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PHOTO: अमरनाथ के 2 कबूतरों का रहस्य! जानिए कैसे हो गए अमर

अमरनाथ की गुफा में इन 2 अमर कबूतरों का रहस्य भी महादेव की भक्ति में डुबो देता है ।

Danik Bhaskar | Jun 13, 2012, 03:43 PM IST
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हिन्दू पौराणिक मान्यताओं में बाबा अमरनाथ के दर्शन से मिलने वाला पुण्य काशी और प्रयाग जैसे महातीर्थों से भी ज्यादा बताया गया है। बाबा अमरनाथ की दर्शन यात्रा हिन्दू माह आषाढ़ की पूर्णिमा तिथि से श्रावण माह की पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चलती है। इस साल प्रतिकूल मौसम के चलते यह यात्रा 25 जून से शुरू होगी।
पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी की आरती और पूजा के बाद दर्शन के लिए भक्तों का आना शुरू होता है। बाबा अमरनाथ की यात्रा शुरू होते ही कुछ ही दिनों में शिव भक्ति का यह रंग और गहरा जाएगा।
इस गुफा में आने वाले शिवभक्तों के बीच पापमुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए हिम शिवलिंग के दर्शन का महत्व है, जिसे श्रद्धा से भक्त बर्फानी बाबा पुकारते हैं। बाबा बर्फानी के शिव के अद्भुत स्वरूप के अलावा इस गुफा में एक ओर वजह भगवान शंकर और ईश्वरीय सत्ता का प्रत्यक्ष अनुभव कराती है। यह वजह है - इसी गुफा में रहने वाला कबूतर का एक जोड़ा। तस्वीर पर क्लिक कर जानिए इन 2 कबूतरों से जुड़ा रहस्य -












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जब भगवान शंकर ने माता पार्वती के हठ करने पर अमरत्व का रहस्य उजागर करने का निश्चय किया तो वह माता पार्वती को लेकर अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचे। भगवान शंकर चाहते थे कि अमरता का रहस्य सुनाने के दौरान गुफा और उसके आस-पास कोई प्राणी मौजूद न रहे। भगवान शंकर ने अपने तेजोबल से कालाग्रि रुद्र की उत्पत्ति की। उन्होनें कालाग्रि रुद्र को आदेश दिया कि वह गुफा और गुफा के आस-पास मौजूद सभी वनस्पतियों और प्राणियों को भस्म कर दे। कालाग्रि रुद्र ने आदेश का पालन किया, किंतु स्वयं भगवान शंकर के आसन के नीचे कबूतर का एक अंडा बच गया, जिससे वे अनजान थे। भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई। कहानी सुनने के दौरान माता पार्वती तो सो गईं, किंतु तब अंडा वहीं मौजूद था। माना जाता है कि बाद में इसी अण्डे से जुडवां कबूतरों का जन्म हुआ, जो अमरत्व की कहानी के प्रभाव से अमर हो गए। माना जाता है कि आज भी गुफा में दिखाई देने वाले 2 कबूतर, वही अमर कबूतर का जोड़ा है।