पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंरोज़ी-रोटी के कुछ ज़रिए, कुछ काम-धंधे तेज़ी से बदलते समय के साथ दम तोड़ रहे हैं. इसके साथ ही उन लोगों की आजीविका ख़तरे में पड़ गई है जो इन पारम्परिक पेशों से जुड़े हुए हैं. आइए एक नज़र डालते हैं कुछ ऐसे ही पेशों पर.
चुड़िहारिनछोटे शहरों और कस्बों में गली-गली घूमकर रंग-बिरंगी चूड़ियां पहनाने वाली महिलाएं चुड़िहारिन कहलाती थीं. किसी ज़माने में हर चुड़िहारिन के हिस्से कोई गांव या मोहल्ला होता था.
वो या उसके परिवार का ही कोई सदस्य गांवभर में घूमकर चूड़ियां पहनाकर जाता था. उन्हें बदले में पैसा या अनाज मिलता था. लेकिन चुड़िहारिनें अब कहीं-कहीं मेले-ठेले या छोटे हाट-बाज़ार में ही नज़र आती हैं, अंतिम पीढ़ी की तरह. (रायपुर से आलोक पुतुल)
तांगावालारमेश सिप्पी की सुपरहिट फ़िल्म \'शोले\' में बसंती का तांगा आपको याद होगा. ज़्यादा पुरानी बात नहीं है जब क़स्बों और शहरों में तांगा यातायात का सस्ता और सुलभ साधन हुआ करता था.
लेकिन अब ऑटो ने तांगे की जगह ले ली है. यही वजह है कि जहां तांगों की भरमार होती थी, वहां अब मुश्किल से ही तांगे नज़र आते हैं. यानी एक पेशा पूरी तरह से ख़त्म होने की कगार पर पहुंच गया है. (रायपुर से आलोक पुतुल)
दोने-पत्तलशाही-ब्याह या किसी और तरह का आयोजन हो, गांव-देहातों में यहां तक की शहरों में भी खाने-पाने के लिए दोना-पत्तल का इस्तेमाल आम होता था.
लेकिन अब बाज़ार में उनकी जगह नई किस्म के मशीन से बनने वाले कागज़, थर्मोकोल और प्लास्टिक के सफ़ेद-चमकीले दोने-पत्तलों ने ले ली है.
यही वजह है कि हरे पत्तल-दोने अब कम ही नज़र आते हैं और इसी के साथ उन लोगों की रोज़ी-रोटी भी ख़तरे में पड़ गई है जो इन्हें बनाते थे. (जयपुर से आभा शर्मा)
लोढ़ी-सिलौटीपत्थर से मसाले पीसने के लिए लोढ़ी-सिलौटी पहले घर-घर में पाए जाते थे. देश के हर कोने में कुछ ख़ास जातियां दशकों से इस पेशे में लगी हैं.
पटना में कानू जाति के लोग के लोग इसी हुनर के ज़रिए अपना पेट पालते आए हैं. ऐसे ही एक परिवार के 40 साल के गणेश कंजर बताते हैं कि मिक्सी के बढ़ते चलन के कारण पिछले एक दशक से उनका कारोबार काफी कम गया है. (पटना से मनीष शांडिल्य)
(इस कहानी की दूसरी कड़ी पढ़ें और जाने दम तोड़ते ऐसे ही कुछ और पेशों के बारे में)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.