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डाउनलोड करेंरायपुर. प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भर्ती करने का सिस्टम बदलने की तैयारी है। अभी डाक्टरों की नियमित भर्ती छग लोक सेवा आयोग के माध्यम से की जाती है। नए भर्ती नियम में ये अधिकार मेडिकल कॉलेज के डीन को दिया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है नए सिस्टम से कॉलेजों में बिना देरी किए डॉक्टरों की भर्ती होने लगेगी। इससे मेडिकल कॉलेज की मान्यता बचाए रखने में मदद मिलेगी। नया सिस्टम मध्यप्रदेश की तरह होगा।
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 500 से ज्यादा पद खाली है। असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेसीडेंट, रजिस्ट्रार, जूनियर रजिस्ट्रार व डेमोस्ट्रेटर की भर्ती लोक सेवा आयोग करता है। अभी तक 2003, 2010, 2015 व 2017 में डाॅक्टरों की भर्ती पीएससी से हुई है। कई बार भर्ती प्रक्रिया में देरी होने की वजह से मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ जाती है। अब डीन को भर्ती का अधिकार मिल जाने से कागजी प्रक्रिया में देरी की संभावना खत्म हो जाएगी। डीन स्वशासी नियमों के तहत डॉक्टरों की भर्ती करेंगे। भर्ती नियमित होगी। डॉक्टरों को वेतन स्वशासी मद से मिलेगा। इसमें डॉक्टरों का तबादला भी नहीं होगा। जिस कॉलेज में वे नियुक्त किए जाएंगे, वे वहीं से रिटायर होंगे। भर्ती कमेटी में राजस्व कमिश्नर चेयरमेन, डीन सचिव व सीनियर प्रोफेसर सदस्य बनाए जाएंगे। वर्तमान में अंबिकापुर, रायगढ़ मेडिकल कॉलेज खुलने से डॉक्टरों काे तबादला का डर सताता रहता है।
जो पहले से पीएससी से चयनित डाॅक्टर हैं, उनका तबादला जरूरत के अनुसार किया जाएगा।
2010 में दो साल की देरी
पीएससी से जो भी भर्ती हुई है, उसमें हर बार देरी होती है। 2010 में मामला कोर्ट में जाने के कारण नॉन क्लीनिकल वाले डॉक्टरों की ज्वाइनिंग 2012 में हुई थी। 2010 के बाद सीधे 2015 में भर्ती हुई थी।
प्रस्ताव शासन को भेजा है
चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉक्टर एके चंद्राकर ने बताया कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की भर्ती का अधिकार डीन को देने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। इससे अंबिकापुर समेत सिम्स बिलासपुर व रायगढ़ समेत दूसरे कॉलेजों की मान्यता बचाने में आसानी रहेगी। भर्ती नियमित रहेगी। डॉक्टरों के प्रमोशन भी समय पर होगा।
अंबिकापुर में रहा जीरो ईयर
डॉक्टरों व सुविधा की कमी के कारण पिछले साल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज को जीरो ईयर घोषित कर दिया था। इस साल भी स्थिति अच्छी नहीं है। रायगढ़ व सिम्स बिलासपुर में डॉक्टरों की भारी कमी है। डीएमई कार्यालय जल्दी से जल्दी डॉक्टरों की भर्ती कर मान्यता बचाए रखना चाहते हैं।
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