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डाउनलोड करेंचंडीगढ़. हरियाणा सिविल सर्विसिस (एचसीएस) ज्युडीशियल ब्रांच के पेपर लीक मामले में एसआईटी की फजीहत होने के बाद गुरुवार को चंडीगढ़ के डीजीपी तजिंदर सिंह लूथरा हाईकोर्ट में खुद पेश हुए। उन्होंने माना कि गलती हुई है और आश्वासन दिया कि उनकी पर्सनल सुपरविजन में अब यह मामला रहेगा। फ्यूचर में कोई गलती भी नहीं की जाएगी।
डेढ़ करोड़ में बिक रहा था एचसीएस परीक्षा का पेपर
- पिंजौर निवासी वकील सुमन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि एचसीएस परीक्षा का डेढ़ करोड़ में पेपर बिक रहा था और इसकी उसे भी पेशकश की गई थी। परीक्षा के लिए याची ने भी आवेदन किया था। तैयारी के लिए याची ने एक कोचिंग सेंटर ज्वाॅइन किया। यहां उसकी दोस्ती सुशीला से हुई।
- एक दिन उसने सुशीला से लेक्चर से जुड़ी ऑडियो क्लिप मांगी, जो ऑडियो क्लिप उसे दी गई, उसमें सुशीला किसी दूसरी लड़की सुनीता से बात कर रही थी और डेढ़ करोड़ में नियुक्ति की बात कर रही थी। सुशीला ने याची को छह सवाल भी बताए जो परीक्षा में आने थे। 16 जुलाई को क्वेश्चन पेपर में वही सवाल अाए।
सुनीता और सुशीला टॉपर में शामिल
- हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुनीता और सुशीला का रिजल्ट देखा तो पाया कि सुनीता जनरल कैटेगरी और सुशीला रिजर्व कैटेगरी में टॉपर है। हाईकोर्ट की रिक्रूटमेंट कमेटी ने मामले की जांच की तो पता चला कि पूर्व रजिस्ट्रार (रिक्रूटमेंट) बलविंदर शर्मा और टॉपर रही उम्मीदवार सुनीता के बीच एक साल में 760 कॉल अथवा एसएमएस एक्सचेंज हुए।
आरोपियों का इस तरह हावी होना जांच में मिलीभगत का इशारा- कोर्ट
जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस जीएस संधावालिया की फुल बेंच ने कहा कि यह पहला मामला है, जहां आरोपियों ने एसआईटी की कॉल डिटेल्स ली। आरोपियों का इस तरह हावी होना जांच में मिलीभगत का इशारा करती है। बेंच ने डीजीपी से पूछा कि एसआईटी क्या किसी दबाव में काम कर रही है तो डीजीपी ने इससे इंकार किया। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट जांच को मॉनिटर कर रहा है और जांच में परेशानी कोर्ट को बताई जा सकती है।
प्रॉसीक्यूशन और इन्वेस्टिगेशन एजेंसी में तालमेल की कमी
- हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रॉसीक्यूशन और इन्वेस्टिगेशन एजेंसी में तालमेल की कमी साफ दिखाई दे रही है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एसआईटी की पैरवी कर रहे अधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझा ही नहीं। यही कारण है कि गवाहों के बयान और कॉल डिटेल्स जैसे फैसले के खिलाफ अपील ही नहीं की गई।
- 22 फरवरी को बयान और 10 अप्रैल को कॉल डिटेल्स प्रिजर्व कराने संबंधी अर्जी जिला अदालत ने मंजूर कर ली थी। एसआईटी ने इन फैसलों के खिलाफ अपील दायर नहीं की। यह समझने की जरूरत है कि जांच के जारी रहते मजिस्ट्रेट के सामने सील कवर में रखे बयान आरोपियों को कैसे मुहैया करवा दिए गए।
अभी भी एसआईटी के लापरवाह अफसरों को बचा रहे डीजीपी
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