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अगर बच्चा नहीं हो रहा तो बर्बाद न करें समय, आईवीएफ के लिए इंतजार न करें

आज की बदलती लाइफस्टाइल के कारण इन दिनों कई कपल्स फैमिली की प्लानिंग काफी लेट करते हैं।

Danik Bhaskar | Aug 29, 2018, 12:08 PM IST

आज की बदलती लाइफस्टाइल के कारण इन दिनों कई कपल्स फैमिली की प्लानिंग काफी लेट करते हैं। पति-पत्नी दोनों का वर्किंग होना, काम का प्रेशर, करियर की चिंता आदि इसके स्वाभाविक कारण हो सकते हैं। भले ही जिंदगी के अन्य पहलुओं में उम्र मायने नहीं रखती हो, लेकिन महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम पर यह बात लागू नहीं होती। यह इस तरह से बना होता है कि 30 साल के बाद इसकी क्षमता कम होती जाती है। इसलिए बढ़ती उम्र में नेचुरली कंसिव होने में तो दिक्कत होती ही है, इनफर्टिलिटी के केस में आईवीएफ की सफलता की दर भी कम हो जाती है। इसलिए ऐसे मामलों में दंपतियों को जल्दी से जल्दी आईवीएफ ट्राय करने की सलाह दी जाती है।

कैसे काम करता है महिला का रिप्रोडक्टिव सिस्टम?

संतोनोत्पत्ति के लिए महिला का रिप्रोडक्टिव सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। महिला के रिप्रोडक्टिव सिस्टम के दो कार्य होते हैं : एक, एग्स प्रोड्यूस करना और दूसरा, जन्म होने तक भ्रूण की सुरक्षा और विकास करना। जबकि पुरुष में रिप्रोडक्टिव सिस्टम का एक ही काम होता है स्पर्म को प्रोड्यूस और डिपॉजिट करना। इसी वजह से महिला का रिप्रोडक्टिव सिस्टम काम्प्लिकेट भी होता है और उम्र बढ़ने के साथ इसकी क्षमता घटती जाती है।

उम्र बढ़ने पर क्यों घटने लगते हैं मां बनने के चांस?

जब मां के पेट में फीमेल भ्रूण होता है, तो उसमें एक मिलियन एग्स होते हैं। जिस समय बच्चे का जन्म होता है, उस समय उसकी ओवरीज में एक से दो मिलियन एग्स होते हैं। इसमें से जिंदगी भर में 400 से 500 एग्स ही इस्तेमाल होंगे। ओवॅरियन में रिजर्व उस समय तक धीरे-धीरे घटता रहता है, जब तक कि महिला का मेनोपॉज नहीं हो जाता। उम्र बढ़ने के साथ एग्स की क्वालिटी भी घटती जाती है। एडवान्स्ड मेटरनल एज में एग्स में क्रोमोसोमल एब्नॉर्मलिटिज की संभावना भी रहती है जिसकी वजह से या तो कंसीव करने में दिक्कत हो सकती है या फिर मिसकैरेज की आशंका बढ़ जाती है। अमेरिकन सोसाइटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की एक स्डटी के अनुसार 30 साल की उम्र तक महिला के कंसीव होने के चांस 20 फीसदी तक होते हैं। जबकि 40 साल की उम्र में मां बनने की संभावना घटकर केवल 5 फीसदी तक रह जाती है।

आईवीएफ के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है एज फैक्टर?

आईवीएफ की सफलता में भी उम्र बहुत मायने रखती है, क्योंकि आखिरकार इस टेक्नीक में भी महिला के हेल्दी एग्स की जरूरत होती है। चूंकि उम्र बढ़ने के साथ एग्स की संख्या घटने के साथ-साथ उनकी क्वालिटी भी कम होती जाती है। इसलिए बढ़ती उम्र में आईवीएफ में भी दिक्कत हो सकती है। आईवीएफ की सक्सेस रेट जहां 30 साल से कम उम्र की महिलाओं में 60 फीसदी है। 31 से 35 साल के बीच की महिलाओं की सक्सेस रेट करीब 50 फीसदी और 35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में 15 से 20 फीसदी तक होती है। इसलिए इनफर्टिलिटी के केस में कपल को अपना वक्त इधर-उधर गंवाने के बजाय जितनी जल्दी हो सके, आईवीएफ ट्राय करना चाहिए। बढ़ती उम्र में आईवीएफ में खर्च भी ज्यादा होता है क्योंकि इसमें ज्यादा आईवीएफ साइकल ट्राय करने पड़ सकते हैं। हालांकि अगर आप डोनर एग्स का सहारा ले रही है तो फिर महिला की उम्र इतनी मायने नहीं रखती।

(अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1800 102 9413 पर कॉल करें या https://www.bhaskar.com/befertile/ पर विजिट करें।)