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आरआई ने द्वारकापुरी थाने के लिए सरकारी के बजाय नाप दी निजी संस्था की जमीन

3 वर्ष पहले
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इंदौर.     सरकारी अफसरों की लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। नए थाना भवन के लिए आरआई और प्रशासन के अफसरों ने अहीरखेड़ी के बजाय तेजपुर गड़बड़ी की जमीन का सीमांकन कर दिया और उसे पुलिस विभाग को सौंप दिया। इधर, जिस संस्था की जमीन थी, वह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग में नक्शा रिनीवल करवाने पहुंची तो पता चला कि उनकी जमीन पर थाने का काम शुरू हो गया है। दावे-आपत्ति के बाद अब कानूनी लड़ाई शुरू हुई है और कलेक्टर ने डीआईजी को चिट्‌ठी लिखकर काम रोकने को कहा है।  


मामला द्वारकापुरी थाने के नए भवन के निर्माण का है। कलेक्टर ने 2015 में नया भ‌वन बनाने के लिए पुलिस विभाग को अहीरखेड़ी के खसरा नंबर 231 की 22 हजार वर्गफीट जमीन देने का आदेश दिया था। आदेश की फाइल पुलिस विभाग ने तहसीलदार कार्यालय पहुंचाई, ताकि आवंटन प्रक्रिया शुरू हो। तहसीलदार ने आरआई को जमीन की नपती और सीमाकंन कर कार्रवाई करने को कहा। बस, यहीं से शुरू हुई गड़बड़ी। आरआई ने अहीरखेड़ी के खसरा नंबर 231 के बजाय उससे सटे तेजपुर गड़बड़ी के खसरा नंबर  9/2- 9/3 की जमीन नाप दी और पुलिस महकमे के हवाले कर दी। यह जमीन अहिल्या माता सेवक संघ गृह निर्माण सहकारी साख संस्था की है। अब यहां थाना भवन 30 फीसदी से ज्यादा आकार ले चुका है। 


जानकारी ही नहीं : कलेक्टर ने दस्तावेज निकलवाकर कराई जांच
संस्था पदाधिकारी मौके पर पहुंचे तो जमीन पर थाना बनते देख चौंक गए। उन्होंने कलेक्टर और डीआईजी से शिकायत की। कलेक्टर ने अफसरों से पूछताछ की तो पहले उन्होंने अनभिज्ञता जताई। बाद में दस्तावेजी जांच में कुछ त्रुटि मिली, पर फिर भी थाने का काम नहीं रुका।

 

कलेक्टर ने लिखी चिट्‌ठी- काम रुकवाएं, सरकारी जमीन पर ही निर्माण हो
अफसरों और मुख्यमंत्री को शिकायत करने के बाद भी जब थाने का काम नहीं रुका तो संस्था ने कोर्ट में आवेदन लगाया। कोर्ट ने तुरंत स्टे कर दिया। इसके बाद भी पुलिस ने निर्माण नहीं रोका तो संस्था सदस्य आदेश की कॉपी लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे। 17 अप्रैल को कलेक्टर ने डीआईजी को चिट्ठी लिखकर कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए काम रोक दिया जाए। यह भी सुनिश्चित करें कि थाने का काम सरकारी जमीन पर ही हो। साथ ही ध्यान रखें कि किसी भी तरह न्यायालय के आदेश की अवमानना न हो। 

 

संस्था ने काटे हैं प्लॉट

अहिल्या माता सेवक संस्था ने 1990 में इस खसरे पर 46 प्लॉट काटे थे। 800 वर्गफीट के इन प्लॉटों के लिए टीएंडसीपी से नक्शा भी मंजूर करवा लिया था। उसी नक्शे को रिन्यू करवाने सदस्य टीएंडसीपी कार्यालय पहुंचे तो वहां पता चला कि उक्त भूमि थाने के लिए आवंटित हो गई है। 

 

तो अहीरखेड़ी के मकान हो जाएंगे अवैध
मामले में आरआई संजय भदौरिया ने बताया कि यदि उक्त जमीन की नपती अहीरखेड़ी से करेंगे तो वह हमारे सरकारी खसरे 231 में ही आती है ओर अगर तेजपुर गड़बड़ी से करते हैं तो उनके हिस्से में आती है। तेजपुर गड़बड़ी से नपती करते हैं तो अहीरखेड़ी के मकान अवैध हो जाएंगे। मैंने तो सही नपती की है और फील्ड बुक बनाकर नक्शे पर निशान लगाए हैं। चूंकि संस्था की नपती पुराने आरआई ने की है, इसलिए अब दोबारा नपती और सीमांकन सुप्रिंटेंडेंट ऑफ लैंड रिकॉर्ड से करवा लेना चाहिए।

 

कोर्ट में मामला : पुलिस ने जवाब किया पेश, प्रशासन अलग से देगा
तहसीलदार पल्लवी पुराणिक ने बताया कि दो साल पहले जिला प्रशासन ने उक्त जमीन पटवारी और आरआई से नपती व सीमांकन करवाकर थाने के लिए आवंटित की थी। अब इसका प्रकरण कोर्ट में है। वहां से जो आदेश मिले हैं, उसका पालन कर रहे हैं। पुलिस ने जवाब पेश कर दिया है, हमको जवाब देना है।  

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