजपा ने देश में दहशत का माहौल बना दिया है। इसके कारण सभी राजनीतिक दल भी चुप हैं। सरकार के मंत्री भी डरते हैं और सार्वजनिक रूप से कुछ भी बोल नहीं पाते हैं। संविधान ने लोगों को वोट देने और बोलने की आजादी दी है लेकिन मोदी सरकार की कार्यशैली से यह आजादी खतरे में पड़ती जा रही है।
शरद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रति वर्ष दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। अब युवा रोजगार पर सवाल पूछते हैं तो उन्हें पकौड़ा तलने की सलाह दी जाती है। मोदी सरकार अपने चार साल के शासन में आठ करोड़ युवाओं को रोजगार देती तो इससे समाज के दलित, पीड़ित और कमजोर वर्ग के लोगों को भी फायदा होता। मोदी सरकार के शासन में देश में 4600 युवाओं ने आत्महत्या कर ली है। किसानों को उनकी फसल लागत का डेढ़ गुना मूल्य देने का वादा किया था लेकिन आज फसल का खरीददार नहीं मिलता। किसान को औने-पौने दाम में अपनी उपज को बेचना पड़ता है। किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। सम्मेलन ने एलजेडी के बिहार अध्यक्ष रमई राम, पूर्व मंत्री अर्जुन राय, अरुण श्रीवास्तव, जदयू से नाता तोड़ने वाले विधानसभा के पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी, संतोष कुशवाहा, डॉ.रंजन कुमार और मनीष समेत अनेक नेता शामिल हुए।
कर्नाटक में जनादेश का उल्लंघन
शरद ने कहा कि कर्नाटक में जनादेश का उल्लंघन किया गया है। वहां के 55 प्रतिशत लोगों ने भाजपा के खिलाफ वोट दिया है। भाजपा को 104 सीटें मिली हैं जबकि कांग्रेस और जेडीएस को 117 सीटें मिली हैं। इसके बावजूद राज्यपाल ने वहां भाजपा सरकार को शपथ दिला दी। मणिपुर, गोवा और मेघालय में कांग्रेस को अधिक सीटें थी। उस समये कम सीटों वाली पार्टियों की सरकार बनवा दी गई थी। बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद राजद सबसे बड़ा दल था। तब राजद को मौका देने की बजाए राज्यपाल ने जदयू और भाजपा की सरकार बनवा दी थी। शरद ने कहा कि अटल-आडवाणी के समय भाजपा का राष्ट्रीय एजेंडा था। तब वह पार्टी नीतियों और सिद्धांतों पर चलती थी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार केवल एक वोट से गिर गई थी। और, उन्होंने नैतिकता के कारण इस्तीफा दे दिया था। आज तो नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं है।
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